{"_id":"68c2c9f791b5e802d30bc804","slug":"civil-court-accepted-the-petition-for-correction-of-name-of-students-parents-bilaspur-news-c-92-1-ssml1001-144137-2025-09-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bilaspur News: सिविल कोर्ट ने मंजूर की छात्रा के माता-पिता के नाम सुधार की याचिका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bilaspur News: सिविल कोर्ट ने मंजूर की छात्रा के माता-पिता के नाम सुधार की याचिका
Thu, 11 Sep 2025 11:38 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Thu, 11 Sep 2025 11:38 PM IST
विज्ञापन
अदालत से
छात्रा के जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल प्रमाणपत्रों में पिता-माता के नाम में हुई थी गलती
बोर्ड से नाम ठीक कराने की नाकाम कोशिश के बाद छात्रा पहुंची थी न्यायालय
मामले की सुनवाई के बाद दिए हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन धर्मशाला को आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सिविल कोर्ट बिलासपुर ने छात्रा अंजलि ठाकुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन धर्मशाला को उनके माता-पिता के नाम में सुधार के आदेश पारित किए हैं। छात्रा ने याचिका दायर कर अपने माता और पिता के नाम को सुधारने के आदेश देने की की मांग की थी।
छात्रा ने कोर्ट को बताया कि वह 5 अप्रैल 2006 को सिविल अस्पताल बिलासपुर में जन्मी और उनका जन्म प्रमाण पत्र ग्राम पंचायत धार टटोह में दर्ज है। उनके जन्म प्रमाण पत्र में पिता और माता का नाम सही रूप में दर्ज है। पढ़ाई के दौरान अंजलि ने सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल धार टटोह से दसवीं और 12वीं पास की। लेकिन हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन धर्मशाला की ओर से जारी किए गए प्रमाण पत्रों में पिता और माता का नाम गलत लिखा गया। छात्रा ने यह गलती पहले स्कूल में ठीक कराने की कोशिश की, लेकिन स्कूल ने परिणाम घोषित होने के बाद सुधार न कर पाने की बात कही और बोर्ड से संपर्क करने की सलाह दी। इसके बाद छात्रा ने 10 जून 2023 को बोर्ड को आवेदन दिया और सभी दस्तावेज जन्म प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर और माता-पिता के आधार कार्ड संलग्न किए। बावजूद इसके बोर्ड ने कोई कार्रवाई नहीं की। छात्रा के पिता और माता ने भी कोर्ट में गवाही दी और अपने दस्तावेज पेश किए जिनमें उनका नाम सही दर्ज था। कोर्ट ने कहा कि याचिका में दायर तथ्य पूरी तरह सत्य हैं और बोर्ड ने जवाब नहीं दिया। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अंजलि के माता-पिता के नाम में सुधार करना न्यायोचित है और इससे किसी को कोई नुकसान नहीं होगा।
विज्ञापन
छात्रा के जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल प्रमाणपत्रों में पिता-माता के नाम में हुई थी गलती
बोर्ड से नाम ठीक कराने की नाकाम कोशिश के बाद छात्रा पहुंची थी न्यायालय
मामले की सुनवाई के बाद दिए हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन धर्मशाला को आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सिविल कोर्ट बिलासपुर ने छात्रा अंजलि ठाकुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन धर्मशाला को उनके माता-पिता के नाम में सुधार के आदेश पारित किए हैं। छात्रा ने याचिका दायर कर अपने माता और पिता के नाम को सुधारने के आदेश देने की की मांग की थी।
छात्रा ने कोर्ट को बताया कि वह 5 अप्रैल 2006 को सिविल अस्पताल बिलासपुर में जन्मी और उनका जन्म प्रमाण पत्र ग्राम पंचायत धार टटोह में दर्ज है। उनके जन्म प्रमाण पत्र में पिता और माता का नाम सही रूप में दर्ज है। पढ़ाई के दौरान अंजलि ने सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल धार टटोह से दसवीं और 12वीं पास की। लेकिन हिमाचल प्रदेश बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन धर्मशाला की ओर से जारी किए गए प्रमाण पत्रों में पिता और माता का नाम गलत लिखा गया। छात्रा ने यह गलती पहले स्कूल में ठीक कराने की कोशिश की, लेकिन स्कूल ने परिणाम घोषित होने के बाद सुधार न कर पाने की बात कही और बोर्ड से संपर्क करने की सलाह दी। इसके बाद छात्रा ने 10 जून 2023 को बोर्ड को आवेदन दिया और सभी दस्तावेज जन्म प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर और माता-पिता के आधार कार्ड संलग्न किए। बावजूद इसके बोर्ड ने कोई कार्रवाई नहीं की। छात्रा के पिता और माता ने भी कोर्ट में गवाही दी और अपने दस्तावेज पेश किए जिनमें उनका नाम सही दर्ज था। कोर्ट ने कहा कि याचिका में दायर तथ्य पूरी तरह सत्य हैं और बोर्ड ने जवाब नहीं दिया। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अंजलि के माता-पिता के नाम में सुधार करना न्यायोचित है और इससे किसी को कोई नुकसान नहीं होगा।
विज्ञापन