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Bilaspur News: चिट्टे के मामले में दोषी को दो साल का कठोर कारावास
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घुमारवीं कोर्ट 20 हजार रुपये का लगाया जुर्माना, नहीं देने पर तीन माह का भुगतना होगा अतिरिक्त कारावास
लद्दा पुल पर कार के फ्रेशनर डिब्बे में मिला था 16.16 ग्राम चिट्टा
मुकदमे की सुनवाई के दौरान सहआरोपी की मौत, उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। दधोल रोड पर लद्दा पुल के पास कार में छिपाकर रखे 16.16 ग्राम चिट्टे के मामले में घुमारवीं की विशेष अदालत ने नारेंद्र कुमार को दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर तीन माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। अदालत ने मादक पदार्थ अपने कब्जे में रखने का आरोप साबित माना, जबकि उसके और सहआरोपी के बीच तस्करी की साजिश का आरोप साबित नहीं हो सका। विशेष न्यायाधीश डॉ. मोहित बंसल ने यह फैसला सुनाया। मामला 31 अक्तूबर 2025 की रात का है।
भराड़ी थाना पुलिस की टीम दधोल रोड पर लद्दा पुल से लेहड़ी सरेल की तरफ गश्त कर रही थी। रात करीब 11:25 बजे पुलिस ने कार को रोक लिया। कार में अरुण कुमार और नारेंद्र कुमार सवार थे। पुलिस ने कार की तलाशी ली तो गियर कसोल के पास पीले-काले रंग का विस्टा ऑरा कार फ्रेशनर का डिब्बा मिला। डिब्बे के अंदर पारदर्शी पैकेट में चिट्टा रखा हुआ था। पुलिस के अनुसार बरामद पदार्थ का मौके पर वजन 16.19 ग्राम था। बाद की प्रक्रिया में इसका वजन 16.16 ग्राम दर्ज किया गया। बरामद पदार्थ को राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला जुन्गा भेजा गया। वहां जांच में पदार्थ में डायएसिटाइलमॉर्फिन यानी हेरोइन होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ मादक पदार्थ रखने और उसकी तस्करी से जुड़ी साजिश के आरोप में मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में 15 गवाह पेश किए। पुलिस अधिकारियों और अन्य गवाहों के बयान के साथ बरामदगी से जुड़े दस्तावेज और प्रयोगशाला की रिपोर्ट भी रिकॉर्ड पर रखी गई। बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र गवाह, बरामदगी की फोटो, जांच अधिकारी की भूमिका, सील और बरामद पदार्थ की प्रक्रिया को लेकर विरोधाभास बताए। बचाव पक्ष की ओर से यह भी सवाल उठाया गया कि बरामदगी और उसके बाद की कार्रवाई में आवश्यक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं हुआ। अदालत ने गवाहों के बयानों और दस्तावेजी साक्ष्यों को एक साथ परखा। अदालत ने बचाव पक्ष की आपत्तियों के बावजूद माना कि बरामद पदार्थ की पहचान और उसकी सुरक्षित जांच की प्रक्रिया अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त रूप से साबित की है। एफएसएल रिपोर्ट में भी बरामद पदार्थ के हेरोइन होने की पुष्टि हुई।
अदालत के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों से नारेंद्र कुमार का मादक पदार्थ पर सचेत और विशेष कब्जा साबित हुआ। अदालत ने हालांकि दोनों आरोपियों के बीच तस्करी की साजिश के आरोप को अलग आधार पर देखा। उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं हुआ कि नारेंद्र कुमार और अरुण कुमार ने मिलकर मादक पदार्थ की तस्करी की योजना बनाई थी। केवल एक ही कार में दोनों के मौजूद होने को साजिश साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया। इसलिए नारेंद्र कुमार को तस्करी की साजिश के आरोप से बरी कर दिया गया। सहआरोपी अरुण कुमार की मुकदमे की सुनवाई पूरी होने से पहले मौत हो गई। मौत के बाद अदालत ने 11 सितंबर 2026 को उसके खिलाफ चल रही कार्यवाही समाप्त कर दी। इसलिए उसके खिलाफ आरोपों पर अदालत ने कोई दोषसिद्धि नहीं की। नारेंद्र कुमार के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों पर सुनवाई जारी रही और अदालत ने उसे मादक पदार्थ रखने के आरोप में दोषी ठहराया। अदालत ने नारेंद्र कुमार को दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया। अदालत ने आरोपी को पहले से हिरासत में बिताई अवधि का लाभ देने के निर्देश दिए हैं।
