{"_id":"597e149a4f1c1be92d8b45c4","slug":"191501435034-bilaspur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौत के साए में जीवन यापन करने को मजबूर गांव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौत के साए में जीवन यापन करने को मजबूर गांव
Updated Sun, 30 Jul 2017 10:47 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
बरमाणा(बिलासपुर)।
बिलासपुर और मंडी की सीमा पर स्थित पंचायत ध्वाल के गांव रोपा में कृत्रिम बारिश से अस्तित्व मिटने का खतरा मंडरा रहा है। साल में नौ महीने गांव में रोजाना घंटोें बारिश की तरह पानी बरसता है। वजह कोलबांध का स्पिलवे है जहां से पानी छूटते ही गांव पर पानी की फुहार सी होने लगती है। इस क्रम के जारी रहने से पूरे पहाड़ में सीलन रच गई है। ऐसे में पहाड़ दरकने का खतरा मंडरा रहा है। दो तरफा संकट झेल रहे गांव में पहाड़ के भरभराकर गिरने का खतरा तो है ही, घरों की दीवारों से भी पानी रिसने जैसे हालात हैं। और तो और ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय कृषि भी चौपट हो गई है।
गांव के लोगों का कहना है कि कोलबांध से साल के नौ महीने पानी छोड़ा जाता है। इससे गांव के मकानों में सीलन से दरारें आ चुकी हैं। लोग सामान्य जीवन नहीं जी सकते। पानी की भारी मात्रा के कारण गांव में धूप नहीं पहुंचती। फसलें भी खराब हो जाती हैं।
लोगों में बाबू राम, चेत राम, मोहन सिंह, यश पाल, बाबू ठाकुर, पूर्व प्रधान गणपत राम, कृपा राम, बोहरी देवी का कहना है कि पिछले तीन सालों से ग्रामीणों के लिए पानी सबसे बड़ी मुसीबत बना हुआ है। हर समय पहाड़ के गिरने का खतरा बना रहता है। लोगों ने बताया कि कई बार एनटीपीसी प्रबंधन और एसडीएम सुंदरनगर व उपायुक्त मंडी सहित मुख्यमंत्री को अवगत करवाया जा चुका है। लेकिन लोगों की सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे। प्रशासनिक अधिकारी कई बार मौके पर लोगों की शिकायत का जायजा लेने आए, मगर समस्या जस की तस है।
विज्ञापन
कोलबांध परियोजना के लोक संपर्क अधिकारी प्रवीण भारती ने बताया कि इस संबंध में प्रशासन के साथ कमेटी बनाई गई है। कमेटी सर्वे कर जो रिपोर्ट देगी उसी के आधार पर व्यवस्था की जाएगी।
विज्ञापन
बरमाणा(बिलासपुर)।
बिलासपुर और मंडी की सीमा पर स्थित पंचायत ध्वाल के गांव रोपा में कृत्रिम बारिश से अस्तित्व मिटने का खतरा मंडरा रहा है। साल में नौ महीने गांव में रोजाना घंटोें बारिश की तरह पानी बरसता है। वजह कोलबांध का स्पिलवे है जहां से पानी छूटते ही गांव पर पानी की फुहार सी होने लगती है। इस क्रम के जारी रहने से पूरे पहाड़ में सीलन रच गई है। ऐसे में पहाड़ दरकने का खतरा मंडरा रहा है। दो तरफा संकट झेल रहे गांव में पहाड़ के भरभराकर गिरने का खतरा तो है ही, घरों की दीवारों से भी पानी रिसने जैसे हालात हैं। और तो और ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय कृषि भी चौपट हो गई है।
गांव के लोगों का कहना है कि कोलबांध से साल के नौ महीने पानी छोड़ा जाता है। इससे गांव के मकानों में सीलन से दरारें आ चुकी हैं। लोग सामान्य जीवन नहीं जी सकते। पानी की भारी मात्रा के कारण गांव में धूप नहीं पहुंचती। फसलें भी खराब हो जाती हैं।
विज्ञापन
लोगों में बाबू राम, चेत राम, मोहन सिंह, यश पाल, बाबू ठाकुर, पूर्व प्रधान गणपत राम, कृपा राम, बोहरी देवी का कहना है कि पिछले तीन सालों से ग्रामीणों के लिए पानी सबसे बड़ी मुसीबत बना हुआ है। हर समय पहाड़ के गिरने का खतरा बना रहता है। लोगों ने बताया कि कई बार एनटीपीसी प्रबंधन और एसडीएम सुंदरनगर व उपायुक्त मंडी सहित मुख्यमंत्री को अवगत करवाया जा चुका है। लेकिन लोगों की सुरक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे। प्रशासनिक अधिकारी कई बार मौके पर लोगों की शिकायत का जायजा लेने आए, मगर समस्या जस की तस है।
विज्ञापन
कोलबांध परियोजना के लोक संपर्क अधिकारी प्रवीण भारती ने बताया कि इस संबंध में प्रशासन के साथ कमेटी बनाई गई है। कमेटी सर्वे कर जो रिपोर्ट देगी उसी के आधार पर व्यवस्था की जाएगी।