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Bilaspur News: छह करोड़ के बजट के बावजूद नहीं शौचालय की सुविधा
Wed, 07 Jan 2026 11:30 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Wed, 07 Jan 2026 11:30 PM IST
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सुरजीत पटियाल
ग्राउंड रिपोर्ट
नप घुमारवीं में स्वच्छ भारत मिशन के दावे हुए हवा
शहर में नहीं मिल पा रही शौचालय के लिए जगह
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। शहर की पहचान बड़े भवनों और चमकती दुकानों से नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं से होती है, लेकिन घुमारवीं नगर परिषद क्षेत्र में आज सबसे बड़ी विडंबना यह है कि करोड़ों रुपये के बजट के बावजूद लोगों को शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा नहीं मिल पा रही है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत किए जा रहे तमाम दावे घुमारवीं के मुख्य बाजार में पहुंचते ही दम तोड़ देते हैं।
करीब छह करोड़ रुपये के वार्षिक बजट वाली नगर परिषद आज भी शहर के बीचों-बीच एक अदद सार्वजनिक शौचालय तक खड़ा नहीं कर पाई है। शहर का सबसे व्यस्त इलाका गांधी चौक और मुख्य बाजार दिनभर लोगों से भरा रहता है। दुकानदार, ग्राहक, बुजुर्ग और महिलाएं घंटों यहां मौजूद रहते हैं, लेकिन शौचालय न होने के कारण लोगों को या तो बार-बार बाजार छोड़ना पड़ता है या फिर मजबूरी में गली-कूचों का सहारा लेना पड़ता है। यह स्थिति न केवल असहज है, बल्कि स्वच्छता, स्वास्थ्य और गरिमा तीनों पर सीधा प्रहार है। सात वार्डों वाली नगर परिषद में केवल दो वार्डों में बने सार्वजनिक शौचालय शहर के दोनों छोर पर स्थित हैं, जिनका मुख्य बाजार से कोई सीधा सरोकार नहीं है। करीब पांच किलोमीटर में फैले पूरे नगर परिषद क्षेत्र में बीच बाजार सार्वजनिक शौचालय का न होना यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर योजनाएं कागजों से आगे क्यों नहीं बढ़ पा रहीं। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को झेलनी पड़ रही है। बाजार में आने वाली महिलाओं के लिए कोई सुरक्षित और सम्मानजनक व्यवस्था नहीं है। यह और भी चिंताजनक है कि नगर परिषद की अध्यक्ष एक महिला हैं, बावजूद इसके महिलाओं की सुविधा को प्राथमिकता सूची में जगह नहीं मिल पा रही है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि वे हर साल सरकार को भारी-भरकम टैक्स अदा करते हैं, लेकिन बदले में उन्हें बुनियादी सुविधाओं के नाम पर निराशा ही मिलती है। वर्षों से उठ रही सार्वजनिक शौचालय की मांग अब नाराजगी में बदल चुकी है।
इनसेट
शहर के मुख्य बाजार में शौचालय न होना नगर परिषद की गंभीर विफलता है। करोड़ों का बजट होने के बावजूद यह सुविधा न मिलना जनता के साथ अन्याय है। अब यह मुद्दा नजरअंदाज करने लायक नहीं रहा।
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विनोद मेहता, दुकानदार
इनसेट
ग्राहकों को परेशानी होती है और व्यापार पर भी असर पड़ता है। हम सरकार को टैक्स देते हैं, लेकिन बदले में बुनियादी सुविधा तक नहीं मिलती। नगर परिषद को तुरंत ठोस निर्णय लेने चाहिए।
सुरजीत पटियाल, स्थानीय दुकानदार
महिलाओं के लिए शौचालय की कमी सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा विषय है। बाजार में आने वाली महिलाओं को असुविधा झेलनी पड़ती है। इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
रेखा देवी, दुकानदार
इनसेट
घुमारवीं को विकसित शहर कहना तभी सार्थक होगा जब बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों। शौचालय को लेकर वर्षों से मांग उठ रही है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब जवाबदेही तय होनी चाहिए।
सतीश शर्मा, स्थानीय दुकानदार
कोट
शहर में शौचालय निर्माण के लिए कई बार कोशिश की गई लेकिन उपयुक्त स्थान न मिलने के कारण दिक्कत है सामने आ रहे हैं। जहां भी शौचालय का निर्माण शुरू करने की कोशिश की जाती है वहीं पर कुछ दुकानदार उसका विरोध करने लग जाते हैं, जिस वजह से शौचालय का निर्माण नहीं हो पा रहा है। कोशिश की जा रही है कि जल्द ही शहर में शौचालय की सुविधा लोगों को मिल सके।
