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Bilaspur News: घवांडल अस्पताल में तीन चिकित्सकों पर सवा लाख आबादी के स्वास्थ्य का जिम्मा
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नयनादेवी के आदर्श अस्पताल में 10 में सात पद चल रहे हैं खाली
सीएचसी स्वारघाट में एकमात्र डेंटल, पीएचसी टोबा, भाखड़ा, तरसूह में नहीं कोई चिकित्सक
तरूणेश शर्मा
श्री नयनादेवी जी (बिलासपुर)। समाज के अंतिम व्यक्ति तक सभी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने का दावा करने वाली प्रदेश सरकार के सभी वादे श्री नयनादेवी जी विधानसभा क्षेत्र में खोखले नजर आ रहे हैं। करीब सवा लाख की आबादी वाले विधानसभा क्षेत्र में मात्र एक अस्पताल में तीन चिकित्सक ही हैं। इसके अलावा सीएचसी स्वारघाट एक डेंटल के सहारे चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि क्षेत्र की सभी पीएचसी पर डॉक्टरों के अभाव में ताले लटके हैं।
चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे शक्तिपीठ श्री नयनादेवी जी के सिविल अस्पताल घवांडल को प्रदेश सरकार ने गत वर्ष आदर्श अस्पताल बनाया था। इसके बाद यहां पर चिकित्सकों के 10 पद सृजित किए गए थे। लेकिन वर्तमान में यहां मात्र तीन ही चिकित्सक तैनात हैं। इनमें गायनी, मेडिसिन और जनरल एमबीबीएस शामिल हैं। हाल ही में प्रदेश सरकार ने घवांडल अस्पताल को छह डॉक्टर दिए थे, लेकिन अभी तक उनमें से मात्र गायनी विशेषज्ञ ने ही ज्वाइन किया है। वहीं अभी भी अस्पताल में सात पद खाली चले हैं। इसके अलावा सीएचसी स्वारघाट में एकमात्र डेंटल विशेषज्ञ तैनात हैं। वहीं, पीएचसी टोबा, भाखड़ा, तरसूह सहित अन्य प्राथमिक केंद्रों में कोई चिकित्सक नहीं है। यहां के लोगों को अगर प्राथमिक उपचार की भी जरूरत हो तो भी उन्हें करीब 15 किलोमीटर तक का सफर करना पड़ता है। तब जाकर घवांडल अस्पताल में सेवाएं मिलती हैं। सरकार क्षेत्र की कई पीएचसी में डॉक्टर तैनात कर चुकी है, लेकिन उनमें से किसी ने भी क्षेत्र में ज्वाइन नहीं किया है। ऐसे में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आदर्श स्वास्थ्य संस्थान घोषित किए गए सिविल अस्पताल घवांडल में स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में हड्डी रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, सर्जन, एनेस्थीसिया और मेडिसिन चिकित्सक के नियुक्ति के आदेश किए हैं। महिला रोग विशेषज्ञ ने ज्वाइन कर लिया है। यह अस्पताल जनवरी तक प्रतिनियुक्ति के चिकित्सक के सहारे चल रहा था। इसके बाद यहां एमओ मेडिसिन की नियुक्ति हुई। अब महिला रोग विशेषज्ञ के ज्वाइन करने से लोगों को और राहत मिली है, लेकिन अस्पताल अभी भी अन्य सात विशेषज्ञों की राह ताक रहा है। घवांडल अस्पताल पर शक्तिपीठ श्री नयनादेवी जी में आने वाले श्रद्धालुओं सहित क्षेत्र की करीब 10 हजार की आबादी निर्भर है। स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में गंभीर स्थिति में श्रद्धालु या किसी अन्य मरीज को पंजाब के अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। सीएमओ बिलासपुर डॉक्टर शशि दत्त शर्मा ने कहा कि जिन चिकित्सकों की नियुक्ति हुई है वो जल्द ज्वाइन करेंगे। इसके अलावा जो पद खाली चले हैं उन्हें भरने के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। संवाद
