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हौसले की उड़ान : मन की आंखों से कर ली कानून की पढ़ाई

Fri, 06 Feb 2026 10:23 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर Updated Fri, 06 Feb 2026 10:23 PM IST
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Flight of courage: Studying law in the eyes of the mind
अधिवक्ता लग्नेश कुमार
हिमाचल के पहले नेत्रहीन वकील बने लग्नेश, घुमारवीं कोर्ट में कर रहे प्रैक्टिस
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बार काउंसिल ऑफ हिमाचल प्रदेश ने अपने नियमों में किया बदलाव
सामान्य से दिखने वाले आंखों के संक्रमण ने 2009 में छीन ली थी आंखें

संवाद न्यूज एजेंसी

घुमारवीं (बिलासपुर)। मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है घुमारवीं उपमंडल के बरोटा गांव के लग्नेश कुमार ने। तमाम विपरीत परिस्थितियों और शारीरिक चुनौती को मात देकर कानून की पढ़ाई कर लग्नेश हिमाचल प्रदेश के पहले नेत्रहीन अधिवक्ता बने हैं। आज वे घुमारवीं सिविल कोर्ट में न केवल वकालत कर रहे हैं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा बनकर भी उभरे हैं।

लग्नेश के जीवन में साल 2009 एक काल बनकर आया। एक सामान्य से दिखने वाले आंखों के संक्रमण ने धीरे-धीरे उनकी दुनिया में अंधेरा भर दिया। शिमला से लेकर बड़े अस्पतालों तक इलाज करवाया गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 33 वर्षीय लग्नेश ने अपनी आंखों की रोशनी पूरी तरह खो दी। पिता के निधन के बाद घर की आर्थिक स्थिति भी डांवाडोल थी। माता आंगनबाड़ी में हेल्पर के रूप में काम कर घर का गुजारा कर रही थीं, लेकिन उन्होंने अपने बेटे के सपनों को कभी टूटने नहीं दिया। लग्नेश ने 2016 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की, इसके बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई का मन बनाया। संसाधनों की कमी के बीच केके फाउंडेशन ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और आर्थिक मदद की। इसी सहयोग से लग्नेश ने देश के प्रतिष्ठित संस्थान दिल्ली विश्वविद्यालय (कैंपस लॉ सेंटर) से 2020 में एलएलबी की डिग्री हासिल की।
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लग्नेश के संघर्ष का ही असर था कि बार काउंसिल ऑफ हिमाचल प्रदेश को अपने नियमों में बदलाव करना पड़ा। जब वे पंजीकरण के लिए पहुंचे, तो आर्थिक तंगी के कारण शुल्क देना मुश्किल था। उनकी स्थिति और लगन को देखते हुए बार काउंसिल ने न केवल उनका पंजीकरण किया, बल्कि भविष्य के लिए यह नीति बनाई कि किसी भी दिव्यांग अधिवक्ता से पंजीकरण शुल्क नहीं लिया जाएगा। अब लग्नेश खुद आत्मनिर्भर होकर दूसरों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने 'सामर्थ्य-हमारी पहचान' नाम से एक संस्था शुरू की है। इसके माध्यम से वे जरूरतमंद दिव्यांगजनों को निशुल्क कानूनी सहायता प्रदान कर रहे हैं। लग्नेश का कहना है कि वे चाहते हैं कि समाज का कोई भी दिव्यांग व्यक्ति कानूनी अधिकारों से वंचित न रहे।
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