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Bilaspur News: नशे में बेटे ने परिवार पर किया हमला, पिता एम्स रेफर
Sat, 16 May 2026 11:58 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 16 May 2026 11:58 PM IST
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बरमाणा थाना में मामला दर्ज, छुरी से वार करने का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। पुलिस चौकी खारसी के तहत गांव सायर में घरेलू विवाद के दौरान बेटे की ओर से अपने ही परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट करने का मामला सामने आया है। घटना में घायल हुए पिता को गंभीर चोटें आने पर एम्स कोठीपुरा रेफर किया गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार आरोपी ने कथित तौर पर शराब के नशे में अपने पिता, माता और पत्नी के साथ गाली-गलौज और मारपीट की। सभी घायलों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मारकंड गसौड़ ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने राम लाल की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें आगामी उपचार के लिए एम्स कोठीपुरा रेफर कर दिया। जांच के दौरान आरोपी के बड़े भाई किशोरी लाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसका छोटा भाई नशे की हालत में घर पहुंचा और परिवार के साथ झगड़ा करने लगा। विरोध करने पर उसने कथित तौर पर छुरी से अपने पिता पर हमला कर दिया। घटना में तीनों को चोटें आई हैं। पुलिस ने इस संबंध में थाना बरमाणा में मामला दर्ज किया है और छानबीन जारी है। डीएसपी मुख्यालय मदन धीमान ने बताया कि मामले की जांच जारी है।
इनसेट
नशे के खिलाफ अभियान में इस वर्ष अब तक 68 आरोपी पकड़े
जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत जिला पुलिस ने जनवरी 2026 से अभी तक कार्रवाई करते हुए विभिन्न मामलों में करीब 300 ग्राम से अधिक हेरोइन बरामद की है। इस दौरान पुलिस ने अलग-अलग मामलों में 68 से अधिक आरोपियों को पकड़ा है। पुलिस की यह कार्रवाई जिले में लगातार जारी है। जिला पुलिस ने विशेष टीमों का गठन कर नशा तस्करों पर कड़ी नजर रखी हुई है। जनवरी के दौरान पुलिस ने नियमित नाकाबंदी, गश्त और गुप्त सूचना के आधार पर कई जगहों पर दबिश देकर यह बरामदगी की। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामले दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशा तस्करी को जड़ से खत्म करने के लिए जिलेभर में अभियान तेज किया गया है। युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए पुलिस लगातार सख्ती बरत रही है। साथ ही आम जनता से भी अपील की जा रही है कि यदि कहीं भी नशे से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
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हिमाचल में नशे के खिलाफ अभियान पर सवाल
बिलासपुर। प्रदेश में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम को लेकर ठाकुर हीरापाल सिंह ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान अधिकतर सोशल मीडिया और प्रचार-प्रसार तक ही सीमित रह गया है, जबकि समाज में इसका वास्तविक असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा है।
उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों और स्कूल स्तर के विद्यार्थियों को नशे से बचाने के लिए जिस स्तर पर ठोस जागरूकता अभियान चलना चाहिए, वह अभी प्रभावी रूप से दिखाई नहीं दे रहा है। छोटे-छोटे बच्चों को सुरक्षित रखना समय की बड़ी जरूरत है। आरोप लगाया कि नशा विरोधी अभियान में कई बार एजेंसियां और संबंधित लोग केवल वाहवाही और क्रेडिट लेने की होड़ में लगे रहते हैं, जबकि वास्तविक समस्या पर ध्यान कम दिया जाता है। उन्होंने कहा कि नेताओं और जनप्रतिनिधियों का ध्यान भी कई बार राजनीतिक लाभ तक सीमित रह जाता है। उन्होंने चिंता जताई कि 18 से 25 वर्ष की उम्र के युवा नशे की चपेट में तेजी से आ रहे हैं और कई मामलों में ओवरडोज के कारण मौतें भी हो रही हैं। उन्होंने सिंथेटिक ड्रग चिट्टा को प्रदेश के लिए गंभीर चुनौती बताया। कहा कि नशे से प्रभावित युवाओं के लिए पर्याप्त पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए। कहा कि पिछले तीन वर्षों में इस दिशा में कोई ठोस और प्रभावी नीति सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि सरकारें अक्सर बड़े-बड़े