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त्योहार सबके, मिलजुलकर मनाने से बढ़ता है भाईचारा : अब्बास
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मुस्लिम परिवारों ने रोशनी और आतिशबाजी कर मनाई दिवाली
जलमग्न बिलासपुर के पुराने दौर से ही परिवार में चल रही दिवाली मनाने की परंपरा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। त्योहार किसी एक समुदाय या व्यक्ति के नहीं, बल्कि पूरे समाज के होते हैं। इन्हें मिलजुकर मनाने से प्रेम और भाईचारे की भावना मजबूत होती है। यही संदेश दिया बिलासपुर निवासी अब्बास हुसैन ने, जिन्होंने अपने परिवार के साथ हर्षोल्लास से दिवाली मनाई।
अब्बास हुसैन पुलिस विभाग में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि दिवाली का पर्व अयोध्या में भगवान श्रीराम के लंका विजय उपरांत लौटने की खुशी में मनाया गया था। इसी परंपरा को आज भी वे पूरे उत्साह से निभाते हैं। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर घर को दुल्हन की तरह सजाया गया। रंग-बिरंगी लड़ियों से सजावट की गई, जबकि घर के भीतर विशेष रोशनी की व्यवस्था रही। बताया कि उनके स्वर्गीय पिता अमजद शाह भी सभी त्योहारों को पूरे शौक और उत्साह से मनाते थे। जलमग्न बिलासपुर के पुराने दौर से ही उनके परिवार में यह परंपरा चली आ रही है। बेटियां रंगोली बनाती हैं, शाम को उपहार बांटे जाते हैं और रात में आतिशबाजी का आनंद लिया जाता है। इस बार भी उनकी बेटी मिस्बाह, जो पोस्ट ग्रेजुएट हैं, ने स्वयं सुंदर रंगोली तैयार की। करीब तीन घंटे की मेहनत के बाद घर के मुख्य द्वार से भीतर तक दीप सजाए गए। शाम को परिवार ने रिश्तेदारों और मित्रों को उपहार बांटे और फिर बच्चों के साथ आतिशबाजी का आनंद लिया। बताया कि डियारा सेक्टर में जहां उनका घर है, जहां अधिकतर मुस्लिम परिवार रहते हैं, लेकिन सभी परिवार दीपावली पर आतिशबाजी और रोशनी का त्योहार मनाते हैं। यह दृश्य रौड़ा सेक्टर, बामटा, लखनपुर और चांदपुर में भी देखने को मिला। कहा कि वह और उनके पांचों भाई अलग-अलग स्थानों पर रहते हुए भी हर साल इस परंपरा को पूरे उत्साह और सच्ची भावना से निभाते हैं। उन्होंने कहा कि मिलजुलकर त्योहार मनाने से न केवल दूरियां मिटती हैं बल्कि समाज में प्रेम और एकता की भावना भी मजबूत होती है।
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जलमग्न बिलासपुर के पुराने दौर से ही परिवार में चल रही दिवाली मनाने की परंपरा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। त्योहार किसी एक समुदाय या व्यक्ति के नहीं, बल्कि पूरे समाज के होते हैं। इन्हें मिलजुकर मनाने से प्रेम और भाईचारे की भावना मजबूत होती है। यही संदेश दिया बिलासपुर निवासी अब्बास हुसैन ने, जिन्होंने अपने परिवार के साथ हर्षोल्लास से दिवाली मनाई।
अब्बास हुसैन पुलिस विभाग में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि दिवाली का पर्व अयोध्या में भगवान श्रीराम के लंका विजय उपरांत लौटने की खुशी में मनाया गया था। इसी परंपरा को आज भी वे पूरे उत्साह से निभाते हैं। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर घर को दुल्हन की तरह सजाया गया। रंग-बिरंगी लड़ियों से सजावट की गई, जबकि घर के भीतर विशेष रोशनी की व्यवस्था रही। बताया कि उनके स्वर्गीय पिता अमजद शाह भी सभी त्योहारों को पूरे शौक और उत्साह से मनाते थे। जलमग्न बिलासपुर के पुराने दौर से ही उनके परिवार में यह परंपरा चली आ रही है। बेटियां रंगोली बनाती हैं, शाम को उपहार बांटे जाते हैं और रात में आतिशबाजी का आनंद लिया जाता है। इस बार भी उनकी बेटी मिस्बाह, जो पोस्ट ग्रेजुएट हैं, ने स्वयं सुंदर रंगोली तैयार की। करीब तीन घंटे की मेहनत के बाद घर के मुख्य द्वार से भीतर तक दीप सजाए गए। शाम को परिवार ने रिश्तेदारों और मित्रों को उपहार बांटे और फिर बच्चों के साथ आतिशबाजी का आनंद लिया। बताया कि डियारा सेक्टर में जहां उनका घर है, जहां अधिकतर मुस्लिम परिवार रहते हैं, लेकिन सभी परिवार दीपावली पर आतिशबाजी और रोशनी का त्योहार मनाते हैं। यह दृश्य रौड़ा सेक्टर, बामटा, लखनपुर और चांदपुर में भी देखने को मिला। कहा कि वह और उनके पांचों भाई अलग-अलग स्थानों पर रहते हुए भी हर साल इस परंपरा को पूरे उत्साह और सच्ची भावना से निभाते हैं। उन्होंने कहा कि मिलजुलकर त्योहार मनाने से न केवल दूरियां मिटती हैं बल्कि समाज में प्रेम और एकता की भावना भी मजबूत होती है।
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