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Yamuna Nagar News: डेंगू-मलेरिया से बचाव के लिए कर्मचारी कम
Tue, 02 Sep 2025 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 02 Sep 2025 01:01 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। बार-बार बारिश होने के साथ ही डेंगू-मलेरिया के रोगों का खतरा बढ़ रहा है। इससे बचाव के लिए जिले में स्टाफ की कमी है। हालांकि मुख्यालय से कई बार स्टाफ बढ़ाने का मांग हुई, पर इस ओर स्वास्थ्य विभाग उदासीन बना हुआ है। ऐसे में डेंगू-मलेरिया के पीक सीजन में नाममात्र स्टाफ से काम चलाया जा रहा है।
जिले में 25 पदों में से मात्र चार मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर ही हैं। वहीं 123 मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर में भी सिर्फ 23 वर्कर ही हैं। स्टाफ की कमी में डेंगू-मलेरिया से निपटना विभाग के लिए चुनौती साबित हो रही है। वर्ष-2024 में मलेरिया के दो व डेंगू के तीन केस थे। इस साल डेंगू के 17 व मलेरिया के तीन केस मिल चुके हैं।
चार मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर, 23 मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर के अलावा डेंगू मलेरिया से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 40 ब्रिडर चेकर रखे हैं, जिनमें दस ग्रामीण व 30 शहरी क्षेत्र में फील्ड में उतारे गए हैं। इनकी टीमें गली-गली जाकर सर्वे कर रही हैं और लोगों को मच्छर जनित रोगों से बचाव के उपाय बता रही हैं।
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मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर व मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर के ही जिम्मे डेंगू-मलेरिया की रोकथाम के अहम काम होते हैं। यही फील्ड में रह कर डेंगू-मलेरिया के बारे में लोगों को जागरूक करने से लेकर बचाव का कार्य करते हैं। मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर लोगों की जांच, नमूने लेना व तालाबों में गंबूजिया मछली छोड़ने सहित अन्य कार्य करते हैं। इन पर मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर निगरानी रखते हैं। दोनों की कमी से यह काम प्रभावित हो रहे हैं।
स्टाफ की कमी के बारे में मुख्यालय को अवगत कराया गया है। मौजूदा स्टाफ में डेंगू-मलेरिया की रोकथाम के सभी कार्य सही तरीके से कराए जाने के प्रयास हैं। - डॉ. सुशीला सैनी, डिप्टी सिविल सर्जन।
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यमुनानगर। बार-बार बारिश होने के साथ ही डेंगू-मलेरिया के रोगों का खतरा बढ़ रहा है। इससे बचाव के लिए जिले में स्टाफ की कमी है। हालांकि मुख्यालय से कई बार स्टाफ बढ़ाने का मांग हुई, पर इस ओर स्वास्थ्य विभाग उदासीन बना हुआ है। ऐसे में डेंगू-मलेरिया के पीक सीजन में नाममात्र स्टाफ से काम चलाया जा रहा है।
जिले में 25 पदों में से मात्र चार मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर ही हैं। वहीं 123 मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर में भी सिर्फ 23 वर्कर ही हैं। स्टाफ की कमी में डेंगू-मलेरिया से निपटना विभाग के लिए चुनौती साबित हो रही है। वर्ष-2024 में मलेरिया के दो व डेंगू के तीन केस थे। इस साल डेंगू के 17 व मलेरिया के तीन केस मिल चुके हैं।
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चार मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर, 23 मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर के अलावा डेंगू मलेरिया से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले में 40 ब्रिडर चेकर रखे हैं, जिनमें दस ग्रामीण व 30 शहरी क्षेत्र में फील्ड में उतारे गए हैं। इनकी टीमें गली-गली जाकर सर्वे कर रही हैं और लोगों को मच्छर जनित रोगों से बचाव के उपाय बता रही हैं।
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मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर व मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर के ही जिम्मे डेंगू-मलेरिया की रोकथाम के अहम काम होते हैं। यही फील्ड में रह कर डेंगू-मलेरिया के बारे में लोगों को जागरूक करने से लेकर बचाव का कार्य करते हैं। मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर लोगों की जांच, नमूने लेना व तालाबों में गंबूजिया मछली छोड़ने सहित अन्य कार्य करते हैं। इन पर मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर निगरानी रखते हैं। दोनों की कमी से यह काम प्रभावित हो रहे हैं।
स्टाफ की कमी के बारे में मुख्यालय को अवगत कराया गया है। मौजूदा स्टाफ में डेंगू-मलेरिया की रोकथाम के सभी कार्य सही तरीके से कराए जाने के प्रयास हैं। - डॉ. सुशीला सैनी, डिप्टी सिविल सर्जन।