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Yamuna Nagar News: पश्चिमी यमुना नहर में समा रहा शहर के 11 नालों का पानी
Mon, 09 Feb 2026 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Mon, 09 Feb 2026 12:42 AM IST
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एमएलडी के नजदीक नहर में गिरता निगम के नाले का पानी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में पश्चिमी यमुना नहर को साफ-सुथरा रखने के सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट के अनुसार जिले में बूड़िया से लेकर पताशगढ़ तक 11 ऐसे नाले हैं, जिनका पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे पश्चिमी यमुना नहर में गिर रहा है। ये नाले नगर निगम, पंचायत विभाग और जनस्वास्थ्य विभाग के हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक इन 11 नालों में से पांच नगर निगम के अधीन हैं। तीन-तीन नाले पंचायत विभाग और जनस्वास्थ्य विभाग से संबंधित हैं। बोर्ड ने तीन फरवरी को इस गंभीर स्थिति को देखते हुए तीनों विभागों को पत्र लिखकर नालों को बंद करने और वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए कहा, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस हैं। यही नहर आगे चलकर दिल्ली के लाखों लोगों की प्यास बुझाने का जरिया बनती है।
हरियाणा विधानसभा की पर्यावरण प्रदूषण विषय समिति के अध्यक्ष एवं कोसली विधायक लक्ष्मण सिंह यादव के नेतृत्व में टीम ने शुक्रवार को शहर का निरीक्षण किया था। नाले सीधे नहर में गिरने पर अध्यक्ष ने नाराजगी जताई थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सामने आया है कि बूड़िया दयालगढ़, अमादलपुर और दड़वा माजरी गांवों में पंचायत विभाग के नाले सीधे नहर में गिर रहे हैं।
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परवालों गांव में लगे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से भी बिना ट्रीट पानी नहर में जा रहा है। इसी तरह आजाद नगर और मुंडा माजरा में खालसा कॉलेज के पास से गुजरने वाला जनस्वास्थ्य विभाग का गंदा पानी भी नहर को प्रदूषित कर रहा है। नगर निगम क्षेत्र की स्थिति भी अलग नहीं है। शनि मंदिर के पास दो स्थानों पर सीवरेज का पानी नहर में गिर रहा है।
हमीदा, सीवरेज पंप हाउस और पताशगढ़ क्षेत्र में डिच ड्रेन का गंदा पानी सीधे नहर में छोड़ा जा रहा है। मॉडल कॉलोनी के पास हालात और भी गंभीर हैं, जहां आजाद नगर और शांति कॉलोनी की तरफ से आने वाला शहर का लगभग सारा गंदा पानी नहर में ही समा रहा है। मॉडल कॉलोनी के पास से नाले के जरिए ओपी जिंदल पार्क के पास स्थित पांच एमएलडी के एसटीपी पर जाने वाले पानी को बंद कर दिया गया और उसे सीधे नहर में छोड़ दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से नालों को बंद करने और नहर को प्रदूषण मुक्त करने की कवायद चल रही है, लेकिन यह सब फाइलों और बैठकों तक ही सीमित है। धरातल पर सरकारी विभागों के नाले ही नहर को मैला करने में लगे हैं। अधिकारी इतने सालों से नालों को देखने आ रहे हैं, नालों को बंद करने की बात कहते हैं, लेकिन इतने सालों में किया कुछ नहीं।
शहर के 11 नालों का पानी जाने से पश्चिमी यमुना नहर प्रदूषित हो रही है। इन नालों को बंद करने के लिए बीडीपीओ, डीडीपीओ, जनस्वास्थ्य विभाग व नगर निगम को पत्र लिखा है ताकि गंदे पानी का असर नहर में रहने वाले जलीय जीवों और पानी पीने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर न पड़े। - प्रदीप सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यमुनानगर।
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यमुनानगर। जिले में पश्चिमी यमुना नहर को साफ-सुथरा रखने के सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट के अनुसार जिले में बूड़िया से लेकर पताशगढ़ तक 11 ऐसे नाले हैं, जिनका पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे पश्चिमी यमुना नहर में गिर रहा है। ये नाले नगर निगम, पंचायत विभाग और जनस्वास्थ्य विभाग के हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक इन 11 नालों में से पांच नगर निगम के अधीन हैं। तीन-तीन नाले पंचायत विभाग और जनस्वास्थ्य विभाग से संबंधित हैं। बोर्ड ने तीन फरवरी को इस गंभीर स्थिति को देखते हुए तीनों विभागों को पत्र लिखकर नालों को बंद करने और वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए कहा, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस हैं। यही नहर आगे चलकर दिल्ली के लाखों लोगों की प्यास बुझाने का जरिया बनती है।
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हरियाणा विधानसभा की पर्यावरण प्रदूषण विषय समिति के अध्यक्ष एवं कोसली विधायक लक्ष्मण सिंह यादव के नेतृत्व में टीम ने शुक्रवार को शहर का निरीक्षण किया था। नाले सीधे नहर में गिरने पर अध्यक्ष ने नाराजगी जताई थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सामने आया है कि बूड़िया दयालगढ़, अमादलपुर और दड़वा माजरी गांवों में पंचायत विभाग के नाले सीधे नहर में गिर रहे हैं।
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परवालों गांव में लगे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से भी बिना ट्रीट पानी नहर में जा रहा है। इसी तरह आजाद नगर और मुंडा माजरा में खालसा कॉलेज के पास से गुजरने वाला जनस्वास्थ्य विभाग का गंदा पानी भी नहर को प्रदूषित कर रहा है। नगर निगम क्षेत्र की स्थिति भी अलग नहीं है। शनि मंदिर के पास दो स्थानों पर सीवरेज का पानी नहर में गिर रहा है।
हमीदा, सीवरेज पंप हाउस और पताशगढ़ क्षेत्र में डिच ड्रेन का गंदा पानी सीधे नहर में छोड़ा जा रहा है। मॉडल कॉलोनी के पास हालात और भी गंभीर हैं, जहां आजाद नगर और शांति कॉलोनी की तरफ से आने वाला शहर का लगभग सारा गंदा पानी नहर में ही समा रहा है। मॉडल कॉलोनी के पास से नाले के जरिए ओपी जिंदल पार्क के पास स्थित पांच एमएलडी के एसटीपी पर जाने वाले पानी को बंद कर दिया गया और उसे सीधे नहर में छोड़ दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से नालों को बंद करने और नहर को प्रदूषण मुक्त करने की कवायद चल रही है, लेकिन यह सब फाइलों और बैठकों तक ही सीमित है। धरातल पर सरकारी विभागों के नाले ही नहर को मैला करने में लगे हैं। अधिकारी इतने सालों से नालों को देखने आ रहे हैं, नालों को बंद करने की बात कहते हैं, लेकिन इतने सालों में किया कुछ नहीं।
शहर के 11 नालों का पानी जाने से पश्चिमी यमुना नहर प्रदूषित हो रही है। इन नालों को बंद करने के लिए बीडीपीओ, डीडीपीओ, जनस्वास्थ्य विभाग व नगर निगम को पत्र लिखा है ताकि गंदे पानी का असर नहर में रहने वाले जलीय जीवों और पानी पीने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर न पड़े। - प्रदीप सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यमुनानगर।

एमएलडी के नजदीक नहर में गिरता निगम के नाले का पानी। संवाद