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Yamuna Nagar News: पश्चिमी यमुना नहर को जल्द मिलेगा औद्योगिक गंदगी से छुटकारा
Mon, 26 Jan 2026 01:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 26 Jan 2026 01:14 AM IST
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सेक्टर-17 में किया जा रहा आईपीएस का निर्माण। आर्काइव
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। वर्षों से जगाधरी की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला केमिकल युक्त गंदा पानी नालों के सहारे पश्चिमी यमुना नहर में मिलकर जल स्रोतों को प्रदूषित करता रहा है। अब इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से परवालों में 19.5 एमएलडी क्षमता का इंडस्ट्रियल सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (आईएसटीपी) तैयार किया जा रहा है, जिससे बिना शोधन के केमिकल युक्त पानी नहर में नहीं पहुंचेगा।
इस परियोजना के तहत जगाधरी के सेक्टर-17 में इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (आईपीएस) का निर्माण किया जा रहा है। आईपीएस के जरिए औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी को नालों से टैप कर पाइपलाइन के माध्यम से सीधे आईएसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। पंपिंग स्टेशन से ट्रीटमेंट प्लांट तक करीब छह किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। अमृत योजना के अंतर्गत इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 85 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। आईएसटीपी में औद्योगिक अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक तरीके से शोधन किया जाएगा। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही साफ किया गया पानी पश्चिमी यमुना नहर में छोड़ा जाएगा। इससे न केवल नहर का पानी प्रदूषण मुक्त होगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों की मिट्टी, भूजल और जल स्रोतों को भी राहत मिलेगी। लंबे समय से केमिकल युक्त पानी के कारण जो पर्यावरणीय नुकसान हो रहा था, उस पर अब प्रभावी रोक लगेगी। जगाधरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। इन फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी वर्षों से नालों के माध्यम से शहर के बड़े नालों में पहुंच रहा है। बरसात के दिनों में यही नाले उफान पर आ जाते थे, जिससे यमुनानगर की कई कॉलोनियों में जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हो जाती है।
अब आईपीएस और आईएसटीपी के निर्माण से जगाधरी से आने वाले बड़े नाले में जलस्तर कम होगा और बारिश के दौरान जलभराव की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। नालों में औद्योगिक अपशिष्ट का प्रवाह बंद होने से उनकी वहन क्षमता भी बढ़ेगी। इससे मानसून के समय जलभराव की समस्या में कमी आएगी।
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मानक के अनुसार साफ पानी छोड़ा जाएगा : एक्सईएन
जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन सौरव अहलावत ने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर करीब 85 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी को नालों से टैप कर सेक्टर 17 में निर्माणाधीन आईपीएस के माध्यम से सीधे आईएसटीपी तक पहुंचाएंगे। आईएसटीपी में आधुनिक तकनीक के जरिए केमिकल युक्त पानी का ट्रीटमेंट होगाा। मानक के अनुरूप साफ पानी ही यमुना नहर में छोड़ा जाएगा।
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यमुनानगर। वर्षों से जगाधरी की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला केमिकल युक्त गंदा पानी नालों के सहारे पश्चिमी यमुना नहर में मिलकर जल स्रोतों को प्रदूषित करता रहा है। अब इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से परवालों में 19.5 एमएलडी क्षमता का इंडस्ट्रियल सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (आईएसटीपी) तैयार किया जा रहा है, जिससे बिना शोधन के केमिकल युक्त पानी नहर में नहीं पहुंचेगा।
इस परियोजना के तहत जगाधरी के सेक्टर-17 में इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन (आईपीएस) का निर्माण किया जा रहा है। आईपीएस के जरिए औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी को नालों से टैप कर पाइपलाइन के माध्यम से सीधे आईएसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। पंपिंग स्टेशन से ट्रीटमेंट प्लांट तक करीब छह किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जाएगी। अमृत योजना के अंतर्गत इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 85 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। आईएसटीपी में औद्योगिक अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक तरीके से शोधन किया जाएगा। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही साफ किया गया पानी पश्चिमी यमुना नहर में छोड़ा जाएगा। इससे न केवल नहर का पानी प्रदूषण मुक्त होगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों की मिट्टी, भूजल और जल स्रोतों को भी राहत मिलेगी। लंबे समय से केमिकल युक्त पानी के कारण जो पर्यावरणीय नुकसान हो रहा था, उस पर अब प्रभावी रोक लगेगी। जगाधरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। इन फैक्ट्रियों से निकलने वाला गंदा पानी वर्षों से नालों के माध्यम से शहर के बड़े नालों में पहुंच रहा है। बरसात के दिनों में यही नाले उफान पर आ जाते थे, जिससे यमुनानगर की कई कॉलोनियों में जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हो जाती है।
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अब आईपीएस और आईएसटीपी के निर्माण से जगाधरी से आने वाले बड़े नाले में जलस्तर कम होगा और बारिश के दौरान जलभराव की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। नालों में औद्योगिक अपशिष्ट का प्रवाह बंद होने से उनकी वहन क्षमता भी बढ़ेगी। इससे मानसून के समय जलभराव की समस्या में कमी आएगी।
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मानक के अनुसार साफ पानी छोड़ा जाएगा : एक्सईएन
जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन सौरव अहलावत ने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर करीब 85 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी को नालों से टैप कर सेक्टर 17 में निर्माणाधीन आईपीएस के माध्यम से सीधे आईएसटीपी तक पहुंचाएंगे। आईएसटीपी में आधुनिक तकनीक के जरिए केमिकल युक्त पानी का ट्रीटमेंट होगाा। मानक के अनुरूप साफ पानी ही यमुना नहर में छोड़ा जाएगा।