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धराड़सानी में मलबा डंपिंग मामला : जांच में नहीं हो पाई टिपरों की पहचान
Sat, 28 Mar 2026 11:40 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Sat, 28 Mar 2026 11:40 PM IST
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झंडूता थाना प्रभारी उपनिरीक्षक ने पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को सौंपी जांच रिपोर्ट
सीसीटीवी फुटेज न मिलने और रिकॉर्ड के अभाव में नहीं मिल सके पुख्ता सबूत
मामले में निजी होटल मालिक पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लगाया था 1 लाख का जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर धराड़सानी के पास एक निजी होटल के समीप मलबा डंपिंग के मामले में पुलिस जांच के बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि 19 सितंबर 2025 को किस टिपर ने होटल के पास गोबिंद सागर झील में मिट्टी फेंकी थी। थाना झंडूता पुलिस की ओर से की गई विस्तृत छानबीन में यह सामने आया है कि उस दौरान फोरलेन सड़क को बहाल करने के लिए बड़े स्तर पर राहत कार्य चल रहा था, जिसमें कई वाहन एक साथ कार्यरत थे।
पुलिस अधीक्षक को भेजी गई जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला शिकायतकर्ता द्वारा दर्ज शिकायत पत्रों पीसीजी-965 दिनांक 28 नवंबर 2025 व पीसीजी-86 दिनांक 24 जनवरी 2026 से जुड़ा है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने विभिन्न पक्षों से पूछताछ कर तथ्यों की पुष्टि करने का प्रयास किया। जांच के दौरान संबंधित निजी होटल के मालिक से पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि भारी बारिश के चलते होटल के साथ स्थित खाली स्थान पर लैंडस्लाइड हुआ था। अपनी निजी भूमि को सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने वहां मिट्टी डालने का बोर्ड लगाया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी ठेकेदार या वाहन चालक को मिट्टी फेंकने के लिए निर्देश नहीं दिए थे। हालांकि, 19 सितंबर 2025 को कुछ अज्ञात टिपरों ने वहां मिट्टी डंप की, जिसकी जानकारी उन्हें मौके पर मौजूद न होने के कारण नहीं हो पाई। मामले में यह भी सामने आया कि डंप की गई कुछ मिट्टी गोबिंद सागर झील में भी चली गई थी, जिसके चलते हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उन पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जिसे उन्होंने 5 दिसंबर 2025 को जमा कर दिया। इस संबंध में 3 मार्च 2026 को थाना स्तर पर रोजनामचा रिपोर्ट दर्ज की गई, जिसमें जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को संकलित किया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, 19 सितंबर 2025 को फोरलेन मार्ग को सुचारू करने के लिए जेसीबी और टिपर तैनात किए गए थे, लेकिन धराड़सानी के पास निजी होटल के समीप दोपहर करीब 2:45 बजे किस वाहन ने मिट्टी डंप की, इसका कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिल सका। पुलिस ने सभी उपलब्ध तथ्यों, बयानों और तस्दीक के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को अवलोकन के लिए भेज दी है।
इनसेट
फोरलेन कंपनी का पक्ष
जांच के दौरान गाबर कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर महंत राम का बयान भी दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि कीरतपुर-मनाली फोरलेन परियोजना के तहत वर्ष 2025 में भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ, जिससे सड़क बार-बार अवरुद्ध हो रही थी। यातायात बहाल करने के लिए कंपनी की जेसीबी मशीनें और टिपर लगातार मलबा हटाने में लगे थे। स्थिति इतनी गंभीर थी कि स्थानीय प्रशासन ने भी अपने वाहन राहत कार्य में लगाए थे। ऐसे में यह निर्धारित करना संभव नहीं है कि किस विशेष टिपर ने किस स्थान पर मलबा डंप किया, क्योंकि उस समय वाहनों का कोई पृथक रिकॉर्ड नहीं रखा गया था।
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इनसेट
सीसीटीवी से भी नहीं मिली मदद
पुलिस ने मौके पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच भी की, लेकिन कैमरों का बैकअप सीमित होने के कारण 19 सितंबर 2025 की फुटेज उपलब्ध नहीं हो सकी। इससे जांच में कोई ठोस तकनीकी साक्ष्य नहीं मिल पाया।
इनसेट
शिकायतकर्ता का रवैया भी बना बाधा
रिपोर्ट में लिखा कि पुलिस टीम ने शिकायतकर्ता से संपर्क कर उनका बयान दर्ज करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने नया बयान देने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उन्होंने जो कुछ कहना था, वह पहले ही अपनी शिकायत में लिख दिया है। इस कारण उनका औपचारिक बयान दर्ज नहीं हो सका।
