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Bilaspur News: शादी का झांसा देकर संबंध बनाने के मामले में आरोपी को जमानत
Fri, 17 Apr 2026 11:51 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
Updated Fri, 17 Apr 2026 11:51 PM IST
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अदालत से -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
बिलासपुर सत्र न्यायालय का फैसला, एक लाख के मुचलके पर रिहाई
अदालत ने कहा- मामला लंबित, ट्रायल में लगेगा समय
चार-पांच साल से संपर्क में थे दोनों, शादी से इनकार पर दर्ज हुई शिकायत
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सत्र न्यायालय बिलासपुर ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के आरोप में गिरफ्तार एक आरोपी को जमानत दे दी है। यह आदेश जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने पारित किया। मामले में आरोपी को 28 मार्च 2026 को महिला पुलिस थाना बिलासपुर में दर्ज शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद वह न्यायिक हिरासत में था।
आरोपी की ओर से दायर जमानत याचिका में कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है, वह निर्दोष है तथा जांच लगभग पूरी हो चुकी है। ऐसे में उसे जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है। अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि पीड़िता ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने विवाह का झांसा देकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए। बाद में शादी से इनकार कर दिया, जिसके बाद शिकायत दर्ज करवाई गई। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान पीड़िता और आरोपी दोनों का मेडिकल परीक्षण करवाया तथा साक्ष्य एकत्र कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे हैं, जिनकी रिपोर्ट अभी आनी शेष है। अदालत के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार, पीड़िता और आरोपी पिछले लगभग चार से पांच वर्षों से एक-दूसरे के संपर्क में थे और दोनों के बीच संबंध भी रहे। अदालत ने यह भी पाया कि शिकायत काफी समय बाद दर्ज करवाई गई, जब आरोपी ने विवाह से इनकार किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और चालान पेश होना बाकी है, जिससे ट्रायल में समय लग सकता है। साथ ही आरोपी स्थानीय निवासी है और उसके फरार होने की संभावना नहीं है।
अदालत ने यह भी कहा कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस आधार सामने नहीं आया जिससे यह लगे कि आरोपी साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेगा या गवाहों को प्रभावित करेगा। इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी को जमानत देने का निर्णय लिया। अदालत ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती पर उसे रिहा करने के आदेश दिए। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जमानत देते समय की गई टिप्पणियां केवल इस याचिका के निस्तारण तक सीमित हैं और मामले के अंतिम निर्णय पर उनका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा
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बिलासपुर सत्र न्यायालय का फैसला, एक लाख के मुचलके पर रिहाई
अदालत ने कहा- मामला लंबित, ट्रायल में लगेगा समय
चार-पांच साल से संपर्क में थे दोनों, शादी से इनकार पर दर्ज हुई शिकायत
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सत्र न्यायालय बिलासपुर ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के आरोप में गिरफ्तार एक आरोपी को जमानत दे दी है। यह आदेश जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने पारित किया। मामले में आरोपी को 28 मार्च 2026 को महिला पुलिस थाना बिलासपुर में दर्ज शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद वह न्यायिक हिरासत में था।
आरोपी की ओर से दायर जमानत याचिका में कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया है, वह निर्दोष है तथा जांच लगभग पूरी हो चुकी है। ऐसे में उसे जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है। अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि पीड़िता ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने विवाह का झांसा देकर कई बार शारीरिक संबंध बनाए। बाद में शादी से इनकार कर दिया, जिसके बाद शिकायत दर्ज करवाई गई। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान पीड़िता और आरोपी दोनों का मेडिकल परीक्षण करवाया तथा साक्ष्य एकत्र कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे हैं, जिनकी रिपोर्ट अभी आनी शेष है। अदालत के समक्ष प्रस्तुत रिकॉर्ड के अनुसार, पीड़िता और आरोपी पिछले लगभग चार से पांच वर्षों से एक-दूसरे के संपर्क में थे और दोनों के बीच संबंध भी रहे। अदालत ने यह भी पाया कि शिकायत काफी समय बाद दर्ज करवाई गई, जब आरोपी ने विवाह से इनकार किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और चालान पेश होना बाकी है, जिससे ट्रायल में समय लग सकता है। साथ ही आरोपी स्थानीय निवासी है और उसके फरार होने की संभावना नहीं है।
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अदालत ने यह भी कहा कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस आधार सामने नहीं आया जिससे यह लगे कि आरोपी साक्ष्यों से छेड़छाड़ करेगा या गवाहों को प्रभावित करेगा। इन सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी को जमानत देने का निर्णय लिया। अदालत ने एक लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती पर उसे रिहा करने के आदेश दिए। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जमानत देते समय की गई टिप्पणियां केवल इस याचिका के निस्तारण तक सीमित हैं और मामले के अंतिम निर्णय पर उनका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा
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