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पूर्व सैनिक के साथ मारपीट का मामला नहीं हो रहा शांत
Updated Sun, 28 Oct 2018 10:49 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। बिलासपुर न्यायिक परिसर में अधिवक्ताओं और एक आरटीआई एक्टीविस्ट तथा पूर्व सैनिक मदनलाल शर्मा के साथ हुआ मारपीट का मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। कोर्ट परिसर के बाद यह मामला पुलिस के पास पहुंचा जहां पर मामले की प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और छानबीन जारी है।
रविवार को शिकायतकर्ता मदन लाल शर्मा ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि जो अधिवक्ता कानून के तहत पीड़ितों को न्याय दिलाने में मदद करते हैं, यदि यही लोग न्यायालय परिसर में लोगों के साथ मारपीट करने लग जाएं तो इस वर्ग से न्याय की आशा करना व्यर्थ है। मदनलाल शर्मा ने आरोप लगाया कि वे न्याय दिलाने वाले अधिवक्ता गैर कानूनी कार्यों में संलिप्त हो और पीड़ितों की मदद करने की बजाए उन्हें पीटना शुरू कर दें तो किस के पास गुहार लगाई जाए।
न्याय के मंदिर में इन अधिवक्ताओं ने उस पर इसलिए हमला किया क्योंकि वह इन्हीं के कारनामों को उजागर करने जा रहा था। उन्होंने कहा कि सरकार को चुना लगाने वाले कृत्यों को जब आरटीआई के माध्यम से उजागर करना चाहा तो इन अधिवक्ताओं ने उनके साथ कोर्ट परिसर में मारपीट की। कानून की आड़ में उल्टे सीधे काम करवाकर अपना उल्लु सीधा करने वाले इस वर्ग को कोई अधिकार नहीं है कि वे गलत कार्यों को कानून की आड़ में करें क्योंकि संविधान में सभी को बराबर के अधिकार मिले हैं।
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न्याय के मंदिर में वकीलों द्वारा शिकायतकर्ता से मारपीट करना सरेआम गुंडागर्दी है। इसके बारे में बार काउंसिल ऑफ इंडिया, उच्च न्यायालय शिमला तथा विधि मंत्रालय को तथ्यों सहित दस्तावेज प्रेषित किए जाएंगे ताकि न्याय मिल सके।
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बिलासपुर। बिलासपुर न्यायिक परिसर में अधिवक्ताओं और एक आरटीआई एक्टीविस्ट तथा पूर्व सैनिक मदनलाल शर्मा के साथ हुआ मारपीट का मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। कोर्ट परिसर के बाद यह मामला पुलिस के पास पहुंचा जहां पर मामले की प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है और छानबीन जारी है।
रविवार को शिकायतकर्ता मदन लाल शर्मा ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि जो अधिवक्ता कानून के तहत पीड़ितों को न्याय दिलाने में मदद करते हैं, यदि यही लोग न्यायालय परिसर में लोगों के साथ मारपीट करने लग जाएं तो इस वर्ग से न्याय की आशा करना व्यर्थ है। मदनलाल शर्मा ने आरोप लगाया कि वे न्याय दिलाने वाले अधिवक्ता गैर कानूनी कार्यों में संलिप्त हो और पीड़ितों की मदद करने की बजाए उन्हें पीटना शुरू कर दें तो किस के पास गुहार लगाई जाए।
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न्याय के मंदिर में इन अधिवक्ताओं ने उस पर इसलिए हमला किया क्योंकि वह इन्हीं के कारनामों को उजागर करने जा रहा था। उन्होंने कहा कि सरकार को चुना लगाने वाले कृत्यों को जब आरटीआई के माध्यम से उजागर करना चाहा तो इन अधिवक्ताओं ने उनके साथ कोर्ट परिसर में मारपीट की। कानून की आड़ में उल्टे सीधे काम करवाकर अपना उल्लु सीधा करने वाले इस वर्ग को कोई अधिकार नहीं है कि वे गलत कार्यों को कानून की आड़ में करें क्योंकि संविधान में सभी को बराबर के अधिकार मिले हैं।
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न्याय के मंदिर में वकीलों द्वारा शिकायतकर्ता से मारपीट करना सरेआम गुंडागर्दी है। इसके बारे में बार काउंसिल ऑफ इंडिया, उच्च न्यायालय शिमला तथा विधि मंत्रालय को तथ्यों सहित दस्तावेज प्रेषित किए जाएंगे ताकि न्याय मिल सके।