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Yamuna Nagar News: डिपो पर गेहूं की आपूर्ति कम, बाजरा बेचकर आटा ला रहे लोग
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यमुनानगर। जिले के राशन डिपो पर सरकार की तरफ से इस बार 30 प्रतिशत गेहूं कम भेजा गया। जिस कारण हजारों लोग गेहूं से वंचित रह गए। अब गेहूं के बदले डिपो पर लोगों को खाने के लिए बाजरा दिया जा रहा है। परंतु बाजरा लोगों को रास नहीं आ रहा। इसलिए इसे बाजार में बेच कर किसी तरह आटा खरीद रहे हैं ताकि परिवार के लिए रोटी का जुगाड़ कर सकें। इस बार गेहूं न मिलने से लोग परेशान हो गए हैं। अब बाजरे को बेचने के लिए बाजार में भागदौड़ करनी पड़ रही है। वहीं जनवरी माह खत्म होने में केवल चार दिन बचे हैं, इसके बावजूद सभी डिपो पर अभी तक सरसों का तेल भी नहीं पहुंचा है। पहले गेहूं के लिए और अब सरसों के तेल के लिए डिपो पर चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
यमुनानगर में जनवरी माह में 228744 राशन कार्ड धारकों का राशन आया था। इन कार्डों में 918519 यूनिट हैं। प्रदेश में एएवाई परिवार को हर माह डिपो से 35 किलोग्राम गेहूं मिलती है। गेहूं की आपूर्ति कम होने के कारण सरकार ने उन्हें 18 किलोग्राम गेहूं व बाकी 17 किलो बाजरा देने का पत्र जारी किया था। वहीं बीपीएल कार्ड पर प्रति सदस्य मिलने वाले राशन में 2.50 किलोग्राम बाजरा व 2.50 किलोग्राम गेहूं देने का निर्णय लिया। जिले में सरकार की तरफ से 30091 क्विंटल बाजरे का आवंटन डिपो पर किया गया। गेहूं की कमी पूरी करने के लिए इसमें 5842.24 क्विंटल बाजरा ज्यादा भेजा गया। यही वजह है कि अब लोगों को गेहूं के बदले में सारा बाजरा ही दिया जा रहा है।
डिपो संचालक भी खरीद रहे बाजरा:
सरकार की तरफ से मुफ्त भेजा गया बाजरा न केवल बाजार में बिक रहा है, बल्कि डिपो संचालक स्वयं भी इसे खरीद रहे हैं। दरअसल जिले के लोगों को बाजरा खाने की आदत नहीं है। इसलिए डिपो संचालक पीओएस मशीन में पात्र का फिंगर प्रिंट स्कैन करने के बाद पूछ लेते हैं कि वह बाजरा लेकर जाएगा या फिर बेचना है। डिपो संचालक 15 रुपये किलोग्राम की दर से बाजरा खरीद रहे हैं। बाद में इसे बाजार में 22 रुपये किलोग्राम बेचते हैं। आटा चक्की पर बाजरा 22 रुपये किलोग्राम खरीदा जा रहा है। प्रति किलोग्राम डिपो संचालक सात रुपये की कमाई कर रहे हैं। जो बाजरा डिपो पर आता है उसके बदले कमीशन भी डिपो संचालक सरकार से ले रहे हैं। वहीं यूपी से आकर भी लोग गांवों में घूम रहे हैं। वह 20 रुपये किलोग्राम के हिसाब से घर-घर जाकर बाजरा खरीद रहे हैं।
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30 प्रतिशत गेहूं कम आया है : अशोक शर्मा
डीएफएससी अशोक शर्मा का कहना है कि इस बार 30 प्रतिशत गेहूं की आपूर्ति कम आई है। इसलिए जिन लोगों को गेहूं नहीं मिल पाया है उन्हें केवल बाजरा ही दिया जा रहा है। जितने गेहूं की आवक हो रही है उसी हिसाब से लोगों में राशन वितरण किया जा रहा है।
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यमुनानगर में जनवरी माह में 228744 राशन कार्ड धारकों का राशन आया था। इन कार्डों में 918519 यूनिट हैं। प्रदेश में एएवाई परिवार को हर माह डिपो से 35 किलोग्राम गेहूं मिलती है। गेहूं की आपूर्ति कम होने के कारण सरकार ने उन्हें 18 किलोग्राम गेहूं व बाकी 17 किलो बाजरा देने का पत्र जारी किया था। वहीं बीपीएल कार्ड पर प्रति सदस्य मिलने वाले राशन में 2.50 किलोग्राम बाजरा व 2.50 किलोग्राम गेहूं देने का निर्णय लिया। जिले में सरकार की तरफ से 30091 क्विंटल बाजरे का आवंटन डिपो पर किया गया। गेहूं की कमी पूरी करने के लिए इसमें 5842.24 क्विंटल बाजरा ज्यादा भेजा गया। यही वजह है कि अब लोगों को गेहूं के बदले में सारा बाजरा ही दिया जा रहा है।
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डिपो संचालक भी खरीद रहे बाजरा:
सरकार की तरफ से मुफ्त भेजा गया बाजरा न केवल बाजार में बिक रहा है, बल्कि डिपो संचालक स्वयं भी इसे खरीद रहे हैं। दरअसल जिले के लोगों को बाजरा खाने की आदत नहीं है। इसलिए डिपो संचालक पीओएस मशीन में पात्र का फिंगर प्रिंट स्कैन करने के बाद पूछ लेते हैं कि वह बाजरा लेकर जाएगा या फिर बेचना है। डिपो संचालक 15 रुपये किलोग्राम की दर से बाजरा खरीद रहे हैं। बाद में इसे बाजार में 22 रुपये किलोग्राम बेचते हैं। आटा चक्की पर बाजरा 22 रुपये किलोग्राम खरीदा जा रहा है। प्रति किलोग्राम डिपो संचालक सात रुपये की कमाई कर रहे हैं। जो बाजरा डिपो पर आता है उसके बदले कमीशन भी डिपो संचालक सरकार से ले रहे हैं। वहीं यूपी से आकर भी लोग गांवों में घूम रहे हैं। वह 20 रुपये किलोग्राम के हिसाब से घर-घर जाकर बाजरा खरीद रहे हैं।
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30 प्रतिशत गेहूं कम आया है : अशोक शर्मा
डीएफएससी अशोक शर्मा का कहना है कि इस बार 30 प्रतिशत गेहूं की आपूर्ति कम आई है। इसलिए जिन लोगों को गेहूं नहीं मिल पाया है उन्हें केवल बाजरा ही दिया जा रहा है। जितने गेहूं की आवक हो रही है उसी हिसाब से लोगों में राशन वितरण किया जा रहा है।