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Bilaspur News: ईद-उल-अजहा आज, कुर्बानी के जज्बे से मनाया जाएगा त्योहार
Fri, 06 Jun 2025 11:27 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 06 Jun 2025 11:27 PM IST
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मुस्लिम समुदाय के मेलजोल और भाईचारे का है प्रतीक
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। मुस्लिम समुदाय का त्योहार ईद-उल-अजहा (बकरीद) शनिवार को कुर्बानी के जज़्बे के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर जिले की मस्जिदों में मौलानाओं के नेतृत्व में सामूहिक नमाज अता की जाएगी।
जिला मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के प्रधान नसीम मोहम्मद ने बताया कि ईद-उल-अजहा हजरत इब्राहिम की उस ऐतिहासिक कुर्बानी की याद में मनाया जाता है, जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे इस्माइल को कुर्बान करने का संकल्प लिया था। लेकिन खुदा की रहमत से अंतिम क्षण में बेटे की जगह एक दुम्बा (मेंढ़ा) कुर्बान हुआ और इस्माइल सुरक्षित बच गए।
नसीम मोहम्मद ने बताया कि इसी स्मृति में मुस्लिम समुदाय के लोग बड़े जानवरों की कुर्बानी करते हैं। यह पर्व मेल-मिलाप और भाईचारे का संदेश देता है। जिले भर में तीन दिनों तक समुदाय के लोग अपने मोहल्लों में बारी-बारी से कुर्बानी करेंगे और रिश्तेदारों व दोस्तों को दावत दी जाएगी। बताया कि कुर्बानी को धार्मिक रूप से मुकम्मल तभी माना जाता है जब उसे चार हिस्सों में बांटा जाए। एक हिस्सा गरीबों के लिए, एक रिश्तेदारों के लिए, एक दोस्तों और समाज के लिए तथा एक अपने लिए। कुर्बानी जितनी अधिक दूर-दराज इलाकों में पहुंचाई जाती है, उतना अधिक पुण्य माना जाता है। नसीम मोहम्मद ने अपील की कि कुर्बानी के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। परिवार के मुखिया और आय अर्जित करने वाले सदस्यों पर कुर्बानी करना फर्ज है।
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बिलासपुर। मुस्लिम समुदाय का त्योहार ईद-उल-अजहा (बकरीद) शनिवार को कुर्बानी के जज़्बे के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर जिले की मस्जिदों में मौलानाओं के नेतृत्व में सामूहिक नमाज अता की जाएगी।
जिला मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के प्रधान नसीम मोहम्मद ने बताया कि ईद-उल-अजहा हजरत इब्राहिम की उस ऐतिहासिक कुर्बानी की याद में मनाया जाता है, जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे इस्माइल को कुर्बान करने का संकल्प लिया था। लेकिन खुदा की रहमत से अंतिम क्षण में बेटे की जगह एक दुम्बा (मेंढ़ा) कुर्बान हुआ और इस्माइल सुरक्षित बच गए।
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नसीम मोहम्मद ने बताया कि इसी स्मृति में मुस्लिम समुदाय के लोग बड़े जानवरों की कुर्बानी करते हैं। यह पर्व मेल-मिलाप और भाईचारे का संदेश देता है। जिले भर में तीन दिनों तक समुदाय के लोग अपने मोहल्लों में बारी-बारी से कुर्बानी करेंगे और रिश्तेदारों व दोस्तों को दावत दी जाएगी। बताया कि कुर्बानी को धार्मिक रूप से मुकम्मल तभी माना जाता है जब उसे चार हिस्सों में बांटा जाए। एक हिस्सा गरीबों के लिए, एक रिश्तेदारों के लिए, एक दोस्तों और समाज के लिए तथा एक अपने लिए। कुर्बानी जितनी अधिक दूर-दराज इलाकों में पहुंचाई जाती है, उतना अधिक पुण्य माना जाता है। नसीम मोहम्मद ने अपील की कि कुर्बानी के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। परिवार के मुखिया और आय अर्जित करने वाले सदस्यों पर कुर्बानी करना फर्ज है।
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