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Yamuna Nagar News: बिना सूचना बढ़ाई लोन की अवधि, उपभोक्ता आयोग ने वित्त कंपनी को ठहराया जिम्मेदार

Fri, 13 Mar 2026 02:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Fri, 13 Mar 2026 02:54 AM IST
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The Consumer Commission held the finance company responsible for extending the loan period without notice.
संवाद न्यूज एजेंसीयमुनानगर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग यमुनानगर ने एक महत्वपूर्ण मामले में वित्त कंपनी द्वारा बिना सूचना लोन की अवधि बढ़ाने को सेवा में कमी और अनुचित व्यवहार माना है। आयोग ने कहा कि किसी भी उपभोक्ता के लोन खाते में इस प्रकार का बड़ा बदलाव करने से पहले उसे लिखित रूप से सूचित करना अनिवार्य है। यह फैसला बूड़िया निवासी राजिंदर सिंह, उनकी पत्नी सुनीता और बेटे शक्ति गिल द्वारा दायर शिकायत पर सुनाया गया। शिकायतकर्ताओं ने चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 के तहत आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। आयोग के अध्यक्ष राजबीर सिंह तथा सदस्य जसविंदर सिंह और सुमन राणा की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद 9 मार्च 2026 को अपना निर्णय सुनाया।
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25 लाख रुपये लोन लेने के लिए किया था प्रेरित शिकायतकर्ताओं के अनुसार वर्ष 2018 में कंपनी के अधिकारियों ने उनसे संपर्क कर 25 लाख रुपये का लोन लेने के लिए प्रेरित किया था। उस समय उन्हें बताया गया कि लोन की अवधि 10 वर्ष यानी 120 माह होगी और इसकी मासिक किस्त 35,868 रुपये तय की गई थी। इसके बाद 28 फरवरी 2018 को लोन स्वीकृत कर दिया गया और किस्तों का भुगतान शुरू हो गया। शिकायत के अनुसार उन्होंने समय-समय पर नियमित रूप से किस्तें जमा करवाईं और किसी प्रकार की किस्त नहीं रोकी। अप्रैल 2023 में जब उन्होंने अपने लोन खाते का स्टेटमेंट लिया तो उन्हें पता चला कि लोन की अवधि 120 माह के बजाय 140 माह दर्शाई गई है। यह देखकर वे हैरान रह गए। उन्होंने इस संबंध में कंपनी से जानकारी मांगी, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने 15 मार्च 2023 को कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा। जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्होंने अंततः उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। संवाद
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दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें और दस्तावेजों का परीक्षण किया। दस्तावेजों में लोन 12 प्रतिशत फ्लोटिंग ब्याज दर पर स्वीकृत बताया गया था, इसलिए आयोग ने ब्याज दर 7 प्रतिशत करने की मांग को खारिज कर दिया। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी लोन की अवधि बढ़ाने के संबंध में कोई ऐसा दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी, जिससे यह साबित हो सके कि शिकायतकर्ताओं को पहले से लिखित सूचना दी गई थी। वहीं, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अस्सिटेंट रजिस्ट्रार नीरज वालिया ने बताया कि आयोग ने यह फैसला दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद सुनाया है। यहां आने वाली हर शिकायत पर आयोग पीड़ित को न्याय देता है।
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