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सरकारी दस्तावेज को बताया जा रहा है थर्ड पार्टी दस्तावेज
Updated Sun, 09 Sep 2018 12:11 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। लोक निर्माण विभाग पूर्व कर्मचारी से लाखों रुपये की रिकवरी तो सालों से नहीं कर पाया। जब इस मामले को लेकर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी की क्यों पूर्व कर्मचारी से सरकार के आदेशों के बाद भी रिकवरी नहीं की गई? और इसके लिए कौन अधिकारी जिम्मेवार है पूछा गया तो विभाग अब इसे थर्ड पार्टी सूचना बता कर मामले को दबाने में फिर जुट गया है। जबकि यह पूरी सूचना सरकारी दस्तावेज मुहैया करवाने की है। माना जा रहा है कि विभाग के अधिकारी अपनी खाल बचाने के लिए अब इस प्रकार के हथकंड़े अपना रहे हैं।
जानकारी के अनुसार लोक निर्माण विभाग के एक कर्मचारी का तबादला 1994 में रामपुर के डिविजन के लिए हुआ था लेकिन उक्त कर्मचारी वहां नहीं गया। इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने कई बार कर्मचारी को नोटिस भी जारी किए लेकिन कर्मचारी के ज्वाइन न करने पर उसे निलंबित कर दिया लेकिन इसी दौरान सरकार की ओर से एक पत्र आया जिसमें उसे बहाल कर दिया गया। इसके आधार पर कर्मचारी ने अपना चार सालों का वेतन निकलवा लिया लेकिन उस दौरान राज्य में ‘नो वर्क नो पे’ का कानून लागू था। इसके बाद सरकार ने सभी प्रकार की नियमों पर चर्चा कर और कानूनी राय लेकर 15.9.1999 को एक और पत्र जारी किया कि उस दौरान के नियम के अनुसार उक्त कर्मचारी को उस समय का वेतन नहीं मिल सकता था।
वहीं उक्त कर्मचारी मार्च 2013 से जून 2013 बिलासपुर अपने को कार्यालय में अपने स्तर पर ही बता दिया। जबकि एक्सईएन उस दौरान कर्मचारी को अनउपस्थित बताया था लेकिन उक्त कर्मचारी ने इन चार महीनों का वेतन भी मिली भगत से जारी करवा दिया था। इसके बाद पूरे मामले की जांच के बाद उक्त कर्मचारी पर राज्य सरकार ने 4,22,785 की रिकवरी करने को कहा है।
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इधर,लोक निर्माण विभाग के डिविजन नंबर दो के एक्सईएन आत्मा राम कालिया ने कहा कि इस सूचना के संबंध में राम सिंह से अनुमति लेना आवश्यक थी। इसके लिए विभाग ने राम सिंह को पत्र लिख कर पांच दिनों में जवाब मांगा है।
इनसेट....
वायु सेना से सेवानिवृत्त हुए परस राम और प्रार्थी मदन लाल शर्मा का कहना है कि लोनिवि जानबूझ कर सरकारी दस्तावेज को थर्ड पार्टी बनाने में लगा है। अगर इस मामले में सूचना नहीं दी गई तो वह अपील में जाएंगे क्योंकि रिकवरी करने के आदेश सरकार के थे। इसलिए यह थर्ड पार्टी सूचना में नहीं आती।
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बिलासपुर। लोक निर्माण विभाग पूर्व कर्मचारी से लाखों रुपये की रिकवरी तो सालों से नहीं कर पाया। जब इस मामले को लेकर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी की क्यों पूर्व कर्मचारी से सरकार के आदेशों के बाद भी रिकवरी नहीं की गई? और इसके लिए कौन अधिकारी जिम्मेवार है पूछा गया तो विभाग अब इसे थर्ड पार्टी सूचना बता कर मामले को दबाने में फिर जुट गया है। जबकि यह पूरी सूचना सरकारी दस्तावेज मुहैया करवाने की है। माना जा रहा है कि विभाग के अधिकारी अपनी खाल बचाने के लिए अब इस प्रकार के हथकंड़े अपना रहे हैं।
जानकारी के अनुसार लोक निर्माण विभाग के एक कर्मचारी का तबादला 1994 में रामपुर के डिविजन के लिए हुआ था लेकिन उक्त कर्मचारी वहां नहीं गया। इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने कई बार कर्मचारी को नोटिस भी जारी किए लेकिन कर्मचारी के ज्वाइन न करने पर उसे निलंबित कर दिया लेकिन इसी दौरान सरकार की ओर से एक पत्र आया जिसमें उसे बहाल कर दिया गया। इसके आधार पर कर्मचारी ने अपना चार सालों का वेतन निकलवा लिया लेकिन उस दौरान राज्य में ‘नो वर्क नो पे’ का कानून लागू था। इसके बाद सरकार ने सभी प्रकार की नियमों पर चर्चा कर और कानूनी राय लेकर 15.9.1999 को एक और पत्र जारी किया कि उस दौरान के नियम के अनुसार उक्त कर्मचारी को उस समय का वेतन नहीं मिल सकता था।
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वहीं उक्त कर्मचारी मार्च 2013 से जून 2013 बिलासपुर अपने को कार्यालय में अपने स्तर पर ही बता दिया। जबकि एक्सईएन उस दौरान कर्मचारी को अनउपस्थित बताया था लेकिन उक्त कर्मचारी ने इन चार महीनों का वेतन भी मिली भगत से जारी करवा दिया था। इसके बाद पूरे मामले की जांच के बाद उक्त कर्मचारी पर राज्य सरकार ने 4,22,785 की रिकवरी करने को कहा है।
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इधर,लोक निर्माण विभाग के डिविजन नंबर दो के एक्सईएन आत्मा राम कालिया ने कहा कि इस सूचना के संबंध में राम सिंह से अनुमति लेना आवश्यक थी। इसके लिए विभाग ने राम सिंह को पत्र लिख कर पांच दिनों में जवाब मांगा है।
इनसेट....
वायु सेना से सेवानिवृत्त हुए परस राम और प्रार्थी मदन लाल शर्मा का कहना है कि लोनिवि जानबूझ कर सरकारी दस्तावेज को थर्ड पार्टी बनाने में लगा है। अगर इस मामले में सूचना नहीं दी गई तो वह अपील में जाएंगे क्योंकि रिकवरी करने के आदेश सरकार के थे। इसलिए यह थर्ड पार्टी सूचना में नहीं आती।
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