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Bilaspur News: करोड़ों खर्च करने के बाद भी सरकारी तंत्र की सुस्ती, अनदेखी के कारण प्यासे हैं खेत
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लेहड़ सिंचाई योजना का टैंक। संवाद
सात वर्ष से शोपीस बनी हुई है सुन्हाणी-लेहड़ सिंचाई योजना, किसानों में भारी रोष
संवर्धन के नाम पर पुरानी योजना को उखाड़कर नए पाइप तो डाले,पानी नहीं पहुंचा
मंगल ठाकुर
बरठीं (बिलासपुर)। विकासखंड झंडूता की ग्राम पंचायत सुन्हाणी में सरकारी तंत्र की सुस्ती और अनदेखी के कारण किसानों का भविष्य दांव पर लगा है। यहां करीब 1.12 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई सुन्हाणी-लेहड़ सिंचाई योजना सात साल बीत जाने के बाद भी शोपीस बनी हुई है। संवर्धन के नाम पर पुरानी योजना को उखाड़कर नए पाइप तो डाल दिए गए लेकिन आज तक किसानों के खेतों तक पानी की एक बूंद नहीं पहुंच पाई है।
सुन्हाणी क्षेत्र में सिंचाई के लिए वर्ष 1975 में योजना बनी थी। करीब सात वर्ष पूर्व जल शक्ति विभाग ने इसके संवर्धन का कार्य शुरू किया। विभाग का दावा था कि इससे सुन्हाणी, लेहड़ और धरोटी के किसानों की आय दोगुनी होगी। लेकिन आज धरातल पर स्थिति यह है कि करोड़ों रुपये जमीन में दफन हो चुके हैं और किसान पानी के लिए तरस रहे हैं। योजना के अधर में लटके होने के कारण क्षेत्र के किसानों में गहरा आक्रोश है। महिला किसान समिति की प्रधान व पूर्व जिला परिषद सदस्य शकुंतला कौशल के नेतृत्व में नेफां, हसीना, कश्मीरी, फुला देवी, रेखा शर्मा, बीना देवी, नर्मदा, मीरा और कौशल्या ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, किसान रमेश कौडल, जोध सिंह, धर्मपाल, प्यारे लाल, कुलदीप सिंह, ज्ञानचंद, विद्यासागर, केहर सिंह, नानक चंद, लेखराम, प्रीतम सिंह व अन्य किसानों ने बताया कि विभाग ने भूमिगत पाइपें डालकर खानापूर्ति तो कर दी, लेकिन टैंक बनाने के लिए खेतों में गड्ढे खोदकर छोड़ दिए हैं। आज तक होदियों का निर्माण नहीं हुआ और आधी-अधूरे पाइप खेतों में खराब हो रहे हैं। ग्राम पंचायत सुन्हाणी के प्रधान उपेंद्र सिंह, सुखदेव परमार, नानक चंद, बिशन सिंह, देशराज और सुरेश कुमार सहित अन्य प्रतिनिधियों ने बताया कि पंचायत और किसानों ने कई बार सरकार और विभाग से गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि उपजाऊ जमीन होने के बावजूद पानी के अभाव में वे न सब्जी उगा पा रहे हैं और न ही मेहनत के अनुरूप फसल प्राप्त कर पा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि जल शक्ति विभाग के पास फील्ड कर्मचारियों और लेबर की भारी कमी है। सारा काम ठेकेदारों के माध्यम से करवाया जा रहा है। इसके चलते ठेकेदार तो मालामाल हो रहे हैं, लेकिन आम जनता और किसान परेशान हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि इस उदासीन रवैये को लेकर अब सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिखा जाएगा।
कोट
मेरे पास इस योजना के बारे में अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। शिकायत मिलने पर तुरंत मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
सतीश कुमार, अधिशासी अभियंता, जल शक्ति विभाग
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संवर्धन के नाम पर पुरानी योजना को उखाड़कर नए पाइप तो डाले,पानी नहीं पहुंचा
मंगल ठाकुर
बरठीं (बिलासपुर)। विकासखंड झंडूता की ग्राम पंचायत सुन्हाणी में सरकारी तंत्र की सुस्ती और अनदेखी के कारण किसानों का भविष्य दांव पर लगा है। यहां करीब 1.12 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई सुन्हाणी-लेहड़ सिंचाई योजना सात साल बीत जाने के बाद भी शोपीस बनी हुई है। संवर्धन के नाम पर पुरानी योजना को उखाड़कर नए पाइप तो डाल दिए गए लेकिन आज तक किसानों के खेतों तक पानी की एक बूंद नहीं पहुंच पाई है।
सुन्हाणी क्षेत्र में सिंचाई के लिए वर्ष 1975 में योजना बनी थी। करीब सात वर्ष पूर्व जल शक्ति विभाग ने इसके संवर्धन का कार्य शुरू किया। विभाग का दावा था कि इससे सुन्हाणी, लेहड़ और धरोटी के किसानों की आय दोगुनी होगी। लेकिन आज धरातल पर स्थिति यह है कि करोड़ों रुपये जमीन में दफन हो चुके हैं और किसान पानी के लिए तरस रहे हैं। योजना के अधर में लटके होने के कारण क्षेत्र के किसानों में गहरा आक्रोश है। महिला किसान समिति की प्रधान व पूर्व जिला परिषद सदस्य शकुंतला कौशल के नेतृत्व में नेफां, हसीना, कश्मीरी, फुला देवी, रेखा शर्मा, बीना देवी, नर्मदा, मीरा और कौशल्या ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। वहीं, किसान रमेश कौडल, जोध सिंह, धर्मपाल, प्यारे लाल, कुलदीप सिंह, ज्ञानचंद, विद्यासागर, केहर सिंह, नानक चंद, लेखराम, प्रीतम सिंह व अन्य किसानों ने बताया कि विभाग ने भूमिगत पाइपें डालकर खानापूर्ति तो कर दी, लेकिन टैंक बनाने के लिए खेतों में गड्ढे खोदकर छोड़ दिए हैं। आज तक होदियों का निर्माण नहीं हुआ और आधी-अधूरे पाइप खेतों में खराब हो रहे हैं। ग्राम पंचायत सुन्हाणी के प्रधान उपेंद्र सिंह, सुखदेव परमार, नानक चंद, बिशन सिंह, देशराज और सुरेश कुमार सहित अन्य प्रतिनिधियों ने बताया कि पंचायत और किसानों ने कई बार सरकार और विभाग से गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि उपजाऊ जमीन होने के बावजूद पानी के अभाव में वे न सब्जी उगा पा रहे हैं और न ही मेहनत के अनुरूप फसल प्राप्त कर पा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि जल शक्ति विभाग के पास फील्ड कर्मचारियों और लेबर की भारी कमी है। सारा काम ठेकेदारों के माध्यम से करवाया जा रहा है। इसके चलते ठेकेदार तो मालामाल हो रहे हैं, लेकिन आम जनता और किसान परेशान हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि इस उदासीन रवैये को लेकर अब सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिखा जाएगा।
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कोट
मेरे पास इस योजना के बारे में अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। शिकायत मिलने पर तुरंत मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
सतीश कुमार, अधिशासी अभियंता, जल शक्ति विभाग