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जिला अस्पताल बिलासपुर में आज बनेंगे दिव्यांगता प्रमाण पत्र
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बिलासपुर। अद्वितीय दिव्यांगता पहचान पत्र बनाने के लिए जिला अस्पताल बिलासपुर में शुक्रवार को दिव्यांगता शिविर का लगाया जाएगा। शिविर में 21 प्रकार के दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाए जाएंगे। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. प्रवीण कुमार ने दी।
सीएमओ डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि दिव्यांगजन के अधिकार विधेयक 2016 के तहत दिव्यांगता के प्रकारों को 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि विशेष शिविरों में और हर महीने के प्रथम और तीसरे शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में आकर अपना अद्वितीय दिव्यांगता पहचान पत्र बनवा सकते हैं। दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने के लिए राशन कार्ड/वोटर कार्ड/आधार कार्ड और दिव्यांग व्यक्ति के चार फोटो जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि शिविर में मेडिकल बोर्ड के चिकित्सकों की टीम द्वारा परीक्षण के बाद आवेदक की दिव्यांगता का आकलन किया जाता है और दिव्यांग प्रार्थियों के पक्ष में दिव्यांगता प्रमाण पत्र मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी किया जाता है। इसके बाद ही प्रार्थी को अपना पंजीकरण सामाजिक कल्याण विभाग में करवाना आवश्यक है, इसके बाद ही यूनिक डिसेबिलिटी आईडी कार्ड के माध्यम से व्यक्ति सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उठा सकता है।
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दिव्यांगता के प्रकारों को 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया है। अब अंधापन, कम दृष्टि, कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति, बहरापन, लोकोमोटर दिव्यांगता, बौनापन, बौद्धिक दिव्यांगता, मानसिक बिमारी, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार, सेरेब्रल पाल्सी, मस्कुलर डिस्टॉफी, जीर्ण तंत्रिका संबंधी स्थितियां, विशिष्ट सीखने की अक्षमता, मल्टीपल स्केलेरोसिस, भाषण और भाषा दिव्यांगता, थैलेसीमिया, हीमोफिलिया, सिकल सेल रोग, बहरापन सहित एसिड अटैक पीड़ित और पार्किंसंस रोग को भी दिव्यांगता की श्रेणी में रखा गया है।
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सीएमओ डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि दिव्यांगजन के अधिकार विधेयक 2016 के तहत दिव्यांगता के प्रकारों को 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि विशेष शिविरों में और हर महीने के प्रथम और तीसरे शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में आकर अपना अद्वितीय दिव्यांगता पहचान पत्र बनवा सकते हैं। दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने के लिए राशन कार्ड/वोटर कार्ड/आधार कार्ड और दिव्यांग व्यक्ति के चार फोटो जरूरी हैं।
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उन्होंने कहा कि शिविर में मेडिकल बोर्ड के चिकित्सकों की टीम द्वारा परीक्षण के बाद आवेदक की दिव्यांगता का आकलन किया जाता है और दिव्यांग प्रार्थियों के पक्ष में दिव्यांगता प्रमाण पत्र मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी किया जाता है। इसके बाद ही प्रार्थी को अपना पंजीकरण सामाजिक कल्याण विभाग में करवाना आवश्यक है, इसके बाद ही यूनिक डिसेबिलिटी आईडी कार्ड के माध्यम से व्यक्ति सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उठा सकता है।
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दिव्यांगता के प्रकारों को 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया है। अब अंधापन, कम दृष्टि, कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति, बहरापन, लोकोमोटर दिव्यांगता, बौनापन, बौद्धिक दिव्यांगता, मानसिक बिमारी, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम विकार, सेरेब्रल पाल्सी, मस्कुलर डिस्टॉफी, जीर्ण तंत्रिका संबंधी स्थितियां, विशिष्ट सीखने की अक्षमता, मल्टीपल स्केलेरोसिस, भाषण और भाषा दिव्यांगता, थैलेसीमिया, हीमोफिलिया, सिकल सेल रोग, बहरापन सहित एसिड अटैक पीड़ित और पार्किंसंस रोग को भी दिव्यांगता की श्रेणी में रखा गया है।