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सेब की विदेशी किस्मों से फायर ब्लाइट बैक्टीरिया का खतरा
अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 08 Dec 2013 02:44 PM IST
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बागवानों में सेब की अत्याधुनिक विदेशी किस्मों के आयात की होड़ से खतरनाक फायर ब्लाइट और कॉडलिंग मॉथ के हिमाचल पहुंचने का खतरा मंडराने लगा है।
अगर ये दोनों रोग सेब उत्पादक क्षेत्रों में पहुंच गए तो इनके प्रकोप से अरबों रुपये की एप्पल इंडस्ट्री तबाह हो सकती है। स्वयं डा. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के कुलपति डा. विजय सिंह ठाकुर ने इस खतरे से सरकार को आगाह किया है।
उनके अनुसार ये दोनों ही खतरनाक रोग अमेरिका, यूरोप के देशों सहित दुनिया भर में हैं। हिमाचल सहित भारत के अन्य प्रांत इन रोगों से अब तक मुक्त हैं। फायर ब्लाइट बगीचों में आग की तरह फैलने वाला बैक्टीरिया है।
यह कली, फूलों से लेकर पौधों के अन्य हिस्सों पर हमला करता है और तीव्रता से सेब की फसल बर्बाद कर देता है। कॉडलिंग मॉथ सुंडी की तरह होता है।
इसका लारवा सेब के फलों को वैसे बींधता है, जैसे आरपार कील गाड़ दी हो। इन दोनों से निपटने में दुनिया के विकसित देशों के भी हाथ खड़े हैं।
नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति डा. विजय सिंह ठाकुर ने बताया है कि यह मामला वह सरकार के ध्यान में ला चुके हैं। इस गैर कानूनी आयात को तुरंत रोकने की जरूरत है।
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उन्होंने माना कि कुछ बागवान बिना प्रोसीजर अपना विदेशों से पौधों की बड वुड और पौधे तक ला रहे हैं। आयात के एक साल तक विशेषज्ञों की ऑब्जर्वेशन में इन्हें रखना जरूरी होता है। वे ऐसा नहीं कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय ने तो क्वारेंटाइन प्रक्रिया को अलग से विशेषज्ञों का प्रकोष्ठ तक बनाया है। इस प्रक्रिया को राज्य बागवानी विभाग भी अपना रहा है। अगर एक बार ये दोनों रोग यहां आ गए तो इन्हें रोकना मुश्किल हो जाएगा।
दो लाख पौधे कानूनी, बाकी गैर कानूनी आए
वर्ष 1989 से लेकर अब तक कानूनी तरीके से लगभग दो लाख पौधे अकेला राज्य बागवानी विभाग ही आयात कर चुका है।
विभाग के निदेशक डा. गुरदेव सिंह का कहना है कि इनका ठीक से परीक्षण करने के बाद ही बागवानों को दिया गया। बगैर वैधानिक प्रक्रिया को अपनाए कितने पौधे आए, इसकी विभाग के पास भी जानकारी नहीं है।
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अगर ये दोनों रोग सेब उत्पादक क्षेत्रों में पहुंच गए तो इनके प्रकोप से अरबों रुपये की एप्पल इंडस्ट्री तबाह हो सकती है। स्वयं डा. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के कुलपति डा. विजय सिंह ठाकुर ने इस खतरे से सरकार को आगाह किया है।
उनके अनुसार ये दोनों ही खतरनाक रोग अमेरिका, यूरोप के देशों सहित दुनिया भर में हैं। हिमाचल सहित भारत के अन्य प्रांत इन रोगों से अब तक मुक्त हैं। फायर ब्लाइट बगीचों में आग की तरह फैलने वाला बैक्टीरिया है।
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यह कली, फूलों से लेकर पौधों के अन्य हिस्सों पर हमला करता है और तीव्रता से सेब की फसल बर्बाद कर देता है। कॉडलिंग मॉथ सुंडी की तरह होता है।
इसका लारवा सेब के फलों को वैसे बींधता है, जैसे आरपार कील गाड़ दी हो। इन दोनों से निपटने में दुनिया के विकसित देशों के भी हाथ खड़े हैं।
नौणी विश्वविद्यालय के कुलपति डा. विजय सिंह ठाकुर ने बताया है कि यह मामला वह सरकार के ध्यान में ला चुके हैं। इस गैर कानूनी आयात को तुरंत रोकने की जरूरत है।
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उन्होंने माना कि कुछ बागवान बिना प्रोसीजर अपना विदेशों से पौधों की बड वुड और पौधे तक ला रहे हैं। आयात के एक साल तक विशेषज्ञों की ऑब्जर्वेशन में इन्हें रखना जरूरी होता है। वे ऐसा नहीं कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय ने तो क्वारेंटाइन प्रक्रिया को अलग से विशेषज्ञों का प्रकोष्ठ तक बनाया है। इस प्रक्रिया को राज्य बागवानी विभाग भी अपना रहा है। अगर एक बार ये दोनों रोग यहां आ गए तो इन्हें रोकना मुश्किल हो जाएगा।
दो लाख पौधे कानूनी, बाकी गैर कानूनी आए
वर्ष 1989 से लेकर अब तक कानूनी तरीके से लगभग दो लाख पौधे अकेला राज्य बागवानी विभाग ही आयात कर चुका है।
विभाग के निदेशक डा. गुरदेव सिंह का कहना है कि इनका ठीक से परीक्षण करने के बाद ही बागवानों को दिया गया। बगैर वैधानिक प्रक्रिया को अपनाए कितने पौधे आए, इसकी विभाग के पास भी जानकारी नहीं है।