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Yamuna Nagar News: तीन एमआरएफ सेंटरों में की जाएगी गीले और सूखे कचरे की छंटाई
Sun, 25 Jan 2026 01:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Sun, 25 Jan 2026 01:29 AM IST
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गुलाब नगर में डंपिंग प्वाइंट पर डाला जा रहा शहर का कूड़ा। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। नगर निगम ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। शहर के शादीपुर, कैल और गुलाब नगर क्षेत्रों में तीन मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर बनाए जाएंगे। इन सेंटरों में गीले और सूखे कचरे की अलग-अलग छंटाई की जाएगी, जिससे कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया तेज और सुगम हो सकेगी।
नगर निगम की योजना के अनुसार, इन एमआरएफ सेंटरों में एकत्र किए गए गीले कचरे को सीधे बायोगैस प्लांट में भेजा जाएगा, जहां उससे गैस का उत्पादन किया जाएगा। वहीं, सूखा और अन्य प्रकार का कचरा निस्तारण के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। इससे न केवल कचरे का बेहतर प्रबंधन होगा, बल्कि ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
प्रस्तावित तीनों एमआरएफ सेंटरों के चारों ओर साढ़े 10 मीटर ऊंची दीवारें बनाई जाएंगी, ताकि आसपास के क्षेत्र में किसी प्रकार की गंदगी या दुर्गंध न फैले। इसके अलावा, सेंटरों के बाहर 10 मीटर चौड़ी ग्रीन बेल्ट विकसित की जाएगी, जिससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी और स्थानीय लोगों को हरित वातावरण मिल सकेगा।
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यमुनानगर व जगाधरी शहर से प्रतिदिन करीब 250 से 280 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। फिलहाल यह सारा कचरा सीधे कैल स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में पहुंचाया जाता है, जहां पर ही गीले और सूखे कचरे की छंटाई की जाती है। इस प्रक्रिया में समय अधिक लगता है, जिससे निस्तारण में देरी होती है।
एमआरएफ सेंटरों के निर्माण के बाद कचरे की प्राथमिक छंटाई शहर के अलग-अलग हिस्सों में ही हो जाएगी। इससे प्लांट पर दबाव कम होगा और वहां केवल पहले से छांटा हुआ कचरा पहुंचेगा। इससे निस्तारण की गति बढ़ेगी और गीले कचरे का अधिकतम उपयोग बायोगैस बनाने में किया जा सकेगा।
एमआरएफ सेंटर बनाने से शहर को स्वच्छ बनाए रखने में मदद मिलेगी और कचरा प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक रूप मिलेगा। बायोगैस उत्पादन बढ़ने से पर्यावरण संरक्षण के साथ वैकल्पिक ऊर्जा को भी बल मिलेगा। - महाबीर प्रसाद, आयुक्त, नगर निगम।
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यमुनानगर। नगर निगम ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। शहर के शादीपुर, कैल और गुलाब नगर क्षेत्रों में तीन मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर बनाए जाएंगे। इन सेंटरों में गीले और सूखे कचरे की अलग-अलग छंटाई की जाएगी, जिससे कचरे के निस्तारण की प्रक्रिया तेज और सुगम हो सकेगी।
नगर निगम की योजना के अनुसार, इन एमआरएफ सेंटरों में एकत्र किए गए गीले कचरे को सीधे बायोगैस प्लांट में भेजा जाएगा, जहां उससे गैस का उत्पादन किया जाएगा। वहीं, सूखा और अन्य प्रकार का कचरा निस्तारण के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। इससे न केवल कचरे का बेहतर प्रबंधन होगा, बल्कि ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।
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प्रस्तावित तीनों एमआरएफ सेंटरों के चारों ओर साढ़े 10 मीटर ऊंची दीवारें बनाई जाएंगी, ताकि आसपास के क्षेत्र में किसी प्रकार की गंदगी या दुर्गंध न फैले। इसके अलावा, सेंटरों के बाहर 10 मीटर चौड़ी ग्रीन बेल्ट विकसित की जाएगी, जिससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी और स्थानीय लोगों को हरित वातावरण मिल सकेगा।
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यमुनानगर व जगाधरी शहर से प्रतिदिन करीब 250 से 280 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। फिलहाल यह सारा कचरा सीधे कैल स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में पहुंचाया जाता है, जहां पर ही गीले और सूखे कचरे की छंटाई की जाती है। इस प्रक्रिया में समय अधिक लगता है, जिससे निस्तारण में देरी होती है।
एमआरएफ सेंटरों के निर्माण के बाद कचरे की प्राथमिक छंटाई शहर के अलग-अलग हिस्सों में ही हो जाएगी। इससे प्लांट पर दबाव कम होगा और वहां केवल पहले से छांटा हुआ कचरा पहुंचेगा। इससे निस्तारण की गति बढ़ेगी और गीले कचरे का अधिकतम उपयोग बायोगैस बनाने में किया जा सकेगा।
एमआरएफ सेंटर बनाने से शहर को स्वच्छ बनाए रखने में मदद मिलेगी और कचरा प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक रूप मिलेगा। बायोगैस उत्पादन बढ़ने से पर्यावरण संरक्षण के साथ वैकल्पिक ऊर्जा को भी बल मिलेगा। - महाबीर प्रसाद, आयुक्त, नगर निगम।