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परमात्मा का विस्तार स्वरूप है प्रकृति : नीरू

Mon, 13 May 2024 05:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Mon, 13 May 2024 05:04 AM IST
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Nature is an extension of God: Neeru
संवाद न्यूज एजेंसी
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जगाधरी। हनुमान गेट स्थित दिव्य ज्योति जागृति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग हुआ। सत्संग में आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी नीरू भारती ने प्रवचन किया। प्रवचन में साध्वी नीरू भारती ने कहा कि प्रकृति परमात्मा का विस्तार स्वरूप है। एक निराकार और दूसरा साकार है। लेकिन मानव, जो सृष्टि की सिरमौर रचना है वह अहम् के कारण इन्हें पृथक देखता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य के भीतर अहम् के कारण ही द्वैत भाव उत्पन्न होता है, जिससे वह परमात्मा और परमात्मा की प्रकृति को यथा स्वरूप नहीं देख पाता और सदैव माया के आवरण में फंसा भ्रमित रहता है। यही मानव जीवन की सभी समस्याओं का मूल है, चूंकि आत्मा व परमात्मा के बीच में अहम् का पर्दा है। अहम् मिटाने पर ही जीव को आत्म साक्षात्कार होता है और परमात्मा के वास्तविक स्वरूप का अनुभव हो पाता है।
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साध्वी ने कहा कि हम कितना प्रयास कर लें, हम अपने पुरुषार्थ से अहम् रूपी विकार से मुक्ति प्राप्त नहीं हो पाती है। चूंकि हम दान, पुण्य, व्रत, उपवास, पूजा-पाठ जो भी कार्य करते हैं उनसे हमारे अहम् में वृद्धि होती है। हम स्वयं को श्रेष्ठ मानना शुरू कर देते हैं। जब एक श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ गुरु हमें ब्रह्मज्ञान की दीक्षा प्रदान करके परमात्मा का प्रकाश स्वरूप हमारे अंतर्घट में ही दिखाते हैं।
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फिर साधक गुरु आज्ञा में रह कर ब्रह्मज्ञान की निरंतर ध्यान साधना के द्वारा अपने अहम् भाव को पूर्णत तिरोहित करके सृष्टि के सत्य को जान लेता है। अहम् का त्याग तभी संभव है जब हम परमात्मा के साकार स्वरूप गुरु की शरणागत होकर मन, वचन, कर्म से समर्पित होकर अपने जीवन को सकारात्मक रूप से परिवर्तित करने के लिए तैयार हो।

तभी वह परम शक्ति हमारे भीतर सूक्ष्मता से कार्य कर पाती है और हमारे मन के सभी विकारों को दूर करके हमें जन्म मरण के बंधनों से मुक्ति दिलाती है। तभी वह परम शक्ति कृपा करके हमारे भीतर से अहम् भाव का पर्दा हटाकर विवेक और वैराग्य भाव भर देती है। सत्संग में साध्वियों ने भजनों से ईश्वर व गुरु महिमा का गुणगान किया।
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