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Yamuna Nagar News: ऑपरेशन कराने में मरीजों की जेबें हो रहीं ढीलीं

Tue, 12 Aug 2025 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Tue, 12 Aug 2025 12:21 AM IST
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Patients' pockets are getting loose in getting operation done
निजी अस्पताल के बाहर लगा आयुष्मान से इलाज बंद का नोटिस। आर्काइव - फोटो : संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। सरकारी स्तर पर ह्रदय, चमड़ी, दिमाग व मानसिक जैसे कई रोगों के विशेषज्ञ नहीं हैं। इनके लिए जिले के मरीज निजी अस्पतालों पर निर्भर हैं, जहां पांच दिन से आयुष्मान भारत याेजना के तहत इलाज बंद हैं। आर्थिक कमजोर परिवार मरीज को लेकर ऑपरेशन के लिए अंबाला व चंडीगढ़ दौड़ रहे हैं या निजी अस्पतालों में जेबें ढीली कर रहे हैं। महंगे ऑपरेशन देख कई अपने जानकार से पैसा लेने सहित ऋण से काम चला रहे हैं।
जिले के 33 निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना से रोज 200 से 250 मरीजों का इलाज होता है। रोज योजना के पात्रों के अलग-अलग बीमारियों में 25 से 30 ऑपरेशन भी होते हैं। पांच दिन से योजना के तहत इलाज व ऑपरेशन नहीं हो रहे। अस्पतालों के बाहर आयुष्मान से इलाज बंद के नोटिस देख तीमारदारों संग मरीज एक से दूसरे निजी अस्पताल में भटक रहे हैं।
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गंभीर मरीजों का आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद परिजनों को निजी अस्पतालों में जेब से पैसे भरकर इलाज कराना पड़ रहा है। कई परिवार इलाज के लिए अंबाला के सरकारी अस्पताल या चंडीगढ़ पीजीआई भी मरीज को लेकर जा रहे हैं। ऐसे ही रेलवे रोड स्थित निजी अस्पताल पहुंचे कैंप निवासी राजिंद्र ने बताया कि पिता को हार्ट अटैक आया था।
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आयुष्मान का कार्ड बना था, इसलिए सीधे निजी अस्पताल ले आए। यहां आकर पता चला कि आयुष्मान योजना में इलाज बंद है, इसलिए पैसे भरने पड़ेंगे। कुछ पैसा बैंक के एटीएम से निकलवाया और बाकी रिश्तेदार व दोस्तों से लिया है, ताकि पिता का इलाज हो सके।
इसी तरह, जगाधरी निवासी सुरेंद्र ने बताया कि गली में फिसल कर पत्नी को दिमाग में चोट आई। उसे जगाधरी के निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां आयुष्मान कार्ड नहीं चला।

इलाज पर खर्च अधिक है, इसलिए अंबाला के सरकारी या चंडीगढ़ पीजीआई जा रहे हैं।
आईएमए से आयुष्मान भारत योजना के जिला संयोजक डाॅ. जेके गुलाटी ने बताया कि उनकी मांग है कि समय पर अस्पतालों को बिलों का भुगतान हो। साथ ही बिलों में कटौती व उन्हें रद किया जाना बंद हो। इन मांगों पर सरकार से सहमति नहीं बनने तक इलाज बंद रखेंगे।
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