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पंचायत घरों का नाम बदलने का किया विरोध
Updated Mon, 23 Jul 2018 08:16 PM IST
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पंचायत घरों का नाम बदलने का किया विरोध
बिलासपुर। जिला खेतीहर मजदूर कांग्रेस के अध्यक्ष रतन सिंह ठाकुर और राजीव गांधी पंचायती राज कांग्रेस की जिलाध्यक्षा रीता सहगल ने पंचायत घरों का नाम बदलकर सामुदायिक केंद्र रखने के प्रदेश सरकार के फैसले का कड़ा विरोध किया है। कहा कि सरकार यह बहाना लगा रही है कि विभिन्न सामुदायिक गतिविधियां पंचायत घरों से होती हैं और यहां ग्रामसभा, महिला मंडलों व युवक मंडलों की बैठकें होती हैं लेकिन यह बात गलत है। हर पंचायत महिला व युवा मंडलों के अपने-अपने कार्यालय अलग भवनों में चलते हैं व इनकी बैठकें पंचायत घरों में नहीं होती। पंचायतों के अस्तित्व पर प्रदेश सरकार ने यह एक बड़ा कुठाराघात किया है। रतन सिंह ने कहा कि संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप पंचायतें न्यायालय की सीमित शक्तियां भी रखती हैं। पंचायतें न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ विकास कार्यों के वित्तीय प्रबंधन को भी देखती हैं। इससे पंचायतों के कार्यों पर भी उल्टा असर पड़ेगा।
वहीं रीता सहगल सहित पंचायतीराज कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुर्जन सिंह, महासचिव लेखराम शर्मा, मल्यावर पंचायत प्रधान मधुपाल ने कहा कि पंचायत घर राज्य व राष्ट्र स्तर की योजनाओं को धरातल पर मूर्त रूप देने की सबसे छोटी लेकिन प्रभावी इकाई के रूप में कार्य करते हैं। इन सभी ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की कि पंचायत घरों को सामुदायिक केंद्रों में बदलने की अधिसूचना को रद्द किया जाए।
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बिलासपुर। जिला खेतीहर मजदूर कांग्रेस के अध्यक्ष रतन सिंह ठाकुर और राजीव गांधी पंचायती राज कांग्रेस की जिलाध्यक्षा रीता सहगल ने पंचायत घरों का नाम बदलकर सामुदायिक केंद्र रखने के प्रदेश सरकार के फैसले का कड़ा विरोध किया है। कहा कि सरकार यह बहाना लगा रही है कि विभिन्न सामुदायिक गतिविधियां पंचायत घरों से होती हैं और यहां ग्रामसभा, महिला मंडलों व युवक मंडलों की बैठकें होती हैं लेकिन यह बात गलत है। हर पंचायत महिला व युवा मंडलों के अपने-अपने कार्यालय अलग भवनों में चलते हैं व इनकी बैठकें पंचायत घरों में नहीं होती। पंचायतों के अस्तित्व पर प्रदेश सरकार ने यह एक बड़ा कुठाराघात किया है। रतन सिंह ने कहा कि संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप पंचायतें न्यायालय की सीमित शक्तियां भी रखती हैं। पंचायतें न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ विकास कार्यों के वित्तीय प्रबंधन को भी देखती हैं। इससे पंचायतों के कार्यों पर भी उल्टा असर पड़ेगा।
वहीं रीता सहगल सहित पंचायतीराज कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुर्जन सिंह, महासचिव लेखराम शर्मा, मल्यावर पंचायत प्रधान मधुपाल ने कहा कि पंचायत घर राज्य व राष्ट्र स्तर की योजनाओं को धरातल पर मूर्त रूप देने की सबसे छोटी लेकिन प्रभावी इकाई के रूप में कार्य करते हैं। इन सभी ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की कि पंचायत घरों को सामुदायिक केंद्रों में बदलने की अधिसूचना को रद्द किया जाए।
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