{"_id":"61ba4458ffdcd818d43dc2f3","slug":"kharmas-starts-now-after-january-14-auspicious-work-will-be-done-yamunanagar-yamuna-nagar-news-knl928816187","type":"story","status":"publish","title_hn":"खरमास शुरू, अब 14 जनवरी के बाद होंगे मांगलिक कार्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खरमास शुरू, अब 14 जनवरी के बाद होंगे मांगलिक कार्य
विज्ञापन
पंडित ललित शर्मा। संवाद
- फोटो : Yamuna Nagar
संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। अब इस साल कोई वैवाहिक व मांगलिक कार्य नहीं होगा। अब लोगों को शहनाई अगले माह ही सुनाई देगी। ऐसा बुधवार से खरमास लगने के कारण हो रहा है। मांगलिक कार्य 14 जनवरी 2022 के बाद शुरू होंगे।
बुड़िया निवासी ज्योतिषाचार्य एवं पंडित ललित शर्मा ने बताया कि सनातन मान्यताओं के अनुसार खरमास में किसी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किए जा सकते हैं। इस बार खरमास 14 जनवरी तक रहेगा। खरमास में मकान, प्लॉट, कृषि भूमि, वाहन इत्यादि भी नहीं खरीदना चाहिए। इसके अलावा व्यक्ति को इस अवधि में कोई नया कारोबार व निवेश भी नहीं करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि खरमास में सूर्य, धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं। इसके चलते सबसे बड़े व मंगलकारी गुरु ग्रह का प्रभाव कम हो जाता है। गुरु ग्रह को ही शुभ कार्यों का कारक माना जाता है, उनका प्रभाव कम होने के कारण इन शुभ कर्मों पर प्रतिबंध लग जाता है। गुरु ग्रह को कन्याओं के विवाह का कारक माना जाता है। गुरु कमजोर होने से शादी में देर होती है, साथ ही रोजगार और कारोबार में भी बाधा आती है। इसके चलते खरमास के दिनों में कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि मान्यता है कि सूर्य देव अनवरत ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं और यदि यह सिलसिला रुक जाए तो पूरा ब्रह्मांड थम जाएगा। ऐसा होने से समस्त लोकों में हाहाकार मच जाएगा। मान्यताओं के अनुसार भगवान सूर्य रथ के घोड़ों को विश्राम देने के लिए एक माह तक पैदल ही ब्रह्मांड का भ्रमण करते हैं। पैदल भ्रमण के कारण उनकी गति धीमी होती है, जिसके चलते यह चक्र एक माह में पूरा होता है। इसी स्थिति को खरमास कहा जाता है।
खरमास में दान-पुण्य से होगा लाभ
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि खरमास में दान-पुण्य करना लाभकारी होता है। ऐसा करने से अवांछित हानि से जातक बचता है। जरूरतमंद व्यक्तियों को दान देना चाहिए। इसके अलावा नियमित रूप से गीता का पाठ करना चाहिए। तुलसी पूजन भी लाभकारी होता है। प्रतिदिन तुलसी को जल अर्पित करना चाहिए। भगवान सूर्य की पूजा कर जल अर्पित करना चाहिए। पौ फटने से पूर्व उठना और भगवान सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए। गाय की सेवा करनी चाहिए। इससे भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और शुभ फल देते हैं।
नए साल में यह रहेंगे शुभ मुहूर्त
पंडित ललित शर्मा ने बताया 14 जनवरी के बाद से शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे। इसके बाद विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों के लिए बेहद शुभ मुहूर्त हैं। उन्होंने बताया कि जनवरी में 22, 23, 24 और 25 तिथि शुभ है। अलावा फरवरी में 5, 6, 7, 9,10, 18, 19 और 20, अप्रैल में 15,16, 19, 20, 21,22, 23, 24 और 27 तिथि मंगलकारी है। मई में 2, 3, 4, 9, 10, 11,12, 16,17,18, 20, 21, 26, 27 और 31 तिथियां शुभ रहेंगी। जून में 1, 6, 8, 10,11,13, 20,21, 23 और 24, जुलाई में 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9,14,18,19, 20, 21, 23, 24, 25, 30 और 31 बेहद मंगलकारी हैं। अगस्त में 1, 2, 3, 4, 5, 9, 10, 11,14, 15, 19, 20, 21, 28, 29, 30 और 31 को मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। सितंबर में 1, 4, 5, 6, 7, 8, 26 और 27 उत्तम हैं। इसके बाद अक्टूबर व नवंबर में तारा अस्त होगा। इसके अलावा दिसंबर में 2, 4, 7, 8, 9 और 14 को लग्न के शुभ मुहूर्त हैं।
