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अत्याचारों से मुक्ति, समाज में सम्मान दिलाने के लिए भगवान लेते हैं अवतार : पं. उपेंद्र

Mon, 29 Jun 2026 11:02 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Mon, 29 Jun 2026 11:02 PM IST
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God incarnates to liberate people from oppression and restore their dignity in society: Pt. Upendra
घुमारवीं के सनौर गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के समापन अवसर पर उपस्थित श्रद्धालु। स्रोत: ज
कथा में श्रद्धालुओं को सुनाया नरकासुर वध का प्रसंग
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सनौर गांव में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा हुई संपन्न

संवाद न्यूज एजेंसी

बिलासपुर। उपमंडल घुमारवीं के सनौर गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा सोमवार को संपन्न हो गई। कथा व्यास पंडित उपेंद्र शर्मा ने बताया कि इस धरती पर जब-जब भी भगवान ने अवतार लिया है, तो उसका उद्देश्य केवल किसी अत्याचारी द्वारा किए जा रहे पापों और उसके अत्याचारों से मानवता को मुक्त कराना रहा है।

इस दौरान पंडित ने नरकासुर (भौमासुर) वध का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि नरकासुर नामक एक क्रूर राक्षस ने 16,100 राजकुमारियों और महिलाओं को बंदी बना लिया था। भगवान श्री कृष्ण ने सभी को क्रूर राक्षस के चंगुल से मुक्त करवाने के लिए अपनी पत्नी सत्यभामा की सहायता ली और राक्षस का वध कर दिया। कथा व्यास ने बताया कि राक्षस के वध के बाद भगवान के सामने एक नई और गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई। मुक्त करवाई गई महिलाओं ने श्री कृष्ण से रोते हुए कहा कि वह आजाद तो हो गई है, लेकिन यह समाज अब उन्हें सम्मान के साथ जीने नहीं देगा। समाज में तिरस्कार के डर से उनके पास आत्महत्या करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। जब इस सामाजिक समस्या से उन्हें निकालने का कोई मार्ग नहीं दिखा, तो भगवान श्री कृष्ण ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उन सभी 16,100 महिलाओं से विवाह कर लिया और उन्हें समाज में अपना नाम देकर सुरक्षित व सम्मानित जीवन प्रदान किया। पंडित ने बताया कि इन 16,100 पत्नियों के अलावा भगवान श्री कृष्ण की आठ मुख्य रानियां (अष्ट भार्या) भी थीं, जिसमें माता रुक्मणी, सत्यभामा, जामवंती, कालिंदी, मित्रविंदा, नग्नजिति (सत्या), भद्रा और लक्ष्मणा शामिल थीं। इस प्रकार कुल मिलाकर भगवान श्री कृष्ण की 16,108 पत्नियां थीं। कथा के अंतिम दिन पंडित जी ने पूरे विधि-विधान के साथ हवन यज्ञ का आयोजन किया। उन्होंने कथा श्रवण करने आए सभी श्रद्धालुओं का बड़ी निष्ठा और श्रद्धा के साथ आभार व धन्यवाद प्रकट किया।
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