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लद्दा पुल पर कार के फ्रेशनर डिब्बे में मिला था 16.16 ग्राम चिट्टा
मुकदमे की सुनवाई के दौरान सहआरोपी की मौत, उसके खिलाफ कार्यवाही समाप्त
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। दधोल रोड पर लद्दा पुल के पास कार में छिपाकर रखे 16.16 ग्राम चिट्टे के मामले में घुमारवीं की विशेष अदालत ने नारेंद्र कुमार को दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर तीन माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। अदालत ने मादक पदार्थ अपने कब्जे में रखने का आरोप साबित माना, जबकि उसके और सहआरोपी के बीच तस्करी की साजिश का आरोप साबित नहीं हो सका। विशेष न्यायाधीश डॉ. मोहित बंसल ने यह फैसला सुनाया। मामला 31 अक्तूबर 2025 की रात का है।
भराड़ी थाना पुलिस की टीम दधोल रोड पर लद्दा पुल से लेहड़ी सरेल की तरफ गश्त कर रही थी। रात करीब 11:25 बजे पुलिस ने कार को रोक लिया। कार में अरुण कुमार और नारेंद्र कुमार सवार थे। पुलिस ने कार की तलाशी ली तो गियर कसोल के पास पीले-काले रंग का विस्टा ऑरा कार फ्रेशनर का डिब्बा मिला। डिब्बे के अंदर पारदर्शी पैकेट में चिट्टा रखा हुआ था। पुलिस के अनुसार बरामद पदार्थ का मौके पर वजन 16.19 ग्राम था। बाद की प्रक्रिया में इसका वजन 16.16 ग्राम दर्ज किया गया। बरामद पदार्थ को राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला जुन्गा भेजा गया। वहां जांच में पदार्थ में डायएसिटाइलमॉर्फिन यानी हेरोइन होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ मादक पदार्थ रखने और उसकी तस्करी से जुड़ी साजिश के आरोप में मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत में 15 गवाह पेश किए। पुलिस अधिकारियों और अन्य गवाहों के बयान के साथ बरामदगी से जुड़े दस्तावेज और प्रयोगशाला की रिपोर्ट भी रिकॉर्ड पर रखी गई। बचाव पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र गवाह, बरामदगी की फोटो, जांच अधिकारी की भूमिका, सील और बरामद पदार्थ की प्रक्रिया को लेकर विरोधाभास बताए। बचाव पक्ष की ओर से यह भी सवाल उठाया गया कि बरामदगी और उसके बाद की कार्रवाई में आवश्यक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं हुआ। अदालत ने गवाहों के बयानों और दस्तावेजी साक्ष्यों को एक साथ परखा। अदालत ने बचाव पक्ष की आपत्तियों के बावजूद माना कि बरामद पदार्थ की पहचान और उसकी सुरक्षित जांच की प्रक्रिया अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त रूप से साबित की है। एफएसएल रिपोर्ट में भी बरामद पदार्थ के हेरोइन होने की पुष्टि हुई।
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अदालत के अनुसार उपलब्ध साक्ष्यों से नारेंद्र कुमार का मादक पदार्थ पर सचेत और विशेष कब्जा साबित हुआ। अदालत ने हालांकि दोनों आरोपियों के बीच तस्करी की साजिश के आरोप को अलग आधार पर देखा। उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं हुआ कि नारेंद्र कुमार और अरुण कुमार ने मिलकर मादक पदार्थ की तस्करी की योजना बनाई थी। केवल एक ही कार में दोनों के मौजूद होने को साजिश साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया। इसलिए नारेंद्र कुमार को तस्करी की साजिश के आरोप से बरी कर दिया गया। सहआरोपी अरुण कुमार की मुकदमे की सुनवाई पूरी होने से पहले मौत हो गई। मौत के बाद अदालत ने 11 सितंबर 2026 को उसके खिलाफ चल रही कार्यवाही समाप्त कर दी। इसलिए उसके खिलाफ आरोपों पर अदालत ने कोई दोषसिद्धि नहीं की। नारेंद्र कुमार के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों पर सुनवाई जारी रही और अदालत ने उसे मादक पदार्थ रखने के आरोप में दोषी ठहराया। अदालत ने नारेंद्र कुमार को दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और 20 हजार रुपये जुर्माना लगाया। अदालत ने आरोपी को पहले से हिरासत में बिताई अवधि का लाभ देने के निर्देश दिए हैं।
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