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शिक्षा के मंदिर में नहीं गुरु जी, कैसे जलेगी शिक्षा की लौ

Tue, 17 May 2022 11:27 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 17 May 2022 11:27 PM IST
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amarujala abhiyan education
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बरठीं (बिलासपुर)। शिक्षा के मंदिर में गुरु जी न हों तो शिक्षा की लौ कैसे जलेगी। शिक्षा खंड झंडूता के तहत राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बड़गांव में कला और शारीरिक अध्यापक नहीं हैं। दोनों पद करीब 10 साल से खाली हैं। प्रदेश सरकार ने कोई ध्यान नहीं दे रही है। अध्यापक न होने से बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों मांग कर रहे हैं कि इन पदों को जल्द भरा जाए।
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जिले के कई स्कूलों में एक ही शिक्षक है, तो कई स्कूल डेपुटेशन के सहारे चल रहे हैं। ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि सरकार और शिक्षा विभाग को इसकी कोई परवाह नहीं है। पढ़ाई न हो पाने से विद्यार्थी कोरे पन्ने की तरह घर लौट रहे हैं। शिक्षकों के पदों को भरने की 10 साल से कोई पहल नहीं की जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि कोरोना काल में स्कूल बंद रहने से पहले ही शिक्षा का स्तर गिर गया है। स्कूल दोबारा शुरू होने पर इसमें सुधार होने की उम्मीद जगी थी, लेकिन शिक्षक न होने से पढ़ाई का स्तर मजबूत होने के बजाय नीचे गिरता जा रहा है।
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अभिभावकों ने कहा है कि अगर सरकार अब भी स्कूलों में खाली चल रहे शिक्षकों के पदों को नहीं भरती है तो मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा।
उधर, प्रधानाचार्य केएस चंदेल ने बताया कि रिक्त चल रहे पदों के बारे में सरकार और शिक्षा विभाग को अवगत करवा दिया गया है। उन्होंने आशा जाहिर की कि जल्द ही शिक्षकों की तैनाती सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से कर दी जाएगी।
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