कार्यक्रमों, होर्डिंग और इवेंट्स तक सीमित रहती हैं, जबकि असली जरूरत जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई और पुनर्वास की है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। पुलिस चौकी खारसी के तहत गांव सायर में घरेलू विवाद के दौरान बेटे की ओर से अपने ही परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट करने का मामला सामने आया है। घटना में घायल हुए पिता को गंभीर चोटें आने पर एम्स कोठीपुरा रेफर किया गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार आरोपी ने कथित तौर पर शराब के नशे में अपने पिता, माता और पत्नी के साथ गाली-गलौज और मारपीट की। सभी घायलों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मारकंड गसौड़ ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने राम लाल की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें आगामी उपचार के लिए एम्स कोठीपुरा रेफर कर दिया। जांच के दौरान आरोपी के बड़े भाई किशोरी लाल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसका छोटा भाई नशे की हालत में घर पहुंचा और परिवार के साथ झगड़ा करने लगा। विरोध करने पर उसने कथित तौर पर छुरी से अपने पिता पर हमला कर दिया। घटना में तीनों को चोटें आई हैं। पुलिस ने इस संबंध में थाना बरमाणा में मामला दर्ज किया है और छानबीन जारी है। डीएसपी मुख्यालय मदन धीमान ने बताया कि मामले की जांच जारी है।
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नशे के खिलाफ अभियान में इस वर्ष अब तक 68 आरोपी पकड़े
जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत जिला पुलिस ने जनवरी 2026 से अभी तक कार्रवाई करते हुए विभिन्न मामलों में करीब 300 ग्राम से अधिक हेरोइन बरामद की है। इस दौरान पुलिस ने अलग-अलग मामलों में 68 से अधिक आरोपियों को पकड़ा है। पुलिस की यह कार्रवाई जिले में लगातार जारी है। जिला पुलिस ने विशेष टीमों का गठन कर नशा तस्करों पर कड़ी नजर रखी हुई है। जनवरी के दौरान पुलिस ने नियमित नाकाबंदी, गश्त और गुप्त सूचना के आधार पर कई जगहों पर दबिश देकर यह बरामदगी की। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामले दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशा तस्करी को जड़ से खत्म करने के लिए जिलेभर में अभियान तेज किया गया है। युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए पुलिस लगातार सख्ती बरत रही है। साथ ही आम जनता से भी अपील की जा रही है कि यदि कहीं भी नशे से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।
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हिमाचल में नशे के खिलाफ अभियान पर सवाल
बिलासपुर। प्रदेश में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम को लेकर ठाकुर हीरापाल सिंह ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान अधिकतर सोशल मीडिया और प्रचार-प्रसार तक ही सीमित रह गया है, जबकि समाज में इसका वास्तविक असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा है।
उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों और स्कूल स्तर के विद्यार्थियों को नशे से बचाने के लिए जिस स्तर पर ठोस जागरूकता अभियान चलना चाहिए, वह अभी प्रभावी रूप से दिखाई नहीं दे रहा है। छोटे-छोटे बच्चों को सुरक्षित रखना समय की बड़ी जरूरत है। आरोप लगाया कि नशा विरोधी अभियान में कई बार एजेंसियां और संबंधित लोग केवल वाहवाही और क्रेडिट लेने की होड़ में लगे रहते हैं, जबकि वास्तविक समस्या पर ध्यान कम दिया जाता है। उन्होंने कहा कि नेताओं और जनप्रतिनिधियों का ध्यान भी कई बार राजनीतिक लाभ तक सीमित रह जाता है। उन्होंने चिंता जताई कि 18 से 25 वर्ष की उम्र के युवा नशे की चपेट में तेजी से आ रहे हैं और कई मामलों में ओवरडोज के कारण मौतें भी हो रही हैं। उन्होंने सिंथेटिक ड्रग चिट्टा को प्रदेश के लिए गंभीर चुनौती बताया। कहा कि नशे से प्रभावित युवाओं के लिए पर्याप्त पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए। कहा कि पिछले तीन वर्षों में इस दिशा में कोई ठोस और प्रभावी नीति सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि सरकारें अक्सर बड़े-बड़े कार्यक्रमों, होर्डिंग और इवेंट्स तक सीमित रहती हैं, जबकि असली जरूरत जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई और पुनर्वास की है।