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Bilaspur News: बंदला धार में बढ़ा पैराग्लाइडिंग का रोमांच, एसआईवी कोर्स के लिए चार स्कूलों ने की बुकिंग
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बंदला पैराग्लाइिंग साइट। फाइल फोटो
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पांच सितंबर के बाद शुरू होगा प्रशिक्षण, देश-विदेश से पहुंचेंगे प्रशिक्षु
स्थानीय कारोबार को भी मिलेगा बढ़ावा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। प्रसिद्ध बंदला धार पैराग्लाइडिंग साइट पर इस वर्ष एसआईवी कोर्स को लेकर उत्साह बढ़ता जा रहा है। करीब तीन सप्ताह पहले जहां दो पैराग्लाइडिंग स्कूलों ने प्रशिक्षण के लिए बुकिंग कराई थी, वहीं अब यह संख्या बढ़कर चार हो गई है। इससे साफ है कि बंदला धार की पहचान देश के प्रमुख एक्रो पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण स्थलों में लगातार मजबूत हो रही है।
मानसून सीजन के चलते प्रदेश में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक साहसिक पर्यटन गतिविधियों पर रोक रहती है। इसके बाद मौसम अनुकूल होने पर पैराग्लाइडिंग गतिविधियां शुरू होती हैं और सितंबर से बंदला धार में एसआईवी कोर्स आयोजित किए जाते हैं। यहां की भौगोलिक परिस्थितियों के साथ गोबिंद सागर झील का विशाल जल क्षेत्र प्रशिक्षुओं को उड़ान के दौरान विभिन्न आपात परिस्थितियों का अभ्यास करने के लिए उपयुक्त वातावरण उपलब्ध कराता है। पर्यटन गतिविधियों से जुड़े लोगों के अनुसार अब तक पीजी गुरुकुल, टेंपल पायलट, द पायलट च्वाइस और देवा स्कूल ने एसआईवी प्रशिक्षण के लिए बुकिंग कराई है। आगामी दिनों में अन्य स्कूलों के भी प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। प्रशिक्षण के लिए देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशों से भी पायलट और प्रशिक्षु बंदला पहुंचते हैं। करीब दो माह तक चलने वाली इन गतिविधियों से क्षेत्र में चहल-पहल बढ़ जाती है।
एसआईवी कोर्स का सीधा लाभ बंदला और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी मिलता है। बाहर से आने वाले प्रशिक्षु और प्रशिक्षक होम स्टे, होटल, टैक्सी और अन्य स्थानीय सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और कारोबार के अवसर मिलते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बंदला धार में पैराग्लाइडिंग ने क्षेत्र को साहसिक पर्यटन के नक्शे पर अलग पहचान दिलाई है। चार स्कूलों की बुकिंग के बाद इस बार प्रशिक्षण सीजन में कारोबार बढ़ने की उम्मीद है।
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स्थानीय कारोबार को भी मिलेगा बढ़ावा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। प्रसिद्ध बंदला धार पैराग्लाइडिंग साइट पर इस वर्ष एसआईवी कोर्स को लेकर उत्साह बढ़ता जा रहा है। करीब तीन सप्ताह पहले जहां दो पैराग्लाइडिंग स्कूलों ने प्रशिक्षण के लिए बुकिंग कराई थी, वहीं अब यह संख्या बढ़कर चार हो गई है। इससे साफ है कि बंदला धार की पहचान देश के प्रमुख एक्रो पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण स्थलों में लगातार मजबूत हो रही है।
मानसून सीजन के चलते प्रदेश में 15 जुलाई से 15 सितंबर तक साहसिक पर्यटन गतिविधियों पर रोक रहती है। इसके बाद मौसम अनुकूल होने पर पैराग्लाइडिंग गतिविधियां शुरू होती हैं और सितंबर से बंदला धार में एसआईवी कोर्स आयोजित किए जाते हैं। यहां की भौगोलिक परिस्थितियों के साथ गोबिंद सागर झील का विशाल जल क्षेत्र प्रशिक्षुओं को उड़ान के दौरान विभिन्न आपात परिस्थितियों का अभ्यास करने के लिए उपयुक्त वातावरण उपलब्ध कराता है। पर्यटन गतिविधियों से जुड़े लोगों के अनुसार अब तक पीजी गुरुकुल, टेंपल पायलट, द पायलट च्वाइस और देवा स्कूल ने एसआईवी प्रशिक्षण के लिए बुकिंग कराई है। आगामी दिनों में अन्य स्कूलों के भी प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। प्रशिक्षण के लिए देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशों से भी पायलट और प्रशिक्षु बंदला पहुंचते हैं। करीब दो माह तक चलने वाली इन गतिविधियों से क्षेत्र में चहल-पहल बढ़ जाती है।
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एसआईवी कोर्स का सीधा लाभ बंदला और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी मिलता है। बाहर से आने वाले प्रशिक्षु और प्रशिक्षक होम स्टे, होटल, टैक्सी और अन्य स्थानीय सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और कारोबार के अवसर मिलते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बंदला धार में पैराग्लाइडिंग ने क्षेत्र को साहसिक पर्यटन के नक्शे पर अलग पहचान दिलाई है। चार स्कूलों की बुकिंग के बाद इस बार प्रशिक्षण सीजन में कारोबार बढ़ने की उम्मीद है।
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