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सरकारी कर्मचारी सालों से डकार रहे है गरीब परिवारों का राशन
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घुमारवीं(बिलासपुर)। विकासखंड घुमारवीं की ग्राम पंचायत हंबोट में चार सरकारी कर्मचारी लंबे अरसे से राजीव गांधी योजना के तहत गरीबों को मिलने वाला सस्ता राशन हासिल करने का मामला प्रकाश में आया है। स्थानील लोगों ने इसकी शिकायत सीएम हेल्पलाइन नंबर पर दर्ज कराई है। साथ ही संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है। इस पूरे मामले से संबंधित विभाग की कार्य प्रणाली संदेह के घेरे में है।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत गरीब परिवारों के लिए अप्रैल 2013 में राजीव गांधी अन्न योजना शुरू की गई। इसमें गरीब परिवारों को पंचायतों द्वारा शामिल किया जाना था। इस योजना के तहत घुमारवीं हंबोट पंचायत से संबंधित शिक्षा विभाग में सेवारत दो तथा आईपीएच विभाग में सेवारत दो कर्मचारी स्थानीय डिपो से सस्ता राशन हासिल कर रहे थे। इसका खुलासा उस समय हुआ जब करोना महामारी के कारण सरकार ने गरीब परिवारों को दो महीने का एक साथ फ्री राशन देने के आदेश दिए।
हंबोट डिपो से जब ग्रामीणों ने चार सरकारी कर्मचारियों को राशन के भरे थैले को ले जाते हुए देखा तो वह दंग रह गए। राजीव गांधी योजना के तहत गरीब परिवारों को प्रति व्यक्ति पांच किलो राशन, दो रुपये गेंहू, तीन रुपये किलो चावल तथा 13 रुपये किलो चीनी मिलती है। हालांकि इस योजना से वंचित एक ग्रामीण ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1100 पर कर दी है।
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इस पर जिलाधीश बिलासपुर ने स्थानीय पंचायत प्रधान को तुरंत प्रभाव से इन लोगों के नाम काटने के आदेश दिए है। हंबोट पंचायत प्रधान ने मंगलवार को निरीक्षक खाद्य आपूर्ति नियंत्रक घुमारवीं तथा प्रधान सहकारी सभा समिति हंबोट को पत्र लिखकर चारों सरकारी कर्मचारियों के नाम राजीव गांधी अन्न योजना से काट कर एपीएल का राशन देने को कहा है।
उधर, पंचायत प्रधान हंबोट नरेश कुमारी धीमान ने बताया कि जिलाधीश कार्यालय के आदेशानुसार पंचायत ने जांच करने के बाद चार लोगों के नाम राजीव गांधी अन्न योजना से काट दिए गए हैं तथा इसकी सूचना संबंधित विभाग को दे दी गई है।
पंचायत प्रधान ने कहा कि यह नाम पूर्व पंचायत द्वारा 2013 में डाले गए हैं जोकि नियमानुसार सही नहीं है।
उधर, खाद्य आपूर्ति विभाग के निरीक्षक घुमारवीं विनोद कुमार का कहना है कि यह मामला पंचायत और खंड विकास अधिकारी कार्यालय का है। अगर सरकारी कर्मचारी राजीव गांधी अन्न योजना के तहत सस्ता राशन ले रहे थे तो यह गलत है उनकी जानकारी हंबोट डिपू के सेल्जमेन से ली जा रही है।
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उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत गरीब परिवारों के लिए अप्रैल 2013 में राजीव गांधी अन्न योजना शुरू की गई। इसमें गरीब परिवारों को पंचायतों द्वारा शामिल किया जाना था। इस योजना के तहत घुमारवीं हंबोट पंचायत से संबंधित शिक्षा विभाग में सेवारत दो तथा आईपीएच विभाग में सेवारत दो कर्मचारी स्थानीय डिपो से सस्ता राशन हासिल कर रहे थे। इसका खुलासा उस समय हुआ जब करोना महामारी के कारण सरकार ने गरीब परिवारों को दो महीने का एक साथ फ्री राशन देने के आदेश दिए।
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हंबोट डिपो से जब ग्रामीणों ने चार सरकारी कर्मचारियों को राशन के भरे थैले को ले जाते हुए देखा तो वह दंग रह गए। राजीव गांधी योजना के तहत गरीब परिवारों को प्रति व्यक्ति पांच किलो राशन, दो रुपये गेंहू, तीन रुपये किलो चावल तथा 13 रुपये किलो चीनी मिलती है। हालांकि इस योजना से वंचित एक ग्रामीण ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1100 पर कर दी है।
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इस पर जिलाधीश बिलासपुर ने स्थानीय पंचायत प्रधान को तुरंत प्रभाव से इन लोगों के नाम काटने के आदेश दिए है। हंबोट पंचायत प्रधान ने मंगलवार को निरीक्षक खाद्य आपूर्ति नियंत्रक घुमारवीं तथा प्रधान सहकारी सभा समिति हंबोट को पत्र लिखकर चारों सरकारी कर्मचारियों के नाम राजीव गांधी अन्न योजना से काट कर एपीएल का राशन देने को कहा है।
उधर, पंचायत प्रधान हंबोट नरेश कुमारी धीमान ने बताया कि जिलाधीश कार्यालय के आदेशानुसार पंचायत ने जांच करने के बाद चार लोगों के नाम राजीव गांधी अन्न योजना से काट दिए गए हैं तथा इसकी सूचना संबंधित विभाग को दे दी गई है।
पंचायत प्रधान ने कहा कि यह नाम पूर्व पंचायत द्वारा 2013 में डाले गए हैं जोकि नियमानुसार सही नहीं है।
उधर, खाद्य आपूर्ति विभाग के निरीक्षक घुमारवीं विनोद कुमार का कहना है कि यह मामला पंचायत और खंड विकास अधिकारी कार्यालय का है। अगर सरकारी कर्मचारी राजीव गांधी अन्न योजना के तहत सस्ता राशन ले रहे थे तो यह गलत है उनकी जानकारी हंबोट डिपू के सेल्जमेन से ली जा रही है।