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डॉक्टरों की लापरवाही से हुई युवक की मौत

Fri, 14 Sep 2018 11:31 PM IST
Updated Fri, 14 Sep 2018 11:31 PM IST
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डॉक्टरों की लापरवाही से हुई युवक की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
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बिलासपुर। शिमला आईजीएसमी में डॉक्टरों की लापरवाही से जुखाला के युवक की हुई मौत मामले में युवा उग्र हो गए हैं। शुक्रवार को बिलासपुर में एकत्रित होकर युवाओं ने पहले तो डॉक्टरों की लापरवाही पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा वहीं पत्रकारों से बातचीत कर पूरी जानकारी का ब्योरा रखा।
मृतक वरुण कुमार (26) पुत्र रोशन लाल निवासी कोटलू, जुखाला के दोस्त गौरव शर्मा व नवीन ठाकुर ने बताया कि वरुण को आठ सितंबर को सबसे पहले दर्द हुआ, जिसके बाद उसे आईजीएमसी शिमला ले जाया गया। यहां पर डॉक्टरों ने पीठ की बीमारी को बता कर उसे घर भेज दिया लेकिन जब नौ सितंबर रात करीब तीन बजे दोबारा उसकी तबीयत बिगड़ी तो परिजन उसे दोबारा आईजीएमसी ले गए। सुबह पांच बजे उसे आपातकाल में भर्ती किया गया। यहां पर तैनात जूनियर डॉक्टर ने उसकी हालत की गंभीरता को देखते हुए उसे पाइप लगाने को कहा। उसकी किडनी में पांच एमएम की स्टोन थी। डॉक्टर द्वारा उसे दर्द निवारक दवा दी गई। इसके बाद सीनियर डॉक्टर से बात करने को कहा गया। इसके बाद उसके साथ अस्पताल गए भाई ने कमरा नंबर 507 में बैठे डॉक्टर को कहा, जिस पर डॉक्टर ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह नीचे आ रहे हैं लेकिन जब दो घंटे बाद भी डॉक्टर वहां नहीं पहुंचे तो वह दोबारा से डॉक्टर के पास गए, जहां पर उन्हें दोबारा कहा गया कि डॉक्टर आ रहे हैं लेकिन दोपहर एक बजे से लेकर शाम छह बजे तक कोई भी डॉक्टर नहीं पहुंचा।
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जब रात नौ बजे दोबारा उसकी तबीयत खराब हुई तो उसे दर्द निवारक दवा का इंजेक्शन दिया गया। इसके लगाने के दो मिनट बाद ही वह बेहोश हो गया। उसके मुंह से तरल पदार्थ बाहर आने लगा। जब उसकी सांसे चेक की गई तो वह मर चुका था। इसके बाद डॉक्टरों ने उसे अस्पताल में भर्ती किया। बाद से साढ़े दस बजे डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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युवाओं का कहना है कि जब कोई तीमारदार डॉक्टरों से ऊंची आवाज में बात करे तो डॉक्टर तुरंत एफआईआर दर्ज करवा देते हैं, लेकिन ऐसे में तीमारदार की सुनने वाला कोई नहीं होता। इस मौके पर नवीन ठाकुर, मनीष ठाकुर, अरुण ठाकुर, कमल ठाकुर सहित अन्य दर्जनों युवा उपस्थित थे।
 
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