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सीसीटीवी फुटेज न मिलने और रिकॉर्ड के अभाव में नहीं मिल सके पुख्ता सबूत
मामले में निजी होटल मालिक पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लगाया था 1 लाख का जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर धराड़सानी के पास एक निजी होटल के समीप मलबा डंपिंग के मामले में पुलिस जांच के बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि 19 सितंबर 2025 को किस टिपर ने होटल के पास गोबिंद सागर झील में मिट्टी फेंकी थी। थाना झंडूता पुलिस की ओर से की गई विस्तृत छानबीन में यह सामने आया है कि उस दौरान फोरलेन सड़क को बहाल करने के लिए बड़े स्तर पर राहत कार्य चल रहा था, जिसमें कई वाहन एक साथ कार्यरत थे।
पुलिस अधीक्षक को भेजी गई जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला शिकायतकर्ता द्वारा दर्ज शिकायत पत्रों पीसीजी-965 दिनांक 28 नवंबर 2025 व पीसीजी-86 दिनांक 24 जनवरी 2026 से जुड़ा है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने विभिन्न पक्षों से पूछताछ कर तथ्यों की पुष्टि करने का प्रयास किया। जांच के दौरान संबंधित निजी होटल के मालिक से पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि भारी बारिश के चलते होटल के साथ स्थित खाली स्थान पर लैंडस्लाइड हुआ था। अपनी निजी भूमि को सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने वहां मिट्टी डालने का बोर्ड लगाया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी ठेकेदार या वाहन चालक को मिट्टी फेंकने के लिए निर्देश नहीं दिए थे। हालांकि, 19 सितंबर 2025 को कुछ अज्ञात टिपरों ने वहां मिट्टी डंप की, जिसकी जानकारी उन्हें मौके पर मौजूद न होने के कारण नहीं हो पाई। मामले में यह भी सामने आया कि डंप की गई कुछ मिट्टी गोबिंद सागर झील में भी चली गई थी, जिसके चलते हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उन पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जिसे उन्होंने 5 दिसंबर 2025 को जमा कर दिया। इस संबंध में 3 मार्च 2026 को थाना स्तर पर रोजनामचा रिपोर्ट दर्ज की गई, जिसमें जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को संकलित किया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार, 19 सितंबर 2025 को फोरलेन मार्ग को सुचारू करने के लिए जेसीबी और टिपर तैनात किए गए थे, लेकिन धराड़सानी के पास निजी होटल के समीप दोपहर करीब 2:45 बजे किस वाहन ने मिट्टी डंप की, इसका कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिल सका। पुलिस ने सभी उपलब्ध तथ्यों, बयानों और तस्दीक के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को अवलोकन के लिए भेज दी है।
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फोरलेन कंपनी का पक्ष
जांच के दौरान गाबर कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर महंत राम का बयान भी दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि कीरतपुर-मनाली फोरलेन परियोजना के तहत वर्ष 2025 में भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ, जिससे सड़क बार-बार अवरुद्ध हो रही थी। यातायात बहाल करने के लिए कंपनी की जेसीबी मशीनें और टिपर लगातार मलबा हटाने में लगे थे। स्थिति इतनी गंभीर थी कि स्थानीय प्रशासन ने भी अपने वाहन राहत कार्य में लगाए थे। ऐसे में यह निर्धारित करना संभव नहीं है कि किस विशेष टिपर ने किस स्थान पर मलबा डंप किया, क्योंकि उस समय वाहनों का कोई पृथक रिकॉर्ड नहीं रखा गया था।
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सीसीटीवी से भी नहीं मिली मदद
पुलिस ने मौके पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच भी की, लेकिन कैमरों का बैकअप सीमित होने के कारण 19 सितंबर 2025 की फुटेज उपलब्ध नहीं हो सकी। इससे जांच में कोई ठोस तकनीकी साक्ष्य नहीं मिल पाया।
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शिकायतकर्ता का रवैया भी बना बाधा
रिपोर्ट में लिखा कि पुलिस टीम ने शिकायतकर्ता से संपर्क कर उनका बयान दर्ज करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने नया बयान देने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उन्होंने जो कुछ कहना था, वह पहले ही अपनी शिकायत में लिख दिया है। इस कारण उनका औपचारिक बयान दर्ज नहीं हो सका।