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Yamuna Nagar News: आदिबद्री से कैथल तक फर्स्ट फेज में ड्रोन से होगा सर्वे
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। अब आदिबद्री से लेकर कैथल तक फर्स्ट फेज में ड्रोन से सर्वे किया जाएगा। इस दिशा में कार्य शुरू भी हो चुका है। यह ड्रोन 120 मीटर ऊंचा उड़ेगा और सरस्वती के एक किलोमीटर से लेकर पांच किलोमीटर तक के दायरे में जितनी भी आर्कियोलॉजिकल साइट्स मंदिर, गुरद्वारे व पर्यटक स्थलों व क्या क्या गतिविधियां सरस्वती के किनारे पर हैं। यह सारी गतिविधियां नोट करेगा। इसके बाद सर्वे की रिपोर्ट सरस्वती बोर्ड को दी जाएगी।
क्या-क्या हुए बदलाव को लेकर किया जा रहा सर्वे
वहीं सरस्वती बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन धुमन सिंह किरमच ने बताया कि अभी तक सरस्वती पर जितने भी कार्य चल रहे हैं। वे सभी मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में किये जा रहे हैं। वहीं एक ड्रोन बेस्ट सर्वे भी तैयार किया जा रहा है ताकि समय-समय पर सरस्वती में क्या-क्या बदला हुआ है। कितना क्षेत्र बदलेगा और कितना बदला है। यह सारी जानकारी जुटाई जाएगी। इसीलिए यह ड्रोन सर्वे करवाया जा रहा है। किरमिच ने बताया कि इससे जो आस पास के रिजर्व वायर सरोवर बनाने की जो प्लानिंग और रिचार्जिंग को लेकर सरस्वती बोर्ड की चल रही है, वो व जंगल में पौधरोपण तथा बाढ़ से किस तरह से सरस्वती क्षेत्र को बचाएं यह सारी जानकारियां इस ड्रोन सर्वे के बाद जुटाई जाएगी ताकि आने वाले समय मैं सरस्वती इस क्षेत्र के लिए एक रामबाण साबित हो सके।
200 किमी तक के दायरे में होगा सर्वे
धुमन सिंह किरमिच ने बताया कि यह ड्रोन सर्वे आदिबद्री से लेकर कैथल 200 किलोमीटर तक के सरस्वती के दायरे में होगा और दूसरे फेज में यह कैथल के अंतिम छोर व पंजाब के सागरा गांव जहां घग्गर नदी- सरस्वती नदी मिलती है से लेकर सिरसा ऑटू हेड तक, जहां तक सरस्वती अन्य नदियों के साथ जाकर राजस्थान के बॉर्डर पर मिलती है। उन्होंने बताया कि आगामी तीसरे दौर में इस सर्वे को राजस्थान के हनुमानगढ़ गंगानगर अनूपगढ़ से होते हुए लूनी नदी जयपुर के पास से होते हुए भी करवाया जाएगा, ताकि सरस्वती के ट्रैक को इसरो के मुताबिक़ पूरी तरह से गुजरात के रण ऑफ़ कच्छ तक ट्रेस करके बताया जा सके।
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यमुनानगर। अब आदिबद्री से लेकर कैथल तक फर्स्ट फेज में ड्रोन से सर्वे किया जाएगा। इस दिशा में कार्य शुरू भी हो चुका है। यह ड्रोन 120 मीटर ऊंचा उड़ेगा और सरस्वती के एक किलोमीटर से लेकर पांच किलोमीटर तक के दायरे में जितनी भी आर्कियोलॉजिकल साइट्स मंदिर, गुरद्वारे व पर्यटक स्थलों व क्या क्या गतिविधियां सरस्वती के किनारे पर हैं। यह सारी गतिविधियां नोट करेगा। इसके बाद सर्वे की रिपोर्ट सरस्वती बोर्ड को दी जाएगी।
क्या-क्या हुए बदलाव को लेकर किया जा रहा सर्वे
वहीं सरस्वती बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन धुमन सिंह किरमच ने बताया कि अभी तक सरस्वती पर जितने भी कार्य चल रहे हैं। वे सभी मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व में किये जा रहे हैं। वहीं एक ड्रोन बेस्ट सर्वे भी तैयार किया जा रहा है ताकि समय-समय पर सरस्वती में क्या-क्या बदला हुआ है। कितना क्षेत्र बदलेगा और कितना बदला है। यह सारी जानकारी जुटाई जाएगी। इसीलिए यह ड्रोन सर्वे करवाया जा रहा है। किरमिच ने बताया कि इससे जो आस पास के रिजर्व वायर सरोवर बनाने की जो प्लानिंग और रिचार्जिंग को लेकर सरस्वती बोर्ड की चल रही है, वो व जंगल में पौधरोपण तथा बाढ़ से किस तरह से सरस्वती क्षेत्र को बचाएं यह सारी जानकारियां इस ड्रोन सर्वे के बाद जुटाई जाएगी ताकि आने वाले समय मैं सरस्वती इस क्षेत्र के लिए एक रामबाण साबित हो सके।
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200 किमी तक के दायरे में होगा सर्वे
धुमन सिंह किरमिच ने बताया कि यह ड्रोन सर्वे आदिबद्री से लेकर कैथल 200 किलोमीटर तक के सरस्वती के दायरे में होगा और दूसरे फेज में यह कैथल के अंतिम छोर व पंजाब के सागरा गांव जहां घग्गर नदी- सरस्वती नदी मिलती है से लेकर सिरसा ऑटू हेड तक, जहां तक सरस्वती अन्य नदियों के साथ जाकर राजस्थान के बॉर्डर पर मिलती है। उन्होंने बताया कि आगामी तीसरे दौर में इस सर्वे को राजस्थान के हनुमानगढ़ गंगानगर अनूपगढ़ से होते हुए लूनी नदी जयपुर के पास से होते हुए भी करवाया जाएगा, ताकि सरस्वती के ट्रैक को इसरो के मुताबिक़ पूरी तरह से गुजरात के रण ऑफ़ कच्छ तक ट्रेस करके बताया जा सके।
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