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सीएचसी स्वारघाट में एकमात्र डेंटल, पीएचसी टोबा, भाखड़ा, तरसूह में नहीं कोई चिकित्सक
तरूणेश शर्मा
श्री नयनादेवी जी (बिलासपुर)। समाज के अंतिम व्यक्ति तक सभी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने का दावा करने वाली प्रदेश सरकार के सभी वादे श्री नयनादेवी जी विधानसभा क्षेत्र में खोखले नजर आ रहे हैं। करीब सवा लाख की आबादी वाले विधानसभा क्षेत्र में मात्र एक अस्पताल में तीन चिकित्सक ही हैं। इसके अलावा सीएचसी स्वारघाट एक डेंटल के सहारे चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि क्षेत्र की सभी पीएचसी पर डॉक्टरों के अभाव में ताले लटके हैं।
चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे शक्तिपीठ श्री नयनादेवी जी के सिविल अस्पताल घवांडल को प्रदेश सरकार ने गत वर्ष आदर्श अस्पताल बनाया था। इसके बाद यहां पर चिकित्सकों के 10 पद सृजित किए गए थे। लेकिन वर्तमान में यहां मात्र तीन ही चिकित्सक तैनात हैं। इनमें गायनी, मेडिसिन और जनरल एमबीबीएस शामिल हैं। हाल ही में प्रदेश सरकार ने घवांडल अस्पताल को छह डॉक्टर दिए थे, लेकिन अभी तक उनमें से मात्र गायनी विशेषज्ञ ने ही ज्वाइन किया है। वहीं अभी भी अस्पताल में सात पद खाली चले हैं। इसके अलावा सीएचसी स्वारघाट में एकमात्र डेंटल विशेषज्ञ तैनात हैं। वहीं, पीएचसी टोबा, भाखड़ा, तरसूह सहित अन्य प्राथमिक केंद्रों में कोई चिकित्सक नहीं है। यहां के लोगों को अगर प्राथमिक उपचार की भी जरूरत हो तो भी उन्हें करीब 15 किलोमीटर तक का सफर करना पड़ता है। तब जाकर घवांडल अस्पताल में सेवाएं मिलती हैं। सरकार क्षेत्र की कई पीएचसी में डॉक्टर तैनात कर चुकी है, लेकिन उनमें से किसी ने भी क्षेत्र में ज्वाइन नहीं किया है। ऐसे में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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आदर्श स्वास्थ्य संस्थान घोषित किए गए सिविल अस्पताल घवांडल में स्वास्थ्य विभाग ने हाल ही में हड्डी रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, सर्जन, एनेस्थीसिया और मेडिसिन चिकित्सक के नियुक्ति के आदेश किए हैं। महिला रोग विशेषज्ञ ने ज्वाइन कर लिया है। यह अस्पताल जनवरी तक प्रतिनियुक्ति के चिकित्सक के सहारे चल रहा था। इसके बाद यहां एमओ मेडिसिन की नियुक्ति हुई। अब महिला रोग विशेषज्ञ के ज्वाइन करने से लोगों को और राहत मिली है, लेकिन अस्पताल अभी भी अन्य सात विशेषज्ञों की राह ताक रहा है। घवांडल अस्पताल पर शक्तिपीठ श्री नयनादेवी जी में आने वाले श्रद्धालुओं सहित क्षेत्र की करीब 10 हजार की आबादी निर्भर है। स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में गंभीर स्थिति में श्रद्धालु या किसी अन्य मरीज को पंजाब के अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। सीएमओ बिलासपुर डॉक्टर शशि दत्त शर्मा ने कहा कि जिन चिकित्सकों की नियुक्ति हुई है वो जल्द ज्वाइन करेंगे। इसके अलावा जो पद खाली चले हैं उन्हें भरने के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। संवाद
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