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Yamuna Nagar News: केमिकल से पुराना गुड़ बना रहे नया

Tue, 15 Oct 2024 04:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर Updated Tue, 15 Oct 2024 04:58 AM IST
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Making old jaggery new with chemicals
संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। गुड़ बनाने वाले गन्ना क्रशरों की चिमनियों से दिनरात धुंआ निकल रहा है। वहीं क्रशरों पर पेराई करने के लिए गन्ना बिल्कुल भी नहीं है। जब गन्ना ही नहीं है तो चिमनियों से धुंआ कहां से आ रहा है, सबसे बड़ा सवाल ही यही है। दरअसल काफी समय से गन्ना क्रशरों पर पुराने व सड़े हुए गुड़ को केमिकल व कलर की मदद से दोबारा तैयार किया जा रहा है।
गुड़ में न केवल केमिकल मिलाया जा रहा है बल्कि इसमें चीनी भी भरपूर मात्रा में मिलाई जा रही है। मिलावटी गुड़ को तैयार करके रातोंरात ही इसे गाड़ियों में भर कर सप्लाई कर दिया जाता है। स्वास्थ्य विभाग हाथ पर हाथ धरे बैठा है। अधिकारी न तो मिलावट को रोक पा रहे हैं और न ही इसे बनाने वाले क्रशर संचालकों पर शिकंजा कस पा रहे हैं।
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गन्ना क्रशर हर साल अक्तूबर से मई, जून माह तक जो गुड़ तैयार करते हैं वह सारा बिक नहीं पाता। इसमें से कुछ वह अपने पास स्टॉक कर लेते हैं और कुछ थोक के भाव व्यापारियों को बेच देते हैं। बचा हुआ गुड़ सड़ने लगता है। जो गुड़ व्यापारियों के पास होता है वह गर्मी के कारण खुरने लगता है।
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इस पर इसे लोहे के केन में रख कर गन्ना क्रशरों पर पहुंचाया जाता है। वहां पर इसमें केमिकल व चीनी मिलाकर गुड़ को दोबारा से तैयार कर दिया जाता है। देखने में यह ऐसा लगता है जैसे गन्ने के ताजे रस से अभी-अभी बनाया गया हो। जिस गुड़ को लोग इतने चाव से खाते हैं उन्हें पता भी नहीं लगता कि इसमें केमिकल व चीनी मिलाई गई है।
जिले में कुल 112 गन्ना क्रशर हैं। इनमें सबसे ज्यादा 60 क्रशर खंड बिलासपुर में हें। इसके बाद 20 सरस्वतीनगर, 10 छछरौली व 12 अन्य जगहों पर हैं। लोग गुड़ को इसलिए खाते हैं क्योंकि उसमें चीनी नहीं होती, परंतु गन्ना क्रेशरों पर गुड़ में चीनी मिलावट कर लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। कुछ चरखियों ने गन्ना खरीद कर इनमें गुड़ बनाना शुरू कर दिया है। क्योंकि अभी गन्ने में मिठास नहीं है इसलिए इसमें चीनी मिलाई जा रही है।
यह चीनी भी घटिया क्वालिटी की होती है जो यूपी के व्यापारियों से सस्ते भाव पर खरीद कर लाई जा रही है। यह गुड़ उन लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर सकता है जिन्हें शुगर की बीमारी है और वह चीनी नहीं खा सकते। दिन में अधिकारियों की छापामारी का डर रहता है। पांच बजे के बाद अधिकारी भी छुट्टी करके घर चले जाते हैं। इसलिए रात को कोई देखने भी नहीं आता। इसलिए सारी रात पुराने गुड़ में मिलावट कर नया बनाया जाता है।
मिलावटी गुड़ नुकसानदायक : डॉ. पृथ्वी
डिप्टी सिविल सर्जन डॉक्टर पृथ्वी सिंह ने बताया कि चीनी के प्रयोग से डायबिटीज, हाइपोग्लाइसेमिया जैसे घातक रोग होने की संभावना रहती है। अगर गुड़ शुद्ध है तो उसके सेवन से ऐसा नहीं होता। चीनी में कार्बोहाइड्रेट होता है। इसलिए यह सीधे रक्त में मिलकर उच्च रक्तचाप जैसी अनेक बीमारियों को जन्म देता है जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। जबकि गुड़ में फाइबर और अन्य पौष्टिक तत्व बहुत अधिक होते हैं जो शरीर के लिए लाभदायक है।

टीम बनाकर कार्रवाई करेंगे : डॉ. बीरेंद्र
फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर डॉ. बीरेंद्र यादव का कहना है कि गुड़ में चीनी या अन्य केमिकल की मिलावट करना गलत है। ऐसा करने वाले क्रशर संचालकों पर टीम बनाकर कार्रवाई की जाएगी।
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