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द्वापर युग से यहां स्थापित शिवलिंग गहरी आस्था का केंद्र
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बिलासपुर स्थित शिव मंदिर का दृश्य
- फोटो : Yamuna Nagar
बिलासपुर। खंड के गांव मिल्क के जंगल में स्थित श्री संदेश्वर शिव मंदिर पिछले करीब चार हजार वर्षों से श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर में सावन मास, शिवरात्रि के साथ-साथ प्रत्येक सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। मंदिर में स्थित शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल व आसपास के प्रदेशों के हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि सावन माह में पूजा अर्चना करने से पापों से मुक्ति मिलती है और मानव का कल्याण होता है। सावन के महीने में मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो जाते हैं।
मंदिर के पुजारी चरण पुरी ने बताया कि मंदिर में सुबह व शाम को आरती की जाती है। शिवरात्रि पर भव्य आयोजन कर मेले का आयोजन किया जाता है। श्री संदेश्वर के नाम से स्थित शिवलिंग लगभग चार हजार साल से अधिक प्राचीन व प्रसिद्ध है। मंदिर में द्वापर युग का शिवलिंग है। यह शिवलिंग स्वयंभू है। अन्य शिवलिंग की अपेक्षा इस शिवलिंग में किया गया जलाभिषेक सिंचित कर्म बन जाता है। जहां मात्र ओम नम: शिवाय के जाप के साथ जलाभिषेक करने से जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। सावन के महीने में मंदिर में विशेष तैयारी की जाती है। रोशनी के व्यापक प्रबंध किए जाते हैं। मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए पूजन सामग्री रखी जाती है। सावन माह में श्रद्धालु सुबह 4 बजे से मंदिर में पहुंचना शुरू हो जाते हैं। जो कि पूरा दिन श्रद्धालुओं का आवागमन रहता है। सावन के महीने में प्रत्येक सोमवार भंडारे का भी आयोजन किया जाता है। शिव भक्तों की संख्या को देखते हुए सुरक्षा के प्रबंध किए गए हैं।
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मंदिर के पुजारी चरण पुरी ने बताया कि मंदिर में सुबह व शाम को आरती की जाती है। शिवरात्रि पर भव्य आयोजन कर मेले का आयोजन किया जाता है। श्री संदेश्वर के नाम से स्थित शिवलिंग लगभग चार हजार साल से अधिक प्राचीन व प्रसिद्ध है। मंदिर में द्वापर युग का शिवलिंग है। यह शिवलिंग स्वयंभू है। अन्य शिवलिंग की अपेक्षा इस शिवलिंग में किया गया जलाभिषेक सिंचित कर्म बन जाता है। जहां मात्र ओम नम: शिवाय के जाप के साथ जलाभिषेक करने से जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है। सावन के महीने में मंदिर में विशेष तैयारी की जाती है। रोशनी के व्यापक प्रबंध किए जाते हैं। मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए पूजन सामग्री रखी जाती है। सावन माह में श्रद्धालु सुबह 4 बजे से मंदिर में पहुंचना शुरू हो जाते हैं। जो कि पूरा दिन श्रद्धालुओं का आवागमन रहता है। सावन के महीने में प्रत्येक सोमवार भंडारे का भी आयोजन किया जाता है। शिव भक्तों की संख्या को देखते हुए सुरक्षा के प्रबंध किए गए हैं।
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