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Yamuna Nagar News: जब देवी भवन मंदिर में अंग्रेजों ने टेक दिए थे घुटने

Fri, 12 Apr 2024 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Fri, 12 Apr 2024 01:22 AM IST
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When the British kneeled down in the Devi Bhawan temple
संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। देवी भवन मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। नवरात्र में यहां देशभर से श्रद्धालु मन्नतें लेकर आते हैं। मान्यता है कि 200 साल से भी अधिक पुराने मनसा देवी मंदिर में आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। यही नहीं सन-1800 में जब देश में अंग्रेज अपने शासन का विस्तार करने में जुटे थे तो सार्वजनिक व धार्मिक स्थलों को भी नियंत्रण में ले रहे थे।
इस दौरान वे जगाधरी के देवी भवन मंदिर भी पहुंचे थे। यहां मंदिर से पहले एक सराय थी, जिस पर अंग्रेज कब्जा करने के उद्देश्य से आए थे, परंतु जब वे देवी भवन के अंदर पहुंचे तो उनके कदम ठहर गए। मंदिर की भव्यता, सुंदरता व लोगों की आस्था देख उन्होंने घुटने टेक दिए। फिर उन्होंने मंदिर पर कब्जा करने का प्रयास नहीं किया।
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मंदिर सेवादारों सहित जगाधरी के बुजुर्गों की मानें तो शहर के बीच बने प्राचीन देवी भवन मंदिर का निर्माण कार्य सन 1797 में शुरू हुआ था, जो छह साल में पूरा हुआ। सन् 1803 में मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने पर यहां मां मनसा देवी की प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा की गई। आज मंदिर की भव्यता व मान्यता दूर-दराज तक विख्यात है। प्राचीन मंदिर होने के कारण शहर के बाजार को भी इसी नाम से जाना जाता है। सन् 1797 से पहले बूड़िया रियासत के समय यहां पर एक सराय हुआ करती थी। यहां बने कमरों में यात्री व देर रात आने वाले लोग शरण लेते थे।
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फिलहाल मंदिर में पुजारी के परिवार की सातवीं पीढ़ी सेवा कर रही है। मौजूदा समय में पंडित अतुल शास्त्री मंदिर में नियमित रूप से पूजन व अन्य सेवा कार्य कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि शारदीय व चैत्र नवरात्र में देश के विभिन्न हिस्सों से मंदिर में श्रद्धालु आते हैं। इसलिए नवरात्र से पूर्व ही मंदिर को फूलों व रंग बिरंगी लाइटों से सजाया जाता है।

पहले नवरात्र से ही सुबह-शाम विशेष आरती होती है। आरती सहित अन्य समय में श्रद्धालु देवी मां के दर्शनों व पूजन के लिए पहुंचते हैं। अष्टमी पर यहां वर्षों से मेला लगता आ रहा है, जिसमें मंदिर के बाहर पूरे बाजार को भी सजाया जाता है। पूजन सामग्री से लेकर बच्चों के खिलौनों की रेहड़ियां-फड़ियां लगती हैं। पूरे दिन मंदिर में श्रद्धालु देवी मां के दर्शनों के साथ देवी स्वरूप कन्याओं को भोजन कराते व उनका आशीर्वाद लेते हैं। कई विदेशी भी इस अवसर पर मंदिर में देवी मां के दर्शनों व कन्या पूजन के लिए पहुंचते हैं।
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