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Bilaspur News: करोड़ों के ऋण और फर्जी प्रमाणपत्र मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत

Wed, 23 Sep 2026 01:13 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2026 01:13 AM IST
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Anticipatory bail granted to accused in multi-crore loan and fake certificate case.
एक लाख रुपये के निजी और इतने ही राशि के जमानती मुचलके पर मिली राहत
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों से करोड़ों रुपये का कर्ज लेने, एक ही संपत्ति को अलग-अलग जगह गिरवी रखने, कथित तौर पर गलत जानकारी देकर ऋण हासिल करने, फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र इस्तेमाल करने और सरकारी भूमि पर कब्जे के मामले में एक आरोपी को अदालत ने अग्रिम जमानत दे दी है। सत्र न्यायाधीश बिलासपुर की अदालत ने मंगलवार को आरोपी की याचिका पर सुनवाई के बाद यह राहत दी। आरोपी को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती मुचलके पर रिहा करने के आदेश दिए गए हैं।
मामला स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो के बिलासपुर थाने में दो अप्रैल 2026 को दर्ज मामले से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, जांच में आरोपी और उसके परिवार के सदस्यों की ओर से अलग-अलग बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिए गए ऋणों से संबंधित दस्तावेज खंगाले गए। बैंक, वित्तीय संस्थान, राजस्व विभाग और शैक्षणिक संस्थानों से भी रिकॉर्ड जुटाया गया।
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विजिलेंस के अनुसार, एक वित्तीय निगम से ऋण लेते समय आरोपी ने बैंक ऑफ इंडिया में पहले से चल रहे ऋण और उसकी वसूली की कार्रवाई की जानकारी कथित तौर पर छिपाई। जांच एजेंसी का आरोप है कि गलत शपथपत्र और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर ऋण स्वीकृत कराया गया। परिवार के सदस्यों के नाम पर विभिन्न संस्थानों से ऋण लेने और उनका भुगतान नहीं करने की बात भी जांच में सामने आने का दावा किया गया।
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आरोपी के शैक्षणिक रिकॉर्ड को लेकर भी जांच हुई। अभियोजन के मुताबिक, आरोपी ने घुमारवीं के सरकारी स्कूलों में एक नाम से पढ़ाई की थी, जबकि वित्तीय सहायता के लिए जमा दसवीं के प्रमाणपत्र में दूसरा नाम दर्ज था। विजिलेंस ने संबंधित केंद्रीय विद्यालय और सीबीएसई कार्यालय से प्रमाणपत्र का सत्यापन कराया। जांच एजेंसी के अनुसार, वहां से ऐसा प्रमाणपत्र जारी होने की पुष्टि नहीं हुई। सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप भी लगाया गया है।

बचाव पक्ष ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता और आरोपी के परिवार के बीच पहले से विवाद है और रंजिश के चलते मामला दर्ज कराया गया। आरोपी की ओर से उम्रदराज और अक्सर बीमार रहने का हवाला देते हुए गिरफ्तारी से राहत मांगी गई। अदालत ने पाया कि आरोपी जांच में शामिल हो चुका है और जांच लगभग पूरी है। हिरासत में लेकर पूछताछ की आवश्यकता नहीं है। इसी मामले में मुख्य आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। इन परिस्थितियों में अदालत ने अग्रिम जमानत मंजूर कर दी। आरोपी को जांच में सहयोग करने और गवाहों को प्रभावित नहीं करने की शर्त लगाई गई है।
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