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Bilaspur News: 92.13 लाख दो, वरना बंद कर देंगे चंगर उठाऊ सिंचाई योजना
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श्री नयनादेवी जी(बिलासपुर)। पंजाब सरकार को 92.13 लाख रुपये का भुगतान नहीं होने से उपमंडल श्री नयनादेवी जी की चंगर क्षेत्र मध्यम उठाऊ सिंचाई योजना बंद होने की कगार पर पहुंच गई है।
हिमाचल सरकार ने इस योजना में कार्यरत पंजाब सरकार के चार कर्मचारियों का मानदेय मार्च 2020 के बाद जारी नहीं किया है, जो कुल 92.13 लाख रुपये बन चुका है। अब पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने इस योजना को बंद करने की चेतावनी दे दी है। कॉरपोरेशन लिमिटेड ने जल शक्ति विभाग डिवीजन बिलासपुर के अधिशासी अभियंता को पत्र लिखकर 30 सितंबर तक राशि का भुगतान करने की डेडलाइन दी है। इस परियोजना से उपमंडल श्री नयनादेवी जी की 9 पंचायतों की 2350 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। साथ ही शक्तिपीठ श्री नयनादेवी जी पेयजल योजना भी इसी सिंचाई योजना पर निर्भर है। यदि यह सिंचाई योजना बंद होती है तो हजारों लोग इससे प्रभावित होंगे। चगर क्षेत्र में की जाने वाली खेती बाड़ी इसी परियोजना पर आश्रित है, जबकि श्री नयना देवी नगर और आसपास की करीब पांच पंचायतों में पेयजल संकट पैदा हो सकता है।
बता दें कि साल 1984 में पंजाब में एसवाईएल कनाल का कार्य शुरू हुआ था। तब श्री नयनादेवी के तत्कालीन विधायक दौलत राम सांख्यान शर्त रखी थी कि यदि पंजाब सरकार को इस कनाल के लिए हिमाचल की जमीन चाहिए तो बदले में हिमाचल को इस कनाल में से पानी देना होगा। बाद में श्री नयनादेवी जी के चंगर क्षेत्र के लोगों के लिए 25 क्यूसेक पानी देने का पंजाब सरकार के साथ समझौता हुआ। समझौते में यह शर्त भी रखी गई कि नहर से उठाए जाने वाले पानी की मात्रा पर नजर बनाए रखने के लिए और इस परियोजना के संचालन के लिए चार कर्मचारी पंजाब सरकार के भी नियुक्त रहेंगे। उन कर्मचारियों का मानदेय भी हिमाचल सरकार करेगी। समझौता होने के बाद 27 जून 1999 को तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने चंगर क्षेत्र उठाऊ सिंचाई परियोजना का शिलान्यास किया। तब इसके निर्माण पर 29 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे, लेकिन निर्माण पूरा होने तक इसकी लागत 88.9 करोड़ रुपये जा पहुंची। 27 मार्च 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने ही इसका उद्घाटन भी किया। संवाद
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कोट
पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड आनंदपुर साहिब के अधिशासी अभियंता इंद्र अवतार सिंह ने बताया कि इस संदर्भ में हिमाचल जल शक्ति विभाग के बिलासपुर डिवीजन के अधिशासी अभियंता को कई बार पत्र लिखे गए हैं, लेकिन उन पत्रों का कोई जवाब नहीं मिला है। अब पंजाब सरकार मूल राशि ब्याज सहित लेने पर विचार कर रही है। भुगतान के लिए 30 सितंबर की डेडलाइन दी गई है। इसके बाद यह स्कीम बंद कर दी जाएगी।
कोट
जल शक्ति विभाग हिमाचल के चीफ इंजीनियर विजय डटवलिया ने बताया कि इसके बारे में स्थानीय अधिकारियों को अवगत करा दिया है। जल्द ही इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा। जनता के हित में इस परियोजना को बंद करना उचित नहीं है।
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हिमाचल सरकार ने इस योजना में कार्यरत पंजाब सरकार के चार कर्मचारियों का मानदेय मार्च 2020 के बाद जारी नहीं किया है, जो कुल 92.13 लाख रुपये बन चुका है। अब पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने इस योजना को बंद करने की चेतावनी दे दी है। कॉरपोरेशन लिमिटेड ने जल शक्ति विभाग डिवीजन बिलासपुर के अधिशासी अभियंता को पत्र लिखकर 30 सितंबर तक राशि का भुगतान करने की डेडलाइन दी है। इस परियोजना से उपमंडल श्री नयनादेवी जी की 9 पंचायतों की 2350 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। साथ ही शक्तिपीठ श्री नयनादेवी जी पेयजल योजना भी इसी सिंचाई योजना पर निर्भर है। यदि यह सिंचाई योजना बंद होती है तो हजारों लोग इससे प्रभावित होंगे। चगर क्षेत्र में की जाने वाली खेती बाड़ी इसी परियोजना पर आश्रित है, जबकि श्री नयना देवी नगर और आसपास की करीब पांच पंचायतों में पेयजल संकट पैदा हो सकता है।
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बता दें कि साल 1984 में पंजाब में एसवाईएल कनाल का कार्य शुरू हुआ था। तब श्री नयनादेवी के तत्कालीन विधायक दौलत राम सांख्यान शर्त रखी थी कि यदि पंजाब सरकार को इस कनाल के लिए हिमाचल की जमीन चाहिए तो बदले में हिमाचल को इस कनाल में से पानी देना होगा। बाद में श्री नयनादेवी जी के चंगर क्षेत्र के लोगों के लिए 25 क्यूसेक पानी देने का पंजाब सरकार के साथ समझौता हुआ। समझौते में यह शर्त भी रखी गई कि नहर से उठाए जाने वाले पानी की मात्रा पर नजर बनाए रखने के लिए और इस परियोजना के संचालन के लिए चार कर्मचारी पंजाब सरकार के भी नियुक्त रहेंगे। उन कर्मचारियों का मानदेय भी हिमाचल सरकार करेगी। समझौता होने के बाद 27 जून 1999 को तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने चंगर क्षेत्र उठाऊ सिंचाई परियोजना का शिलान्यास किया। तब इसके निर्माण पर 29 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे, लेकिन निर्माण पूरा होने तक इसकी लागत 88.9 करोड़ रुपये जा पहुंची। 27 मार्च 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने ही इसका उद्घाटन भी किया। संवाद
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पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड आनंदपुर साहिब के अधिशासी अभियंता इंद्र अवतार सिंह ने बताया कि इस संदर्भ में हिमाचल जल शक्ति विभाग के बिलासपुर डिवीजन के अधिशासी अभियंता को कई बार पत्र लिखे गए हैं, लेकिन उन पत्रों का कोई जवाब नहीं मिला है। अब पंजाब सरकार मूल राशि ब्याज सहित लेने पर विचार कर रही है। भुगतान के लिए 30 सितंबर की डेडलाइन दी गई है। इसके बाद यह स्कीम बंद कर दी जाएगी।
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जल शक्ति विभाग हिमाचल के चीफ इंजीनियर विजय डटवलिया ने बताया कि इसके बारे में स्थानीय अधिकारियों को अवगत करा दिया है। जल्द ही इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा। जनता के हित में इस परियोजना को बंद करना उचित नहीं है।