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पहले खेतों को किया बर्बाद, अब रसोई से उठा लेते है रोटी
Updated Sat, 18 Nov 2017 10:37 PM IST
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monkey shimla
- फोटो : demo pic
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सुभाष कपिल
झंडूता(बिलासपुर)।
बिलासपुर जिला के झंडूता उप मंडल में दर्जन भर पंचायतों के सैकड़ों किसानों ने बंदरों के आतंक के कारण खेती करना छोड़ दी है। जो बचे हैं वे भी खेती से तौबा कर रहे हैं। अब तो आलम इस कदर चिंताजनक हैं कि फसलों चौपट करने के बाद बंदर घर की रसोई में घुसकर सामान उठा ले जा रहे हैं। लोगों को जान का भी खतरा भी बना हुआ हैं। क्योंकि बंदर अब लोगों और बच्चों पर भी हमला कर रहे हैं। कई बार बंदर रसोई घर में पहुंच कर भी लोगों को झपट चुके हैं। ऐसे में लोग खेतों में अकेले जाने से भी परहेज करने लगे हैं। क्षेत्र में कई लोग बंदरों के हमले से घायल भी हो चुके हैं।
इस समय झंडूता विधा सभा क्षेत्र के तहत ग्राम पंचायत बलघाड़, समोह, भड़ोलिकलां, बडग़ांव, सुंहानी, मलांगन, कलोल, जेजवीं, धनिपखर, घड़ीर, सलवाड आदि पंचायतों में खेती प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा ठप्पर, अमरोवा, धराड़, प्राहु, बलघाड़, कल्लर, समोह, मरोतन, फुफली चुलाना, बल्ह चलोग, धवाडपर सहित अन्य गांवों में बंदरों का सबसे ज्यादा आतंक है।
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घर में सुरक्षित नहीं रहे लोग
क्षेत्र के लोगाें का कहना है कि वे घर के भीतर भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते। श्याम सिंह परमार, मनसा राम, जगत राम, सुरेंद्र, नंद लाल, राम लाल, अमर सिंह, करतार सिंह, रमेश, प्रकाश चंद, ओंकार सिंह, बुद्धि सिंह समेत अन्य कई ग्रामीणों ने कहा कि बंदरों ने पहले फसलों को बर्बाद कर दिया। लेकिन अब घरों से रोटियां भी उठा कर ले जा रहे हैं। इसके अलावा बंदर लोगों पर हमला करने से भी नहीं डरते हैं। लोगों ने वन विभाग से बंदरों से निजात की मांग की है।
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हालात चिंताजनक, चलाएंगे अभियान : रमेश
वन विभाग कलोल के वन परिक्षेत्र अधिकारी रमेश चंद के अनुसार क्षेत्र में बंदरों की समस्या चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। विभाग ने बंदरों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया है। इससे पहले भी कई जगहों से बंदर पकड़े हैं। बंदरों को दोबारा पकड़ने के लिए एक सप्ताह के भीतर अभियान चलाया जाएगा।
झंडूता(बिलासपुर)।
बिलासपुर जिला के झंडूता उप मंडल में दर्जन भर पंचायतों के सैकड़ों किसानों ने बंदरों के आतंक के कारण खेती करना छोड़ दी है। जो बचे हैं वे भी खेती से तौबा कर रहे हैं। अब तो आलम इस कदर चिंताजनक हैं कि फसलों चौपट करने के बाद बंदर घर की रसोई में घुसकर सामान उठा ले जा रहे हैं। लोगों को जान का भी खतरा भी बना हुआ हैं। क्योंकि बंदर अब लोगों और बच्चों पर भी हमला कर रहे हैं। कई बार बंदर रसोई घर में पहुंच कर भी लोगों को झपट चुके हैं। ऐसे में लोग खेतों में अकेले जाने से भी परहेज करने लगे हैं। क्षेत्र में कई लोग बंदरों के हमले से घायल भी हो चुके हैं।
इस समय झंडूता विधा सभा क्षेत्र के तहत ग्राम पंचायत बलघाड़, समोह, भड़ोलिकलां, बडग़ांव, सुंहानी, मलांगन, कलोल, जेजवीं, धनिपखर, घड़ीर, सलवाड आदि पंचायतों में खेती प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा ठप्पर, अमरोवा, धराड़, प्राहु, बलघाड़, कल्लर, समोह, मरोतन, फुफली चुलाना, बल्ह चलोग, धवाडपर सहित अन्य गांवों में बंदरों का सबसे ज्यादा आतंक है।
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घर में सुरक्षित नहीं रहे लोग
क्षेत्र के लोगाें का कहना है कि वे घर के भीतर भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते। श्याम सिंह परमार, मनसा राम, जगत राम, सुरेंद्र, नंद लाल, राम लाल, अमर सिंह, करतार सिंह, रमेश, प्रकाश चंद, ओंकार सिंह, बुद्धि सिंह समेत अन्य कई ग्रामीणों ने कहा कि बंदरों ने पहले फसलों को बर्बाद कर दिया। लेकिन अब घरों से रोटियां भी उठा कर ले जा रहे हैं। इसके अलावा बंदर लोगों पर हमला करने से भी नहीं डरते हैं। लोगों ने वन विभाग से बंदरों से निजात की मांग की है।
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हालात चिंताजनक, चलाएंगे अभियान : रमेश
वन विभाग कलोल के वन परिक्षेत्र अधिकारी रमेश चंद के अनुसार क्षेत्र में बंदरों की समस्या चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। विभाग ने बंदरों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया है। इससे पहले भी कई जगहों से बंदर पकड़े हैं। बंदरों को दोबारा पकड़ने के लिए एक सप्ताह के भीतर अभियान चलाया जाएगा।