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अनदेखी : 43 खेलों में से सिर्फ 11 के ही प्रशिक्षक
Fri, 07 Mar 2025 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Fri, 07 Mar 2025 12:45 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। ओलंपिक में करीब 43 खेल शामिल हैं, जिनमें 11 खेलों के ही जिले में सरकारी स्तर पर कोच हैं। ऐसे में जिले के खिलाड़ियों की ओलंपिक तक की दौड़ कैसे पूरी होगी, यह प्रश्नचिन्ह लग रहा है। ओलंपिक सहित अन्य कई खेलों में जिले के किशोर व युवा वर्ग का रूझान है, पर सरकारी कोच न होने से खेल सिर्फ शौक का हिस्सा बनकर रह जाते हैं।
मामला खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग के जिला व मुख्यालय के अधिकारियों से भी छिपा नहीं हैं, क्योंकि कोचों की मांग के लिए कई वर्षों से जिले से मुख्यालय पत्र भेजने की कार्रवाई हो रही है, पर सरकारी स्तर पर खेल कोच नहीं बढ़े। ये देख काफी खिलाड़ी जिले की निजी अकादमियों या दूसरे जिलों व प्रदेशों में प्रशिक्षण ले रहे हैं, पर निजी स्तर पर कोचिंग का खर्च उठाने में असमर्थ काफी किशोर व युवा वर्ग खेलों में कॅरिअर बनाने से चूक जाते हैं, जिनकी प्रतिभा निखरने से पहले ही दम तोड़ रही है।
जिले में सरकारी स्तर पर कोचों की यह कमी एक-दो वर्ष नहीं बल्कि एक दशक से ही है। कई वर्षों से कोचों की संख्या आठ से 15 पर ही अटकी है। विभागीय सूत्रों की मानें तो खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग से जिले में पुराने समय के 44 पद खेल कोचों के स्वीकृत हैं। इनमें अभी 11 खेलों के 12 कोच के सहारे काम चलाया जा रहा है।
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इनमें फुटबाॅल, हॉकी, बॉक्सिंग, खो-खो, कबड्डी, बैडमिंटन, तलवारबाजी, भारतोलन, जुडो, लॉन टेनिस के एक-एक कोच हैं, वहीं कुश्ती के दो कोच हैं। इसके अलावा अन्य किसी खेल के कोच नहीं हैं। कई खेलों के मैदान हैं, पर कोच नहीं। इसका फायदा निजी अकादमियों को मिल रहा है।
निजी अकादमियों प्रशिक्षण के नाम पर खिलाड़ियों से कोचिंग की अलग-अलग फीस ली जा रही है। यह फीस देने में अधिकतर खिलाड़ी असमर्थ हैं। ङईँ टीवी-मोबाइल पर ओलंपिक व अन्य खेल देखख्र उनमें खेलने व पदक जीतने का सपना संजो रहे आर्थिक रूपर से कमजोर किशोर व युवाओं को खेलों से वंचित रहना पड़ता है।
खिलाड़ी बोले - कोच मिलें तो सीखें बारीकियां
तेजली खेल परिसर में अलग-अलग खेलों का अभ्यास करने पहुंचे शुभम, रवि, सन्नी ने बताया कि सरकारी स्तर पर कोच व अन्य अत्याधुनिक खेल सुविधाएं मिलें तो ओलंपिक व अन्य खेलों में जिले के खिलाड़ियों का खेलने और पदक जीतने का सपना साकार हो सकता है, पर अधिकांश खेलों के कोच नहीं है और कईयों के मैदान नहीं हैं। ऐसे में चाहकर भी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।
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यमुनानगर। ओलंपिक में करीब 43 खेल शामिल हैं, जिनमें 11 खेलों के ही जिले में सरकारी स्तर पर कोच हैं। ऐसे में जिले के खिलाड़ियों की ओलंपिक तक की दौड़ कैसे पूरी होगी, यह प्रश्नचिन्ह लग रहा है। ओलंपिक सहित अन्य कई खेलों में जिले के किशोर व युवा वर्ग का रूझान है, पर सरकारी कोच न होने से खेल सिर्फ शौक का हिस्सा बनकर रह जाते हैं।
मामला खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग के जिला व मुख्यालय के अधिकारियों से भी छिपा नहीं हैं, क्योंकि कोचों की मांग के लिए कई वर्षों से जिले से मुख्यालय पत्र भेजने की कार्रवाई हो रही है, पर सरकारी स्तर पर खेल कोच नहीं बढ़े। ये देख काफी खिलाड़ी जिले की निजी अकादमियों या दूसरे जिलों व प्रदेशों में प्रशिक्षण ले रहे हैं, पर निजी स्तर पर कोचिंग का खर्च उठाने में असमर्थ काफी किशोर व युवा वर्ग खेलों में कॅरिअर बनाने से चूक जाते हैं, जिनकी प्रतिभा निखरने से पहले ही दम तोड़ रही है।
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जिले में सरकारी स्तर पर कोचों की यह कमी एक-दो वर्ष नहीं बल्कि एक दशक से ही है। कई वर्षों से कोचों की संख्या आठ से 15 पर ही अटकी है। विभागीय सूत्रों की मानें तो खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग से जिले में पुराने समय के 44 पद खेल कोचों के स्वीकृत हैं। इनमें अभी 11 खेलों के 12 कोच के सहारे काम चलाया जा रहा है।
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इनमें फुटबाॅल, हॉकी, बॉक्सिंग, खो-खो, कबड्डी, बैडमिंटन, तलवारबाजी, भारतोलन, जुडो, लॉन टेनिस के एक-एक कोच हैं, वहीं कुश्ती के दो कोच हैं। इसके अलावा अन्य किसी खेल के कोच नहीं हैं। कई खेलों के मैदान हैं, पर कोच नहीं। इसका फायदा निजी अकादमियों को मिल रहा है।
निजी अकादमियों प्रशिक्षण के नाम पर खिलाड़ियों से कोचिंग की अलग-अलग फीस ली जा रही है। यह फीस देने में अधिकतर खिलाड़ी असमर्थ हैं। ङईँ टीवी-मोबाइल पर ओलंपिक व अन्य खेल देखख्र उनमें खेलने व पदक जीतने का सपना संजो रहे आर्थिक रूपर से कमजोर किशोर व युवाओं को खेलों से वंचित रहना पड़ता है।
खिलाड़ी बोले - कोच मिलें तो सीखें बारीकियां
तेजली खेल परिसर में अलग-अलग खेलों का अभ्यास करने पहुंचे शुभम, रवि, सन्नी ने बताया कि सरकारी स्तर पर कोच व अन्य अत्याधुनिक खेल सुविधाएं मिलें तो ओलंपिक व अन्य खेलों में जिले के खिलाड़ियों का खेलने और पदक जीतने का सपना साकार हो सकता है, पर अधिकांश खेलों के कोच नहीं है और कईयों के मैदान नहीं हैं। ऐसे में चाहकर भी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।