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Bilaspur News: चरस बरामदगी मामले में कैफे मैनेजर की नियमित जमानत याचिका खारिज
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अदालत ने माना सह आरोपी से हुए पांच बैंक लेनदेन प्रथम दृष्टया अहम
11 दिसंबर को वाहन से बरामद हुई थी 3.645 किलो चरस
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं थाना क्षेत्र में 3.645 किलोग्राम चरस बरामदगी के मामले में विशेष न्यायाधीश-द्वितीय बिलासपुर की अदालत ने आरोपी कुणाल रावत की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि बरामद चरस वाणिज्यिक मात्रा की है और आरोपी के बैंक खाते से सह आरोपी के खाते में बरामदगी से ठीक पहले हुए पांच लेनदेन प्रथम दृष्टया वित्तीय कड़ी स्थापित करते हैं। ऐसे में एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 में निर्धारित जमानत की अनिवार्य शर्तें पूरी नहीं होतीं।
मामला घुमारवीं थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार 11 दिसंबर 2025 को दोपहर करीब 12:50 बजे कुमझवाड़-घुलतार के पास पुलिस वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान पीबी नंबर की गाड़ी नाके पर नहीं रुकी। पुलिस ने उसका पीछा किया और जारलू के पास अमरी नाला पुल के समीप गाड़ी को रोक लिया। पुलिस के मुताबिक गाड़ी से एक व्यक्ति अनमोल सोनी भाग गया, जबकि अरशदीप सिंह, मनप्रीत और अमित कुमार को पकड़ लिया गया। चालक की सीट के पीछे रखे सफेद पॉलीथिन बैग से पांच पैकेट बरामद किए गए। मौके पर इनका वजन 3 किलो 650 ग्राम था। इन्वेंटरी प्रक्रिया के दौरान शुद्ध वजन 3 किलो 645 ग्राम पाया गया। जमानत याचिका में कुणाल रावत ने कहा कि वह निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है। उसका कहना था कि उसके पास से कोई नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ और न ही वह उस वाहन में मौजूद था, जिससे चरस बरामद हुई। उसने अदालत को बताया कि वह तोष स्थित वाइल्डफ्लावर कैफे में मैनेजर के रूप में काम करता था। कैफे में आने वाले कई पर्यटक उसके बैंक खाते के माध्यम से लेनदेन करते थे। इसी वजह से सह आरोपी मनप्रीत के साथ हुए बैंक लेनदेन को उसने सामान्य व्यावसायिक लेनदेन बताया। आरोपी ने यह भी कहा कि उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह स्थायी निवासी होने के साथ अदालत की सभी शर्तों का पालन करने को तैयार है। अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि जांच के दौरान कुणाल रावत और सह आरोपी मनप्रीत के बैंक खातों के बीच 9 और 10 दिसंबर 2025 को पांच लेनदेन सामने आए। इन सभी लेनदेन की कुल राशि 30,001 रुपये थी। अदालत के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया कि सह आरोपी कथित तौर पर 10 दिसंबर को तोष में चरस खरीदने गया था और अगले दिन 11 दिसंबर को चरस बरामद हुई। पुलिस ने कुणाल रावत को 24 मई 2026 को गिरफ्तार किया था। जांच पूरी होने के बाद चालान भी पेश किया जा चुका है।
अदालत ने माना कि कुणाल रावत के कब्जे से सीधे चरस बरामद नहीं हुई और वह बरामदगी वाले वाहन में भी मौजूद नहीं था। हालांकि, उस पर एनडीपीएस एक्ट की धारा 29 भी लगाई गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि षड्यंत्र या उकसावे का प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार होने पर आरोपी से प्रत्यक्ष बरामदगी होना आवश्यक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में आरोपी को केवल सह आरोपी के बयान के आधार पर नहीं जोड़ा गया है। बैंक रिकॉर्ड में सामने आए पांच लेनदेन स्वतंत्र प्रथम दृष्टया सामग्री हैं। ये लेनदेन कथित चरस खरीद और बरामदगी से ठीक पहले हुए थे। आरोपी ने कैफे में मैनेजर के तौर पर काम करने की बात कही है और रोजगार प्रमाणपत्र भी पेश किया गया है, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई विशेष बिल, बुकिंग रिकॉर्ड या अन्य दस्तावेज पेश नहीं किया गया, जिससे इन पांचों लेनदेन का वास्तविक व्यावसायिक उद्देश्य स्पष्ट हो सके। कोर्ट के अनुसार यह सवाल कि ये लेनदेन वास्तव में सामान्य व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े थे या कथित अपराध से, इसका अंतिम निर्धारण मुकदमे के दौरान साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा। अदालत ने यह भी माना कि कुणाल रावत की कोई आपराधिक हिस्ट्री नहीं है और वह स्थायी निवासी है, लेकिन ये परिस्थितियां धारा 37 की अनिवार्य शर्तों को दरकिनार करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी 24 मई 2026 से हिरासत में है और अभी उसकी हिरासत को अत्यधिक लंबी या मुकदमे में अनुचित देरी की स्थिति नहीं माना जा सकता। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए विशेष न्यायाधीश-द्वितीय नविश भारद्वाज ने कुणाल रावत की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निपटारे तक सीमित हैं और मामले के अंतिम गुण-दोष पर इनका कोई प्रभाव नहीं होगा।
