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Yamuna Nagar News: जब स्टाफ ही नहीं, कैसे हारेगा डेंगू

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 27 Aug 2023 01:49 AM IST
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When there is no staff, how will dengue be defeated
डेंगू को कंट्रोल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग स्टाफ से जूझ रहा है। विभाग के पास डेंगू से निपटने के लिए स्टाफ तक नहीं है। मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर (एमपीएचडब्ल्यू) से लेकर फील्ड वर्कर तक के 70 प्रतिशत से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। डेंगू की दवा का छिड़काव करने के लिए जिला मलेरिया विभाग के पास केवल एक फील्ड वर्कर है। जिले में शनिवार तक डेंगू के 118 केस मिल चुके हैं। शनिवार को डेंगू के पांच नए केस मिले हैं। जबकि चार नए केस मिलने से चिकनगुनिया की संख्या भी 59 पर पहुंच गई है। पिछले साल डेंगू के कुल 932 केस मिले थे। इस डेंगू की रफ्तार पहले से कुछ ज्यादा है।
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जिले में एमपीएचडब्ल्यू के कुल 123 पद स्वीकृत हैं, लेकिन कार्यरत केवल 25 ही हैं। इनमें से भी दो-चार ऐसे हैं जो अन्य कार्यों में लगे हुए हैं। बताया जा रहा है कि एमपीएचडब्ल्यू का जो स्टाफ भर्ती होकर आया था उसमें ज्यादातर रोहतक, जींद व अन्य जिलों से थे। धीरे-धीरे ज्यादातर स्टाफ अपनी ट्रांसफर करवा गृह जिलों में लौट गया। ऐसी ट्रांसफर हुई कि एमपीएचडब्ल्यू का कोटा धीरे-धीरे खाली सा हो गया। इनकी जगह कोई दूसरा स्टाफ नहीं आया। एमपीएचडब्ल्यू की सुपरविजन के लिए मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर लगाए जाते हैं। सुपरवाइजन के 26 पद स्वीकृत हैं, लेकिन काम केवल पांच कर रहे हैं। इनमें से भी एक कर्मचारी ने डेपोटेशन पर है, जिसे अभी तक रिलीव नहीं किया गया। यदि रिलीव करते हैं तो इनकी संख्या भी चार ही रह जाएगी।
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पहले घर-घर जाकर स्वास्थ्य विभाग कर्मचारियों द्वारा दवा का स्प्रे कराया जाता था। इन कर्मचारियों की टीम को स्प्रे गैंग कहते हैं। इस साल अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने स्प्रे गैंग रखने की अनुमति नहीं मिली है। इस गैंग में पांच कर्मचारी एक सुपरवाइजर होता है। डेंगू प्रभावित एरिया में फॉगिंग करने के लिए जिला मलेरिया विभाग में फील्ड वर्कर के 20 पद स्वीकृत हैं। इनमें से केवल एक ही वर्कर कार्यरत है। एक कर्मचारी के लिए घर-घर जाकर फॉगिंग करना संभव नहीं है। यह कर्मचारी भी रिटायरमेंट के नजदीक है।
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स्वास्थ्य विभाग का आधा काम आशा वर्कर पूरा कर देती थी। आशा वर्कर घर-घर जाकर लोगों के रक्त का सैंपल लेकर स्लाइड तैयार करती थी एक स्लाइड के बदले मलेरिया विभाग आशा वर्कर को 15 रुपये का भुगतान करता है। 19 दिनों से आशा वर्कर अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। जिससे न केवल रक्त के सैंपल लेने बल्कि अन्य कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। जिले में करीब 950 आशा वर्कर कार्यरत हैं।


जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सुशीला सैनी ने बताया कि स्टाफ की कमी के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया हुआ है। 40 ब्रीडिंग चेकर घराें में लारवा की जांच के लिए रखे हैं। डेंगू की रोकथाम के लिए फॉगिंग कराई जा रही है।
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