विज्ञापन
यमुनानगर। अब इस साल कोई वैवाहिक व मांगलिक कार्य नहीं होगा। अब लोगों को शहनाई अगले माह ही सुनाई देगी। ऐसा बुधवार से खरमास लगने के कारण हो रहा है। मांगलिक कार्य 14 जनवरी 2022 के बाद शुरू होंगे।
बुड़िया निवासी ज्योतिषाचार्य एवं पंडित ललित शर्मा ने बताया कि सनातन मान्यताओं के अनुसार खरमास में किसी प्रकार के मांगलिक कार्य नहीं किए जा सकते हैं। इस बार खरमास 14 जनवरी तक रहेगा। खरमास में मकान, प्लॉट, कृषि भूमि, वाहन इत्यादि भी नहीं खरीदना चाहिए। इसके अलावा व्यक्ति को इस अवधि में कोई नया कारोबार व निवेश भी नहीं करना चाहिए।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि खरमास में सूर्य, धनु और मीन राशि में प्रवेश करते हैं। इसके चलते सबसे बड़े व मंगलकारी गुरु ग्रह का प्रभाव कम हो जाता है। गुरु ग्रह को ही शुभ कार्यों का कारक माना जाता है, उनका प्रभाव कम होने के कारण इन शुभ कर्मों पर प्रतिबंध लग जाता है। गुरु ग्रह को कन्याओं के विवाह का कारक माना जाता है। गुरु कमजोर होने से शादी में देर होती है, साथ ही रोजगार और कारोबार में भी बाधा आती है। इसके चलते खरमास के दिनों में कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि मान्यता है कि सूर्य देव अनवरत ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं और यदि यह सिलसिला रुक जाए तो पूरा ब्रह्मांड थम जाएगा। ऐसा होने से समस्त लोकों में हाहाकार मच जाएगा। मान्यताओं के अनुसार भगवान सूर्य रथ के घोड़ों को विश्राम देने के लिए एक माह तक पैदल ही ब्रह्मांड का भ्रमण करते हैं। पैदल भ्रमण के कारण उनकी गति धीमी होती है, जिसके चलते यह चक्र एक माह में पूरा होता है। इसी स्थिति को खरमास कहा जाता है।
खरमास में दान-पुण्य से होगा लाभ
पंडित ललित शर्मा ने बताया कि खरमास में दान-पुण्य करना लाभकारी होता है। ऐसा करने से अवांछित हानि से जातक बचता है। जरूरतमंद व्यक्तियों को दान देना चाहिए। इसके अलावा नियमित रूप से गीता का पाठ करना चाहिए। तुलसी पूजन भी लाभकारी होता है। प्रतिदिन तुलसी को जल अर्पित करना चाहिए। भगवान सूर्य की पूजा कर जल अर्पित करना चाहिए। पौ फटने से पूर्व उठना और भगवान सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए। गाय की सेवा करनी चाहिए। इससे भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और शुभ फल देते हैं।
नए साल में यह रहेंगे शुभ मुहूर्त
पंडित ललित शर्मा ने बताया 14 जनवरी के बाद से शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे। इसके बाद विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यों के लिए बेहद शुभ मुहूर्त हैं। उन्होंने बताया कि जनवरी में 22, 23, 24 और 25 तिथि शुभ है। अलावा फरवरी में 5, 6, 7, 9,10, 18, 19 और 20, अप्रैल में 15,16, 19, 20, 21,22, 23, 24 और 27 तिथि मंगलकारी है। मई में 2, 3, 4, 9, 10, 11,12, 16,17,18, 20, 21, 26, 27 और 31 तिथियां शुभ रहेंगी। जून में 1, 6, 8, 10,11,13, 20,21, 23 और 24, जुलाई में 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9,14,18,19, 20, 21, 23, 24, 25, 30 और 31 बेहद मंगलकारी हैं। अगस्त में 1, 2, 3, 4, 5, 9, 10, 11,14, 15, 19, 20, 21, 28, 29, 30 और 31 को मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। सितंबर में 1, 4, 5, 6, 7, 8, 26 और 27 उत्तम हैं। इसके बाद अक्टूबर व नवंबर में तारा अस्त होगा। इसके अलावा दिसंबर में 2, 4, 7, 8, 9 और 14 को लग्न के शुभ मुहूर्त हैं।