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11 दिसंबर को वाहन से बरामद हुई थी 3.645 किलो चरस
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। घुमारवीं थाना क्षेत्र में 3.645 किलोग्राम चरस बरामदगी के मामले में विशेष न्यायाधीश-द्वितीय बिलासपुर की अदालत ने आरोपी कुणाल रावत की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि बरामद चरस वाणिज्यिक मात्रा की है और आरोपी के बैंक खाते से सह आरोपी के खाते में बरामदगी से ठीक पहले हुए पांच लेनदेन प्रथम दृष्टया वित्तीय कड़ी स्थापित करते हैं। ऐसे में एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 में निर्धारित जमानत की अनिवार्य शर्तें पूरी नहीं होतीं।
मामला घुमारवीं थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार 11 दिसंबर 2025 को दोपहर करीब 12:50 बजे कुमझवाड़-घुलतार के पास पुलिस वाहनों की जांच कर रही थी। इसी दौरान पीबी नंबर की गाड़ी नाके पर नहीं रुकी। पुलिस ने उसका पीछा किया और जारलू के पास अमरी नाला पुल के समीप गाड़ी को रोक लिया। पुलिस के मुताबिक गाड़ी से एक व्यक्ति अनमोल सोनी भाग गया, जबकि अरशदीप सिंह, मनप्रीत और अमित कुमार को पकड़ लिया गया। चालक की सीट के पीछे रखे सफेद पॉलीथिन बैग से पांच पैकेट बरामद किए गए। मौके पर इनका वजन 3 किलो 650 ग्राम था। इन्वेंटरी प्रक्रिया के दौरान शुद्ध वजन 3 किलो 645 ग्राम पाया गया। जमानत याचिका में कुणाल रावत ने कहा कि वह निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है। उसका कहना था कि उसके पास से कोई नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ और न ही वह उस वाहन में मौजूद था, जिससे चरस बरामद हुई। उसने अदालत को बताया कि वह तोष स्थित वाइल्डफ्लावर कैफे में मैनेजर के रूप में काम करता था। कैफे में आने वाले कई पर्यटक उसके बैंक खाते के माध्यम से लेनदेन करते थे। इसी वजह से सह आरोपी मनप्रीत के साथ हुए बैंक लेनदेन को उसने सामान्य व्यावसायिक लेनदेन बताया। आरोपी ने यह भी कहा कि उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह स्थायी निवासी होने के साथ अदालत की सभी शर्तों का पालन करने को तैयार है। अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि जांच के दौरान कुणाल रावत और सह आरोपी मनप्रीत के बैंक खातों के बीच 9 और 10 दिसंबर 2025 को पांच लेनदेन सामने आए। इन सभी लेनदेन की कुल राशि 30,001 रुपये थी। अदालत के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया कि सह आरोपी कथित तौर पर 10 दिसंबर को तोष में चरस खरीदने गया था और अगले दिन 11 दिसंबर को चरस बरामद हुई। पुलिस ने कुणाल रावत को 24 मई 2026 को गिरफ्तार किया था। जांच पूरी होने के बाद चालान भी पेश किया जा चुका है।
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अदालत ने माना कि कुणाल रावत के कब्जे से सीधे चरस बरामद नहीं हुई और वह बरामदगी वाले वाहन में भी मौजूद नहीं था। हालांकि, उस पर एनडीपीएस एक्ट की धारा 29 भी लगाई गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि षड्यंत्र या उकसावे का प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार होने पर आरोपी से प्रत्यक्ष बरामदगी होना आवश्यक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में आरोपी को केवल सह आरोपी के बयान के आधार पर नहीं जोड़ा गया है। बैंक रिकॉर्ड में सामने आए पांच लेनदेन स्वतंत्र प्रथम दृष्टया सामग्री हैं। ये लेनदेन कथित चरस खरीद और बरामदगी से ठीक पहले हुए थे। आरोपी ने कैफे में मैनेजर के तौर पर काम करने की बात कही है और रोजगार प्रमाणपत्र भी पेश किया गया है, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई विशेष बिल, बुकिंग रिकॉर्ड या अन्य दस्तावेज पेश नहीं किया गया, जिससे इन पांचों लेनदेन का वास्तविक व्यावसायिक उद्देश्य स्पष्ट हो सके। कोर्ट के अनुसार यह सवाल कि ये लेनदेन वास्तव में सामान्य व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े थे या कथित अपराध से, इसका अंतिम निर्धारण मुकदमे के दौरान साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा। अदालत ने यह भी माना कि कुणाल रावत की कोई आपराधिक हिस्ट्री नहीं है और वह स्थायी निवासी है, लेकिन ये परिस्थितियां धारा 37 की अनिवार्य शर्तों को दरकिनार करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी 24 मई 2026 से हिरासत में है और अभी उसकी हिरासत को अत्यधिक लंबी या मुकदमे में अनुचित देरी की स्थिति नहीं माना जा सकता। इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए विशेष न्यायाधीश-द्वितीय नविश भारद्वाज ने कुणाल रावत की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश में की गई टिप्पणियां केवल जमानत याचिका के निपटारे तक सीमित हैं और मामले के अंतिम गुण-दोष पर इनका कोई प्रभाव नहीं होगा।
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