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यूक्रेन में फंसे भाई-बहन, बिस्किट और पानी से काट रहे दिन
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गीतिका राणा।
- फोटो : BILASPUR
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बिलासपुर/भराड़ी (बिलासपुर)। जिले के मलागण गांव के दो भाई-बहन यूक्रेन के पोलतावा शहर में फंसे हुए हैं। दोनों एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी मदद के लिए भारतीय दूतावास ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। दोनों बिस्किट खाकर और पानी पीकर गुजारा कर रहे हैं। परिजन काफी चिंतित हैं।
झंडूता उपमंडल के मंलागण गांव के हिमाशु राणा और गीतिका राणा के पिता रामस्वरूप ने बताया कि उनके बच्चों को मदद नहीं मिल रही है। भारतीय दूतावास ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। भारतीय दूतावास ने किसी तरह रोमानिया पहुंचने के लिए कहा है। रोमानिया बॉर्डर से पोलतावा की दूरी 700 किलोमीटर है और युद्ध के हालात में इतना दूर नहीं पहुंचा जा सकता है। बच्चे अब तो बस भगवान भरोसे हैं। हालात खराब होते जा रहे हैं। बच्चे बिस्कुट और पानी से गुजारा कर रहे हैं।
यूक्रेन में जिले के 22 विद्यार्थी विभिन्न शहरों में फंसे हुए थे, इनमें से 13 विद्यार्थी स्वदेश लौट आए हैं जबकि 11 अभी वहां से निकलने की कोशिश कर रहे हैं। यूक्रेन से रविवार रात घर पहुंची सदर उपमंडल के गांव साई ब्राह्मणा निवासी आस्था शैल ने बताया कि सुरक्षित घर पहुंच गई हैं, उसके साथ जिले के श्रेयस पटियाल, प्रेरणा गौतम, आशीष शर्मा, अदिति ठाकुर भी घर लौटे हैं। भारत सरकार ने उनके आने का सारा खर्च उठाया है। बताया कि यूक्रेन में हालात खराब होते जा रहे हैं। खारकीव में अभी भी कई छात्र फंसे हुए हैं। उनके सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है। आस्था ने भारत सरकार का आभार प्रकट करते हुए अन्य छात्रों को जल्द वापस लाने की गुहार लगाई है।
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सात किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे रोमानिया बॉर्डर
घुमारवीं उपमंडल के दधोल गांव के आशीष शर्मा रविवार रात को यूक्रेन से घर पहुंच गए। एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन गए आशीष शर्मा ने बताया कि हालात ठीक नहीं हैं। हर पल डर के साये में रहने को मजबूर हो चुके थे। वहां दुकानें बंद हो चुकी थीं। खाने का सामान जो कमरे में रखा था उससे ही गुजारा किया। एटीएम बंद हो गए थे। पैसे भी नहीं थे। जल्द अपने देश आने की राह देख रहे थे। एबेंसी व कॉलेज की तरफ से एडवाइजरी जारी हुई थी कि अगर सायरन या हूटर सुनाई दे तो जल्द कमरों से बाहर निकल जाना। इसके अलावा अपने पासपोर्ट साथ रखने की हिदायत दी थी।
बताया कि रोमानिया देश का बॉर्डर उनके कॉलेज से करीब 35 किलोमीटर दूरी पर था। बॉर्डर पर जाम की स्थिति बनी हुई थी। 5 से 7 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। सिर्फ कुछ किताबें व कपड़े ही घर लाया हूं। बाकी सामान वहीं पर छोड़ दिया है। अब पढ़ाई बीच में छूट गई।
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झंडूता उपमंडल के मंलागण गांव के हिमाशु राणा और गीतिका राणा के पिता रामस्वरूप ने बताया कि उनके बच्चों को मदद नहीं मिल रही है। भारतीय दूतावास ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। भारतीय दूतावास ने किसी तरह रोमानिया पहुंचने के लिए कहा है। रोमानिया बॉर्डर से पोलतावा की दूरी 700 किलोमीटर है और युद्ध के हालात में इतना दूर नहीं पहुंचा जा सकता है। बच्चे अब तो बस भगवान भरोसे हैं। हालात खराब होते जा रहे हैं। बच्चे बिस्कुट और पानी से गुजारा कर रहे हैं।
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यूक्रेन में जिले के 22 विद्यार्थी विभिन्न शहरों में फंसे हुए थे, इनमें से 13 विद्यार्थी स्वदेश लौट आए हैं जबकि 11 अभी वहां से निकलने की कोशिश कर रहे हैं। यूक्रेन से रविवार रात घर पहुंची सदर उपमंडल के गांव साई ब्राह्मणा निवासी आस्था शैल ने बताया कि सुरक्षित घर पहुंच गई हैं, उसके साथ जिले के श्रेयस पटियाल, प्रेरणा गौतम, आशीष शर्मा, अदिति ठाकुर भी घर लौटे हैं। भारत सरकार ने उनके आने का सारा खर्च उठाया है। बताया कि यूक्रेन में हालात खराब होते जा रहे हैं। खारकीव में अभी भी कई छात्र फंसे हुए हैं। उनके सामने खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया है। आस्था ने भारत सरकार का आभार प्रकट करते हुए अन्य छात्रों को जल्द वापस लाने की गुहार लगाई है।
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सात किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे रोमानिया बॉर्डर
घुमारवीं उपमंडल के दधोल गांव के आशीष शर्मा रविवार रात को यूक्रेन से घर पहुंच गए। एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन गए आशीष शर्मा ने बताया कि हालात ठीक नहीं हैं। हर पल डर के साये में रहने को मजबूर हो चुके थे। वहां दुकानें बंद हो चुकी थीं। खाने का सामान जो कमरे में रखा था उससे ही गुजारा किया। एटीएम बंद हो गए थे। पैसे भी नहीं थे। जल्द अपने देश आने की राह देख रहे थे। एबेंसी व कॉलेज की तरफ से एडवाइजरी जारी हुई थी कि अगर सायरन या हूटर सुनाई दे तो जल्द कमरों से बाहर निकल जाना। इसके अलावा अपने पासपोर्ट साथ रखने की हिदायत दी थी।
बताया कि रोमानिया देश का बॉर्डर उनके कॉलेज से करीब 35 किलोमीटर दूरी पर था। बॉर्डर पर जाम की स्थिति बनी हुई थी। 5 से 7 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा। सिर्फ कुछ किताबें व कपड़े ही घर लाया हूं। बाकी सामान वहीं पर छोड़ दिया है। अब पढ़ाई बीच में छूट गई।

हिमांशु राणा।- फोटो : BILASPUR