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एसडीएम ने दिए तहसीलदार को दिए भू-अधिग्रहण रिकॉर्ड जांच के आदेश
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बिलासपुर। एसडीएम श्री नयना देवी अनिल चौहान ने तहसीलदार नयना देवी को फोरलेन निर्माण में ग्रामीणों की जमीन के लिए हुए भू-अधिग्रहण मामले के रिकॉर्ड की जांच के आदेश जारी किए हैं। एसडीएम ने कहा है कि वह जांच की विस्तृत रिपोर्ट उन्हें व फोरलेन समिति को मुहैया करवाएं। करीब ढाई साल पहले प्रभावित ग्रामीणों ने भू अधिग्रहण प्रक्रिया के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। जिसके बाद अब यह कार्रवाई के आदेश एसडीएम श्री नयना देवी ने दिए हैं।
गौरतलब है कि श्री नयना देवी क्षेत्र के गारा, बघेरी, करमाला, कैंचीमोड़, मौड़ा, मेहला, थापना, नरली, ढढनाल जंगल, समलेटू, सुन्हण, क्यारियां जंगल, भटेड़, टाली, गंभर खड्ड, भुवांई, जब्बल सहित अन्य गांवों में फोरलेन निर्माण कंपनी ने भू-अधिग्रहण किया था। लेकिन वहां के ग्रामीणों ने इस पर आपत्ति जाहिर की थी कि भू-अधिग्रहण गलत तरीके से हुआ है। कंपनी ने अपनी मर्जी के अनुसार जमीन का चयन किया है। अपनी मर्जी के अनुसार कंपनी ने फोरलेन के रूट को ही बदल दिया। जिससे ग्रामीणों की जमीन नियमों को ताक में रखकर खरीदी गई। निशानदेही तक नहीं की गई। लोगों ने जो आवेदन कर रखे थे, कोई सेंटर लाइन नहीं लगाई गई। कोई बुर्जी नहीं लगी, जबकि रिकॉर्ड भी पढ़ने योग्य नहीं है। करूकान दर्ज नहीं है। इन सब अनियमितताओं को लेकर फोरलेन समिति ने एसडीएम से 2018 को सभी प्रमाणों के साथ शिकायत दर्ज करवाई थी। जिस पर एसडीएम ने समिति से प्रभावित मालिकों की शिकायत देने को कहा था, जिसकेे बाद समिति ने प्रमाण लगाकर शिकायतें दी थी, लेकिन उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। समिति ने आरटीआई के माध्यम से इसकी जानकारी मांगी, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। जब आरटीआई की अपील दायर की, उसके बाद आठ अप्रैल को इसकी जांच के आदेश तहसीलदार को दिए। समिति का कहना है कि उन आदेशों में भी कोई समय सीमा जारी नहीं की गई है।
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गौरतलब है कि श्री नयना देवी क्षेत्र के गारा, बघेरी, करमाला, कैंचीमोड़, मौड़ा, मेहला, थापना, नरली, ढढनाल जंगल, समलेटू, सुन्हण, क्यारियां जंगल, भटेड़, टाली, गंभर खड्ड, भुवांई, जब्बल सहित अन्य गांवों में फोरलेन निर्माण कंपनी ने भू-अधिग्रहण किया था। लेकिन वहां के ग्रामीणों ने इस पर आपत्ति जाहिर की थी कि भू-अधिग्रहण गलत तरीके से हुआ है। कंपनी ने अपनी मर्जी के अनुसार जमीन का चयन किया है। अपनी मर्जी के अनुसार कंपनी ने फोरलेन के रूट को ही बदल दिया। जिससे ग्रामीणों की जमीन नियमों को ताक में रखकर खरीदी गई। निशानदेही तक नहीं की गई। लोगों ने जो आवेदन कर रखे थे, कोई सेंटर लाइन नहीं लगाई गई। कोई बुर्जी नहीं लगी, जबकि रिकॉर्ड भी पढ़ने योग्य नहीं है। करूकान दर्ज नहीं है। इन सब अनियमितताओं को लेकर फोरलेन समिति ने एसडीएम से 2018 को सभी प्रमाणों के साथ शिकायत दर्ज करवाई थी। जिस पर एसडीएम ने समिति से प्रभावित मालिकों की शिकायत देने को कहा था, जिसकेे बाद समिति ने प्रमाण लगाकर शिकायतें दी थी, लेकिन उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। समिति ने आरटीआई के माध्यम से इसकी जानकारी मांगी, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। जब आरटीआई की अपील दायर की, उसके बाद आठ अप्रैल को इसकी जांच के आदेश तहसीलदार को दिए। समिति का कहना है कि उन आदेशों में भी कोई समय सीमा जारी नहीं की गई है।
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