रीता सहगल, अध्यक्ष, नगर परिषद घुमारवीं
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नप घुमारवीं में स्वच्छ भारत मिशन के दावे हुए हवा
शहर में नहीं मिल पा रही शौचालय के लिए जगह
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। शहर की पहचान बड़े भवनों और चमकती दुकानों से नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं से होती है, लेकिन घुमारवीं नगर परिषद क्षेत्र में आज सबसे बड़ी विडंबना यह है कि करोड़ों रुपये के बजट के बावजूद लोगों को शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा नहीं मिल पा रही है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत किए जा रहे तमाम दावे घुमारवीं के मुख्य बाजार में पहुंचते ही दम तोड़ देते हैं।
करीब छह करोड़ रुपये के वार्षिक बजट वाली नगर परिषद आज भी शहर के बीचों-बीच एक अदद सार्वजनिक शौचालय तक खड़ा नहीं कर पाई है। शहर का सबसे व्यस्त इलाका गांधी चौक और मुख्य बाजार दिनभर लोगों से भरा रहता है। दुकानदार, ग्राहक, बुजुर्ग और महिलाएं घंटों यहां मौजूद रहते हैं, लेकिन शौचालय न होने के कारण लोगों को या तो बार-बार बाजार छोड़ना पड़ता है या फिर मजबूरी में गली-कूचों का सहारा लेना पड़ता है। यह स्थिति न केवल असहज है, बल्कि स्वच्छता, स्वास्थ्य और गरिमा तीनों पर सीधा प्रहार है। सात वार्डों वाली नगर परिषद में केवल दो वार्डों में बने सार्वजनिक शौचालय शहर के दोनों छोर पर स्थित हैं, जिनका मुख्य बाजार से कोई सीधा सरोकार नहीं है। करीब पांच किलोमीटर में फैले पूरे नगर परिषद क्षेत्र में बीच बाजार सार्वजनिक शौचालय का न होना यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर योजनाएं कागजों से आगे क्यों नहीं बढ़ पा रहीं। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को झेलनी पड़ रही है। बाजार में आने वाली महिलाओं के लिए कोई सुरक्षित और सम्मानजनक व्यवस्था नहीं है। यह और भी चिंताजनक है कि नगर परिषद की अध्यक्ष एक महिला हैं, बावजूद इसके महिलाओं की सुविधा को प्राथमिकता सूची में जगह नहीं मिल पा रही है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि वे हर साल सरकार को भारी-भरकम टैक्स अदा करते हैं, लेकिन बदले में उन्हें बुनियादी सुविधाओं के नाम पर निराशा ही मिलती है। वर्षों से उठ रही सार्वजनिक शौचालय की मांग अब नाराजगी में बदल चुकी है।
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शहर के मुख्य बाजार में शौचालय न होना नगर परिषद की गंभीर विफलता है। करोड़ों का बजट होने के बावजूद यह सुविधा न मिलना जनता के साथ अन्याय है। अब यह मुद्दा नजरअंदाज करने लायक नहीं रहा।
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विनोद मेहता, दुकानदार
इनसेट
ग्राहकों को परेशानी होती है और व्यापार पर भी असर पड़ता है। हम सरकार को टैक्स देते हैं, लेकिन बदले में बुनियादी सुविधा तक नहीं मिलती। नगर परिषद को तुरंत ठोस निर्णय लेने चाहिए।
सुरजीत पटियाल, स्थानीय दुकानदार
महिलाओं के लिए शौचालय की कमी सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा विषय है। बाजार में आने वाली महिलाओं को असुविधा झेलनी पड़ती है। इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
रेखा देवी, दुकानदार
इनसेट
घुमारवीं को विकसित शहर कहना तभी सार्थक होगा जब बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों। शौचालय को लेकर वर्षों से मांग उठ रही है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब जवाबदेही तय होनी चाहिए।
सतीश शर्मा, स्थानीय दुकानदार
कोट
शहर में शौचालय निर्माण के लिए कई बार कोशिश की गई लेकिन उपयुक्त स्थान न मिलने के कारण दिक्कत है सामने आ रहे हैं। जहां भी शौचालय का निर्माण शुरू करने की कोशिश की जाती है वहीं पर कुछ दुकानदार उसका विरोध करने लग जाते हैं, जिस वजह से शौचालय का निर्माण नहीं हो पा रहा है। कोशिश की जा रही है कि जल्द ही शहर में शौचालय की सुविधा लोगों को मिल सके।
रीता सहगल, अध्यक्ष, नगर परिषद घुमारवीं

सुरजीत पटियाल

सुरजीत पटियाल

सुरजीत पटियाल