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बिलासपुर रामलीला: शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाते ही चले पटाखे
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डियारा में चल रही रामलीला के एक दृश्य के दौरान कलाकार।
- फोटो : BILASPUR
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बिलासपुर। नगर परिषद प्रांगण में चल रही श्रीराम लीला मंचन के तीसरे दिन सीता स्वयंवर का दृश्य आकर्षण का केंद्र रहा। भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने के दृश्य से माहौल भक्तिमय हो गया। धनुष टूटने से मंचन स्थल के पास पटाखे चलाकर खुशियां मनाई गईं। इसके अलावा श्रीराम वन गमन आज्ञा दृश्य में मंथरा का अभिनय कर रहे युवा कलाकार अंशुल कुमार ने अपनी अदाकारी का ऐसा जादू बिखेरा कि दर्शक एक टक इस कलाकार को देखते रहे। पहले दृश्य में जनक नंदिनी माता सीता के स्वयंवर को लेकर मंच को शानदार तरीके से सजाया था। इस पर सुनील पंवर और मनोज गागट के लाइट इफेक्ट तथा ध्वनि संचालन कर रहे विशाल और निशांत की टाइमिंग अद्वितीय रही। सीता स्वयंवर में जनक का अभिनय कर रहे वरिष्ठ कलाकार सुशील पुंडीर ने बेटी के विवाह में हो रहे विलंब की व्याकुलता को शिद्दत से प्रस्तुत किया।
भगवान राम द्वारा शिव धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते हैं ही शिव धनुष टूट जाता हैं। इस दृश्य में देवी देवताओं द्वारा की गई पुष्पवर्षा और मंच के बाहर कार्यकर्ताओं द्वारा की गई भव्य आतिशबाजी ने माहौल को रोमांचक बना दिया। अगले दृश्य में कैकेयी को मंथरा भड़काती है कि इस राज सिंहासन पर भरत का भी अधिकार था लेकिन राजनीति के तहत ऐसा न हो सका। कैकेयी मंथरा की बातों से भ्रमित हो जाती है और महाराज दशरथ से अपने दो वचनों की पूर्ति में एक से भगवान राम को चौदह वर्ष का वनवास और दूसरे वचन में भरत को अयोध्या का राजपाठ मांगती है।
पीड़ादायक इन वचनों की पूर्ति में महाराज दशरथ कैकेयी को भला बुरा कहते हैं और मृत्यु को प्राप्त होते हैं। इस बात का पता जब ननिहाल गए भरत और शत्रुघ्न को लगता है तो वह अपनी माता कैकेयी से काफी झगड़ा करते हैं। भ्राता श्रीराम के पास जाने के लिए निकल पड़ते हैं। रामलीला में सुशील पुंडीर ने जनक, अमित ने सीता, राजेंद्र चंदेल विश्वामित्र, शेर बहादुर, नवीन सोनी राम, रिशु शर्मा लक्ष्मण, ब्रजेश कौशल रावण, सुखदेव परशुराम, दशरथ गोपाल हंस, कैकेयी शुभम, मंथरा अंशुल कुमार, अमन त्रिवेदी कौशल्या, पारस भरत, शत्रुघ्न धीरज शर्मा, रमन गागट, मनीष कौंडल, आशीष कंडेरा, बबलू, ईमरान और आकिब हुसैन ने अभिनय किया।
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भगवान राम द्वारा शिव धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते हैं ही शिव धनुष टूट जाता हैं। इस दृश्य में देवी देवताओं द्वारा की गई पुष्पवर्षा और मंच के बाहर कार्यकर्ताओं द्वारा की गई भव्य आतिशबाजी ने माहौल को रोमांचक बना दिया। अगले दृश्य में कैकेयी को मंथरा भड़काती है कि इस राज सिंहासन पर भरत का भी अधिकार था लेकिन राजनीति के तहत ऐसा न हो सका। कैकेयी मंथरा की बातों से भ्रमित हो जाती है और महाराज दशरथ से अपने दो वचनों की पूर्ति में एक से भगवान राम को चौदह वर्ष का वनवास और दूसरे वचन में भरत को अयोध्या का राजपाठ मांगती है।
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पीड़ादायक इन वचनों की पूर्ति में महाराज दशरथ कैकेयी को भला बुरा कहते हैं और मृत्यु को प्राप्त होते हैं। इस बात का पता जब ननिहाल गए भरत और शत्रुघ्न को लगता है तो वह अपनी माता कैकेयी से काफी झगड़ा करते हैं। भ्राता श्रीराम के पास जाने के लिए निकल पड़ते हैं। रामलीला में सुशील पुंडीर ने जनक, अमित ने सीता, राजेंद्र चंदेल विश्वामित्र, शेर बहादुर, नवीन सोनी राम, रिशु शर्मा लक्ष्मण, ब्रजेश कौशल रावण, सुखदेव परशुराम, दशरथ गोपाल हंस, कैकेयी शुभम, मंथरा अंशुल कुमार, अमन त्रिवेदी कौशल्या, पारस भरत, शत्रुघ्न धीरज शर्मा, रमन गागट, मनीष कौंडल, आशीष कंडेरा, बबलू, ईमरान और आकिब हुसैन ने अभिनय किया।
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