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Yamuna Nagar News: श्रीराम-सीता विवाह का प्रसंग सुनाया
Tue, 17 Jun 2025 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
Updated Tue, 17 Jun 2025 12:24 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रादौर। श्री बालाजी मंदिर कॉलेज रोडत में चल रही श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथा व्यास राम सुमिरन दास महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीराम-सीता विवाह का प्रसंग सुनाया। यह प्रसंग सुनकर भक्त भावविभोर हो गए और झूमने लगे।
कथा व्यास ने बताया कि राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के लिए स्वयंवर का आयोजन किया था। स्वयंवर की शर्त थी कि जो भी भगवान शिव के धनुष को उठाएगा, वही सीता से विवाह करेगा। अनेक राजा-महाराजा आए, पर कोई भी धनुष को उठा नहीं पाया।
तब गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान श्रीराम ने धनुष उठाया और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष टूट गया।
इस प्रकार भगवान श्रीराम ने सीता से विवाह किया। इस दिन को विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता है। विवाह पंचमी का दिन भगवान श्रीराम और देवी सीता के विवाह की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। यह दिन शुभ माना जाता है।
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इस दिन विवाहित जोड़ों को भगवान श्रीराम व सीता का आशीर्वाद लेने के लिए पूजा-अर्चना करनी चाहिए। कथा का आयोजन श्री बालाजी सेवा समिति की ओर से किया जा रहा है। इस मौके मौके पर मुख्य रूप से आयोजन समिति के प्रधान विनोद राणा, बबलू, प्रवीण, अनिल, प्रियकांत जोगी, श्रीराम गर्ग आदि मौजूद रहे।
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रादौर। श्री बालाजी मंदिर कॉलेज रोडत में चल रही श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथा व्यास राम सुमिरन दास महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीराम-सीता विवाह का प्रसंग सुनाया। यह प्रसंग सुनकर भक्त भावविभोर हो गए और झूमने लगे।
कथा व्यास ने बताया कि राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के लिए स्वयंवर का आयोजन किया था। स्वयंवर की शर्त थी कि जो भी भगवान शिव के धनुष को उठाएगा, वही सीता से विवाह करेगा। अनेक राजा-महाराजा आए, पर कोई भी धनुष को उठा नहीं पाया।
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तब गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से भगवान श्रीराम ने धनुष उठाया और उस पर प्रत्यंचा चढ़ाते ही धनुष टूट गया।
इस प्रकार भगवान श्रीराम ने सीता से विवाह किया। इस दिन को विवाह पंचमी के रूप में मनाया जाता है। विवाह पंचमी का दिन भगवान श्रीराम और देवी सीता के विवाह की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। यह दिन शुभ माना जाता है।
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इस दिन विवाहित जोड़ों को भगवान श्रीराम व सीता का आशीर्वाद लेने के लिए पूजा-अर्चना करनी चाहिए। कथा का आयोजन श्री बालाजी सेवा समिति की ओर से किया जा रहा है। इस मौके मौके पर मुख्य रूप से आयोजन समिति के प्रधान विनोद राणा, बबलू, प्रवीण, अनिल, प्रियकांत जोगी, श्रीराम गर्ग आदि मौजूद रहे।