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Bilaspur News: प्रदेश में चिकित्सकों की हो रही अनदेखी
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-बिलासपुर चिकित्सक संघ की बैठक में हुई चर्चा
-संघ के खाली पदों को भरने के लिए 3 सितंबर को होंगे चुनाव
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बिलासपुर चिकित्सक संघ की बैठक बिलासपुर में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष डॉ. सतीश शर्मा ने की। इस दौरान चिकित्सकों के साथ हो रही अनदेखी पर चर्चा की गई। साथ ही संघ में खाली चल रहे पदों को भरने के लिए 3 सितंबर को चुनाव के आयोजन को लेकर रणनीति बनाई गई। इस बैठक में विशेष तौर पर सीएमओ डॉ. प्रवीण चौधरी और डॉ. वशिष्ठ मौजूद रहे।
डॉ. सतीश शर्मा ने बताया कि एनपीए को रोके जाने के संदर्भ में पेन डाउन स्ट्राइक की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि एनपीए को भविष्य में चिकित्सकों की नियुक्ति के समय पुन: लागू कर दिया जाएगा। हाल ही में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति में उनके वेतन से इसे हटा दिया गया है। 3 अगस्त को जारी की गई अधिसूचना में वेतन को घटा दिया है। यह मुख्यमंत्री के वचनों का अफसरशाही की ओर से निरादर किया जा रहा है। प्रदेश में पहले ही विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव है और इतने कम वेतन पर कार्य करने के बजाए विशेषज्ञों को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ रहा है। साथ ही एड्स कंट्रोल सोसायटी के परियोजना निदेशक का कार्यभार स्वास्थ्य निदेशक को पुनः: वापस करने की बात कही थी। इसके बावजूद यह कार्यभार एचएएस अधिकारी को सौंप दिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में स्थायी स्वास्थ्य निदेशक की नियुक्ति नहीं हो पाई है। साथ ही विभाग में उपनिदेशक संयुक्त निदेशक और खंड चिकित्सा अधिकारियों की पदोन्नति अब तक नहीं हो पाई है। संघ ने हमेशा ही चिकित्सकों के पदोन्नति के पदों पर सेवा विस्तार का विरोध किया है। चिकित्सक सालों तक अपनी पदोन्नति का इंतजार करते हैं, ऐसे में उनका हक किसी व्यक्ति विशेष को दिया जाना न्याय संगत नहीं है। युवा चिकित्सकों को सेवाएं प्रदान करने से वंचित रखा जा रहा है। युवा चिकित्सक ही रात्रि सेवाएं देते हैं। इसलिए सेवा विस्तार प्रदेश के प्रशिक्षु चिकित्सकों के हित में नहीं है। चिकित्सा अधिकारियों के 25 से 30 साल बीत जाने के बाद खंड चिकित्सा अधिकारी के रूप में पदोन्नति होती है, लेकिन मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद कोई भी चिकित्सा अधिकारी खंड चिकित्सा अधिकारी नहीं बन पाया है। पहले चिकित्सकों की कमी के कारण हिमाचल के लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा से वंचित रहना पड़ता था, लेकिन दूसरी ओर पर्याप्त चिकित्सक होने के बाद भी उन्हें रोजगार नहीं मिलने के कारण उनकी सेवाओं से प्रदेश की जनता को वंचित रहना मजबूरी बन गया है। बैठक के दौरान संघ में खाली चल रहे पदों को भरने पर भी चर्चा की गई। इसके लिए 3 सितंबर को संघ के चुनाव आयोजित किए जाएंगे, जिसमें खाली पदों को भरा जाएगा। इस मौके पर संघ के महासचिव डॉ. प्रदीप, प्रेस सचिव डॉ. भूपेंद्र शर्मा और सह सचिव डॉ. जसदीप अरोड़ा मौजूद रहे।
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-संघ के खाली पदों को भरने के लिए 3 सितंबर को होंगे चुनाव
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। बिलासपुर चिकित्सक संघ की बैठक बिलासपुर में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष डॉ. सतीश शर्मा ने की। इस दौरान चिकित्सकों के साथ हो रही अनदेखी पर चर्चा की गई। साथ ही संघ में खाली चल रहे पदों को भरने के लिए 3 सितंबर को चुनाव के आयोजन को लेकर रणनीति बनाई गई। इस बैठक में विशेष तौर पर सीएमओ डॉ. प्रवीण चौधरी और डॉ. वशिष्ठ मौजूद रहे।
डॉ. सतीश शर्मा ने बताया कि एनपीए को रोके जाने के संदर्भ में पेन डाउन स्ट्राइक की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि एनपीए को भविष्य में चिकित्सकों की नियुक्ति के समय पुन: लागू कर दिया जाएगा। हाल ही में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति में उनके वेतन से इसे हटा दिया गया है। 3 अगस्त को जारी की गई अधिसूचना में वेतन को घटा दिया है। यह मुख्यमंत्री के वचनों का अफसरशाही की ओर से निरादर किया जा रहा है। प्रदेश में पहले ही विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव है और इतने कम वेतन पर कार्य करने के बजाए विशेषज्ञों को दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ रहा है। साथ ही एड्स कंट्रोल सोसायटी के परियोजना निदेशक का कार्यभार स्वास्थ्य निदेशक को पुनः: वापस करने की बात कही थी। इसके बावजूद यह कार्यभार एचएएस अधिकारी को सौंप दिया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में स्थायी स्वास्थ्य निदेशक की नियुक्ति नहीं हो पाई है। साथ ही विभाग में उपनिदेशक संयुक्त निदेशक और खंड चिकित्सा अधिकारियों की पदोन्नति अब तक नहीं हो पाई है। संघ ने हमेशा ही चिकित्सकों के पदोन्नति के पदों पर सेवा विस्तार का विरोध किया है। चिकित्सक सालों तक अपनी पदोन्नति का इंतजार करते हैं, ऐसे में उनका हक किसी व्यक्ति विशेष को दिया जाना न्याय संगत नहीं है। युवा चिकित्सकों को सेवाएं प्रदान करने से वंचित रखा जा रहा है। युवा चिकित्सक ही रात्रि सेवाएं देते हैं। इसलिए सेवा विस्तार प्रदेश के प्रशिक्षु चिकित्सकों के हित में नहीं है। चिकित्सा अधिकारियों के 25 से 30 साल बीत जाने के बाद खंड चिकित्सा अधिकारी के रूप में पदोन्नति होती है, लेकिन मुख्यमंत्री से वार्ता के बाद कोई भी चिकित्सा अधिकारी खंड चिकित्सा अधिकारी नहीं बन पाया है। पहले चिकित्सकों की कमी के कारण हिमाचल के लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा से वंचित रहना पड़ता था, लेकिन दूसरी ओर पर्याप्त चिकित्सक होने के बाद भी उन्हें रोजगार नहीं मिलने के कारण उनकी सेवाओं से प्रदेश की जनता को वंचित रहना मजबूरी बन गया है। बैठक के दौरान संघ में खाली चल रहे पदों को भरने पर भी चर्चा की गई। इसके लिए 3 सितंबर को संघ के चुनाव आयोजित किए जाएंगे, जिसमें खाली पदों को भरा जाएगा। इस मौके पर संघ के महासचिव डॉ. प्रदीप, प्रेस सचिव डॉ. भूपेंद्र शर्मा और सह सचिव डॉ. जसदीप अरोड़ा मौजूद रहे।
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