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Yamuna Nagar News: गांव यूपी का, स्थित हरियाणा में, सुविधा किसी की नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jan 2024 03:17 AM IST
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Village of UP, located in Haryana, no one has facilities
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर/सरसावा। जिले की नकुड़ तहसील का गांव ढिक्का टपरी हरियाणा में स्थित होने के कारण ग्रामीण सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीण उत्तर प्रदेश का निवासी होने के बावजूद प्रदेश सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। गांव तक न परिवहन की सुविधा, न सरकारी अस्पताल और न ही पशुओं का अस्पताल।
दरअसल, ढिक्का टपरी गांव अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण चहुंऔर परेशानियों का दंश झेल रहा है। ढिक्का गांव दो हिस्सों में बंटा हुआ है। ढिक्का कलां नाम से ग्राम पंचायत सरसावा थाने में शाहजहांपुर पुलिस चौकी क्षेत्र में यूपी की सीमा में स्थित है, जिसकी आबादी करीब 3000 है। जबकि इसी का राजस्व गांव ढिक्का टपरी जिनका उपनाम बाबा मुसद्दी का ढिक्का भी है। जो यमुना नदी के दूसरी ओर हरियाणा राज्य के यमुनानगर के जठलाना थाना क्षेत्र में बसा हुआ है। यहां करीब ढाई हजार की आबादी निवास करती है। दोनों गांवो की भौगोलिक स्थिति इस प्रकार है कि यमुना नदी दोनों राज्यों उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा को विभाजित कर रही है जिसके एक और ढिक्का कलां तथा दूसरी और ढिक्का टपरी है।
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कुछ ऐसा है ग्रामीणों का दर्द

ढिक्का कलां के प्रधान वीरभान का कहना है कि ढिक्का टपरी गांव की सबसे बड़ी समस्या यह है कि गांव आने के लिए सीधा रास्ता नहीं है। टपरी आने के लिए हरियाणा के तीन गांवों को पार कर आना पड़ता है। शाहजहांपुर पुलिस चौकी गांव से करीब 10 किलोमीटर दूर है यदि गांव में कुछ समस्या आती है तो पुलिस को आने में ही एक घंटा लग जाता है। हरियाणा में स्थित होने के कारण अधिकतर अधिकारी तथा विभिन्न विभागों के कर्मचारी गांव में आने से कतराते हैं, जिससे समस्याएं लंबित पड़ी रहती हैं।
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पूर्वजों ने बसाया था गांव
गांव ढिक्का टपरी के सन्नी ठाकुर ने बताया कि जिस समय पूर्वजों ने गांव बसाया था तब हरियाणा राज्य का गठन नहीं हुआ था, परंतु हरियाणा के गठन के साथ यह क्षेत्र तो हरियाणा के आ गया, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में आज तक उत्तर प्रदेश में ही है जिससे गांव आज भी अधर में लटका हुआ है। स्थित ये है कि हरियाणा राज्य उन्हें अपना नहीं मानता। तो उत्तर प्रदेश की सुविधाएं भी उन्हें नहीं मिल पाती हैं।
बच्चोें को पढ़ाई में भी आ रही परेशानी

ढिक्का टपरी के बाबूराम ने बताया कि गांव में ना तो सरकारी अस्पताल है न ही पशुओं का अस्पताल। स्कूल भी मात्र आठवीं तक है, यदि गांव के बच्चों को हरियाणा राज्य के स्कूलों में दाखिला लेना पड़ता है तो मूल निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। जबकि वास्तविकता ये है कि वे रहते हरियाणा राज्य में है, लेकिन नागरिक यूपी के है।


परिवहन संबंधी भी है दिक्कत
गांव के रणधीर ने कहा कि हरियाणा में स्थित होने के कारण गांव में यूपी रोडवेज की बस नहीं आती। इसलिए आवागमन के लिए अपने साधनों पर ही निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में उन्हें ना तो हरियाणा का सुख मिल रहा है और ना ही यूपी का।




अमर उजाला की मुहिम से रोशन हुआ था गांव
ढिक्का टपरी गांव आजादी के 70 साल बाद तक भी अंधेरे में ही डूबा रहा था। यहां पर बिजली नहीं थी। अमर उजाला ने 2015 तथा 2016 में अखबार में व्यापक रूप से इस विषय को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता के साथ उठाया। तब जाकर गांव में बिजली की व्यवस्था बन पाई थी। जिसके तहत ढिक्का टपरी गांव को हरियाणा राज्य बिजली बोर्ड विद्युत सप्लाई करता है इसके एवज में उत्तर प्रदेश विद्युत निगम हरियाणा राज्य को भुगतान करता है जिसकी वसूली गांव वालों से की जाती है।
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