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सिकरोआ में हो रहे अतिक्रमण पर वन विभाग ने काटी डैमेज रिपोर्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। सिकरोआ पंचायत के अंतर्गत कुछ लोगों की ओर से सरकारी जमीन पर किए जा रहे अतिक्रमण की शिकायत पर वन विभाग ने शिकंजा कस दिया है। वन विभाग ने यहां पर सड़क किनारे हो रहे निर्माण को रुकवा दिया है। जबकि यहां की डैमेज रिपोर्ट तैयार कर निर्माण कर रहे व्यक्ति को 1035 रुपये का जुर्माना भी लगा दिया है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि व्यक्ति यहां पर वर्षा शालिका निर्माण करने की बात कह रहा था, लेकिन वन विभाग की ओर से कोई भी एनओसी नहीं ली गई थी।
सेवा माउंट संस्था के कानूनी सलाहकार अजय कुमार, अतुल, होशियार सिंह, विक्रम सिंह का कहना है कि जहां पर अतिक्रमण किया जा रहा था वहां पर जगह काफी तंग है। जबकि वहां से एक सड़क स्कूल, पंचायत घर व गलौड़ गांव को जाती है। पहले से ही तंग रास्ता होने के चलते वाहनों को मुड़ने में दिक्कत होती है। ऐसे में अतिक्रमण से जगह और भी तंग हो गई है।
संस्था का कहना है कि अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ जब यह मामला उजागर हुआ तो उन्होंने इसे सामाजिक रंग देने की कोशिश की। जबकि वह वहां पर कोई भी वर्षा शालिका नहीं बना रहे थे क्योंकि 100 मीटर की दूरी पर वर्षा शालिका व पीने के पानी की टंकी प्रशासन ने पहले से ही बनाई हुई है। ऐसे में 100 मीटर की दूरी पर ही नई वर्षा शालिका व पानी की टंकी बनाने का निर्माण बिना संबंधित विभागों की एनओसी, बिना पंचायत प्रस्ताव, बिना कोई ततीमा काटे, बिना विभागीय शुल्क दिए व बिना किसी प्रपोजल के कैसे निर्माण शुरू कर दिया था।
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संस्था का कहना है कि मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। यह कोई भी सामाजिक कार्य नहीं है। महज उजागर होने के बाद बचाने की कोशिश की जा रही है। जबकि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कराना कानूनी अपराध है।
वन विभाग पंजगाई के बीओ हुकमचंद ने बताया कि अतिक्रमण को रुकवा दिया गया है। इसकी डैमेज रिपोर्ट काट दी गई है। अतिक्रमण करने वालों से 1035 रुपये वसूला गया है। उक्त लोग सड़क किनारे डंगा लगा रहे थे।
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बिलासपुर। सिकरोआ पंचायत के अंतर्गत कुछ लोगों की ओर से सरकारी जमीन पर किए जा रहे अतिक्रमण की शिकायत पर वन विभाग ने शिकंजा कस दिया है। वन विभाग ने यहां पर सड़क किनारे हो रहे निर्माण को रुकवा दिया है। जबकि यहां की डैमेज रिपोर्ट तैयार कर निर्माण कर रहे व्यक्ति को 1035 रुपये का जुर्माना भी लगा दिया है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि व्यक्ति यहां पर वर्षा शालिका निर्माण करने की बात कह रहा था, लेकिन वन विभाग की ओर से कोई भी एनओसी नहीं ली गई थी।
सेवा माउंट संस्था के कानूनी सलाहकार अजय कुमार, अतुल, होशियार सिंह, विक्रम सिंह का कहना है कि जहां पर अतिक्रमण किया जा रहा था वहां पर जगह काफी तंग है। जबकि वहां से एक सड़क स्कूल, पंचायत घर व गलौड़ गांव को जाती है। पहले से ही तंग रास्ता होने के चलते वाहनों को मुड़ने में दिक्कत होती है। ऐसे में अतिक्रमण से जगह और भी तंग हो गई है।
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संस्था का कहना है कि अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ जब यह मामला उजागर हुआ तो उन्होंने इसे सामाजिक रंग देने की कोशिश की। जबकि वह वहां पर कोई भी वर्षा शालिका नहीं बना रहे थे क्योंकि 100 मीटर की दूरी पर वर्षा शालिका व पीने के पानी की टंकी प्रशासन ने पहले से ही बनाई हुई है। ऐसे में 100 मीटर की दूरी पर ही नई वर्षा शालिका व पानी की टंकी बनाने का निर्माण बिना संबंधित विभागों की एनओसी, बिना पंचायत प्रस्ताव, बिना कोई ततीमा काटे, बिना विभागीय शुल्क दिए व बिना किसी प्रपोजल के कैसे निर्माण शुरू कर दिया था।
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संस्था का कहना है कि मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। यह कोई भी सामाजिक कार्य नहीं है। महज उजागर होने के बाद बचाने की कोशिश की जा रही है। जबकि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कराना कानूनी अपराध है।
वन विभाग पंजगाई के बीओ हुकमचंद ने बताया कि अतिक्रमण को रुकवा दिया गया है। इसकी डैमेज रिपोर्ट काट दी गई है। अतिक्रमण करने वालों से 1035 रुपये वसूला गया है। उक्त लोग सड़क किनारे डंगा लगा रहे थे।
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