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Bilaspur News: मैपिंग सर्वे के एक साल बाद भी नहीं सुलझी गृह कर की समस्या

Thu, 28 Sep 2023 04:17 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 28 Sep 2023 04:17 PM IST
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House tax problem not solved even after one year of mapping survey
- गृहकर वसूलने में घुमारवीं नगर परिषद पर लगाए जाते रहे हैं भेदभाव के आरोप
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- घरों का एरिया बहुत कम, फिर भी कांप्लेक्स के बराबर लिया जाता है टैक्स

संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। नगर परिषद घुमारवीं का ज्योग्राफिकल इन्फॉरमेशन सिस्टम (जीआईएस) से करवाया गया मैपिंग सर्वे भी लोगों की नगर परिषद के गृह कर वसूलने में किए जा रहे भेदभाव की शिकायतों का समाधान नहीं कर पाया है। आज भी लोगों की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।
कई वर्ष से स्थानीय लोग नगर परिषद में इस बात की शिकायत करते आ रहे हैं कि गृहकर वसूलने में नगर परिषद उनके साथ भेदभाव वाला तरीका अपना रहा है। लोगों की शिकायत थी कि नगर परिषद उनके घरों के एरिया के हिसाब से ज्यादा हाउस टैक्स वसूल कर रहा है। आरोप यह था कि कुछ लोगों के बड़े-बड़े कांप्लेक्स होने के बावजूद नगर परिषद उनसे कम गृहकर वसूल रहा था, जबकि उन लोगों के घरों का एरिया बहुत कम है। नगर परिषद उनसे बड़े-बड़े कांप्लेक्स वालों की अपेक्षा ज्यादा कर वसूल रहा है। ऐसे में नगर परिषद ने हर घर की दोबारा से मैपिंग कराने का निर्णय लिया था, ताकि उसके बाद नए सिरे से घरों का हाउस टैक्स सुनिश्चित किया जा सके। नगर परिषद की ओर से इस मैपिंग को ज्योग्राफिकल इन्फॉरमेशन सिस्टम के तहत करवाने का निर्णय लिया गया। नगर परिषद के पदाधिकारी का दावा था कि इस सर्वे से वह उन संपत्तियों पर भी गृहकर लगा सकेंगे, जिस पर हाउस टैक्स नहीं लगा है। साथ ही इस सिस्टम द्वारा की गई मैपिंग से अवैध निर्माण पर भी शिकंजा कसा जा सकेगा। इससे उन सभी शिकायतों पर भी विराम लग सकेगा।
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नगर परिषद का यह भी मानना था कि मैपिंग करने के बाद अगर किसी को हाउस टैक्स ज्यादा या कम पाया जाता है तो फिलहाल उससे कोई भी रिकवरी या रिफंड नहीं लिया जाएगा, लेकिन नगर परिषद के सारे दावे कागजों में ही सीमित होकर रह गए, क्योंकि इस निर्णय के बाद नगर परिषद द्वारा ज्योग्राफिकल इन्फॉरमेशन सिस्टम के तहत घरों की मैपिंग का काम शुरू किया गया। हैरानी की बात तो यह है कि नगर परिषद द्वारा जिस एजेंसी को मैपिंग का काम दिया गया था वह लोगों के घरों को फीते से माप कर चलते बने, जबकि जीआईएस सिस्टम से किया जाने वाला सर्वे ड्रोन की सहायता से किया जाता है। इस मैपिंग को पूरी किए करीब एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन लोगों की समस्या का समाधान आज तक नगर परिषद नहीं कर पाई है। स्थानीय लोगों की अब भी वही शिकायत है कि नगर परिषद अभी भी उनसे गृह कर वसूलने में भेदभाव वाली नीति अपना रहा है और आज भी उनसे ज्यादा गृह कर वसूल किया जा रहा है।
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कोटस
लोगों की शिकायतों के समाधान के लिए नगर परिषद की ओर से जीआईएस सर्वे करवाकर घरों की मैपिंग करवाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन जिस एजेंसी को काम दिया गया था उनके द्वारा किए गए सर्वे में कुछ त्रुटियां पाई गई थी। अब जल्द ही सरकार की एजेंसी दोबारा से घरों की मैपिंग करेगी। इसके बाद लोगों की सभी शिकायतें दूर कर दी जाएंगी।

- रीता सहगल, नगर परिषद अध्यक्ष घुमारवीं
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