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Yamuna Nagar News: आव्रजन कंपनी सात प्रतिशत ब्याज के साथ ग्राहक को लौटाए रकम

Wed, 25 Feb 2026 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Wed, 25 Feb 2026 01:06 AM IST
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The immigration company returned the money to the customer with 7% interest
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग कार्यालय। आर्काइव
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। यूके टियर-2 वर्क परमिट दिलाने का झांसा देकर 2.08 लाख रुपये लेने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने आव्रजन कंपनी को दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी को शिकायतकर्ता को 2,08,000 रुपये सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने और 11 हजार रुपये मानसिक उत्पीड़न व वाद खर्च के रूप में अदा करने के निर्देश दिए हैं। आदेश का पालन 45 दिन के अंदर करना होगा।
मामले के अनुसार श्रीनगर कॉलोनी, जगाधरी निवासी अंकित गुलाटी ने डीवाई इमिग्रेशन के माध्यम से यूके टियर-2 वर्क परमिट के लिए आवेदन किया था। एक सितंबर 2023 को हुए समझौते के तहत शिकायतकर्ता ने 2,08,000 रुपये कंपनी को दिए। आरोप था कि कंपनी ने उसकी योग्यता बीकॉम के अनुसार नौकरी दिलाने और स्पॉन्सरशिप सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन न तो वैध जॉब ऑफर दिया गया और न ही वर्क परमिट जारी हुआ। शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि कंपनी की ओर से कथित स्पॉन्सरशिप दस्तावेज भेजे गए, जिनमें कंपनी का नाम, लाइसेंस नंबर या अधिकृत हस्ताक्षर नहीं थे। इससे दस्तावेज संदिग्ध प्रतीत हुए। बार-बार संपर्क करने के बावजूद ठोस प्रगति नहीं हुई, जिससे उसे मानसिक तनाव झेलना पड़ा।
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आयोग ने पाया कि कंपनी अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर सकी। केवल शपथ पत्र दाखिल किया गया, जबकि यह सिद्ध करने के लिए कोई प्रमाण नहीं दिया गया कि शिकायतकर्ता ने स्वेच्छा से मामला वापस लिया था। आयोग के अध्यक्ष राजबीर सिंह व सदस्यों की पीठ ने कहा कि यूके टियर-2 वीजा (अब स्किल्ड वर्कर वीजा) के लिए वैध स्पॉन्सर और स्पष्ट जॉब ऑफर आवश्यक होता है।
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रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि कंपनी वादे के अनुरूप सेवा देने में विफल रही। इसे सेवा में कमी माना गया। आयोग ने आदेश दिया कि कंपनी 2,08,000 रुपये पर शिकायत दायर करने की तिथि से सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज देगी। साथ ही 11,000 रुपये मानसिक कष्ट व मुकदमा खर्च के रूप में चुकाने होंगे। निर्धारित समय में भुगतान न करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
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